@narendramodi@BJP4India प्रधानमंत्री जी प्राइवेट संस्थानों में पिछले कई दशकों से कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। आप कहते है सभी लेनदेन अब ट्रांसपेरेंसी है परंतु क्या आपको पता है कि बैंक से कैश निकालने के बाद कहा और किसके पास जा रहा है? ब्लैकमनी रुकी नहीं बड़ा है।
@narendramodi देश में सरकारें बदलती रहीं, चेहरे बदलते रहे, चुनावी वादे बदलते रहे... लेकिन प्राइवेट कर्मचारियों की ज़िंदगी नहीं बदली।
जब तक प्राइवेट कर्मचारियों के अधिकार, वेतन और सम्मान पर गंभीरता से काम नहीं होगा, तब तक विकास के दावे सिर्फ भाषणों और पोस्टरों तक ही सीमित रहेंगे।
देश में सरकारें बदलती रहीं, चेहरे बदलते रहे, चुनावी वादे बदलते रहे... लेकिन प्राइवेट कर्मचारियों की ज़िंदगी नहीं बदली।
जब तक प्राइवेट कर्मचारियों के अधिकार, वेतन और सम्मान पर गंभीरता से काम नहीं होगा, तब तक विकास के दावे सिर्फ भाषणों और पोस्टरों तक ही सीमित रहेंगे।
जालंधर नगर निगम की कथित लापरवाही तीन मजदूरों पर भारी पड़ गई। रोड पर टूटे गटर के ढक्कन के कारण टायर फटते ही कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बैठे मजदूरों पर चढ़ गई।आखिर कब तक टूटी सड़कों और खुले गटरों की कीमत आम लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर चुकानी पड़ेगी?
संघर्ष तब तक करते रहो, जब तक कामयाबी तुम्हारे कदम न चूम ले।
लेकिन जब मुकाम हासिल हो जाए, तो उन लोगों को कभी मत भूलना जिन्होंने मुश्किल वक्त में तुम्हारा साथ दिया था।
सफलता पर विनम्र रहना, क्योंकि घमंड इंसान की पहचान नहीं, उसके पतन की शुरुआत होता है।
प्राइवेट संस्थानों में पढ़े-लिखे नौजवानों का शोषण जारी है। हालात ऐसे हैं कि सपने और आकांक्षाएं मजबूरियों के नीचे दब गई हैं। जब व्यवस्था ही साथ न दे, तो आवाज़ उठाने का हौसला भी कमजोर पड़ जाता है।
@abhijeet_dipke अभी देश में बहुत सारे ब्लैक मनी इकट्ठा करने वाले है सफेद पोशाक में समाज में रहते है जिनको सरकारी संस्थानों के अधिकारियों ने अपने संरक्षण में रखा हुआ है। सरकार ने कभी ग्राउंड लेवल पर इनवेस्टिगेशन नहीं किया। जो लगातार बचते रहे है।
12 वर्षों के बाद लोकतंत्र फिर से ज़िंदा हुआ है। इसका श्रेय उन तमाम छात्र-युवाओं को जाता है जिन्होंने संघर्ष, जागरूकता और संवैधानिक मूल्यों की ताकत से सरकार को संविधान का पाठ पढ़ाया। यह जीत केवल छात्रों की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों, जनभागीदारी और संविधान की भावना की जीत है।
सरकार की जवाबदेही तय होना ज़रूरी है। जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाली व्यवस्था में हर फैसले, हर विफलता का हिसाब होना चाहिए। लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, जनता के प्रति निरंतर जवाबदेही ही उसकी असली ताकत है। सवाल पूछना नागरिक का अधिकार है और जवाब देना सरकार का कर्तव्य।
आज दशकों बाद देश के युवाओं ने फिर से लोकतंत्र को जिंदा किया। अब सरकार को सोचना पड़ेगा कि भविष्य में यह गलती दोहराई न जाये। सभी युवा छात्रों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
@narendramodi प्रधानमंत्री जी युवाओं की बात सुनिये, सिस्टम को ठीक कीजिए, डेमोक्रेसी का गला मत घोंटो। छात्र एक अच्छा और सुरक्षित भविष्य चाहता है, उनका हौसला मत टूटने दो।
अंग्रेजी हकूमत ने आंदोलन को कुचलने की बहुत कोशिश की लेकिन अंततः भारत आजाद हुआ। प्रधानमंत्री जी, छात्रों की आवाज को दबाने की बजाए सिस्टम को ठीक कर दीजिए। युवाओं की सोच को जगह दीजिए।
केंद्र सरकार को युवाओं को बात सुननी चाहिए। युवा देश का भविष्य है। यह सिर्फ सिस्टम को ठीक करने की मांग कर रहे है। सिस्टम ठीक होगा तो देश का भविष्य सुरक्षित होगा।
देश के राजनीतिकों ने मिलकर युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया। नेताओं को सिर्फ अपनी सत्ता से मतलब है, जबकि ग्राउंड पर पढ़ा-लिखा युवा बेरोजगारी और पेपर लीक जैसी प्रशासनिक नाकामियों से जूझ रहा है। देश की असली पूंजी सिर्फ चुनावी रैलियों की भीड़ बनकर रह गई है। दुर्भाग्यपूर्ण!
“इंटरनेट और मोबाइल की दुनिया में कहीं हम अपनी असली पहचान तो नहीं खो रहे?
क्या आज हम इंसानों से कम और सोशल मीडिया से ज़्यादा जुड़ते जा रहे हैं?
कहीं भविष्य में ऐसा न हो कि मोबाइल के सिवा हमें कोई अपना ही न मिले।”
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