बी.एस.पी. द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति-दिनांक 03.09.2026
(1) बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन कु. मायावती जी द्वारा आज बी.एस.पी. की आल-इण्डिया की हुई बैठक में ��ार्टी व मूवमेन्ट से सम्बन्धित पिछले दिये गये कार्यो की समीक्षा व कमियों को दूर करने तथा आगे के हर वर्ष सालाना होने वाले कार्यों के बारे में भी पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों को दिये गये ज़रुरी दिशा-निर्देशों का पूरी ईमानदारी व निष्ठा से अनुपालन करने की सख़्त हिदयात।
(2)वैसे भी पार्टी के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी के त्याग, तपस्या व समर्पण की तरह ही, मेरे लिये भी ’ब���ुजन समाज’ का हित, कल्याण व उसकी अस्मिता अर्थात बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट द्वारा ’शोषित वर्ग को शासक वर्ग’ बनाने का मिशनरी लक्ष्य सर्वोपरि है जिसके लिए सत्ता भी ज़रूरी।
(3)इसके अलावा, आर.एस.एस. (RSS) प्रमुख श्री मो��न भागवत के अमेरिका दौरे में कही गयी बातों का भी संज्ञान लेते हुये बहन कु. मायावती जी ने कहा कि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने जातिवाद व असमानता आदि के विरुद्ध आजीवन कड़े संघर्षों के बल पर एससी, एसटी व ओबीसी समाज के
(4)अर्थात् ’बहुजन समाज’ के करोड़ों लोगों के आत्म-सम्मान तथा उनके वास्तविक हित, कल्याण व उनके लिये आरक्षण के संवैधानिक अधिकार के साथ-साथ मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्���कों के जान, माल एवं मज़हब की सुरक्षा तथा महिलाओं आदि के मामलों में भी आरएसएस की कथनी व करनी में ज़मीन-आसमान का भारी अन्तर होने से उनमें विश्वसनीयता का अभाव है। अतः आरएसएस, बाबा साहेब के मानवतावादी व समतामूलक संविधान पर खुद ईमानदारी व निष्ठा से अमल करे और अपने लोगों पर उसपर अमल भी कराये, यही पूरी तरह से देश व जनहित में होगा।
(5)साथ ही, पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने देश व दुनिया के ज्वलन्त मुद्दों पर भी पार्टी के लोगों का ध्यान आकृर्षित कराया।
लखनऊ, 03 सितम्बर 2026, वृहस्पतिवार: बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की चार बार रहीं मुख्यमंत्री व पूर्व सांसद तथा ’बहुजन समाज’ के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान की प्रतीक बहन कु. मायावती जी द्वारा आज बी.एस.पी. की आल-इण्डिया की हुई बैठक में पिछले दिये गये कार्यो की समीक्षा व उनकी कमियों को दूर करने तथा आगे के हर वर्ष के सालाना होने वाले कार्यों के बारे में भी पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों को दिये गये ज़रूरी दिशा-निर्देशों का पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ अनुपालन करने की भी सख़्त हिदायत दी गयी।
इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा कि बी.एस.पी., परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के आदर्श सि��्धान्तों व उच्च आदर्शों को लेकर चलने वाली उनके ’आत्म-सम्मान व स्वाभिमान’ के कारवाँ को सत्ता की मंज़िल तक पहुँचाने के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु समर्पित पार्टी एवं मूवमेन्ट है, जिसको लेकर मान्यवर श्री कांशीराम जी ने उच्च वैज्ञानिक पद की अपनी सरकारी नौकरी भी छोड़ दी थी।
और फिर अपने माँ-बाप का घर, परिवार, रिश्तों-नातों आदि ये सब कुछ त्यागकर अपना पूरा जीवन कड़ा संघर्ष करते रहे और मुझे भी ख़ासकर शोषितों को जागरुक करने के लिए देश के कोने-कोने में भेजकर इस योग्य बनाया कि मैं, उन्हीं के नक्शेक़दम पर चलते हुये, उनके अधूरे रहे कारवाँ को आगे बढ़ाने की पूरी त्याग व तपस्या में लगी रहूँ और अन्ततः उन्होंने मुझे बी.एस.पी. पार्टी व बहुजन मूवमेन्ट का राजनीतिक उत्तराधिकारी भी बनाया। और मैंने भी उनके जीते-जी ही काफी हद तक अच्छा र��ज़ल्ट लाकर भी दिखाया है और उनके संघर्ष को विनम्र श्रद्धांजलि के रूप में यूपी में पूर्ण बहुमत की बी.एस.पी. सरकार बनाकर बहुजन मूवमेन्ट के मान-सम्मान को ऐतिहासिक व गौरवशाली भी बनाया है, जो सबकी ज़ुबान पर होने के साथ-साथ तथा यहाँ इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में भी दर्ज है।
इसके साथ ही, आदरणीया बहन कु. मायावती जी ने यह भी बताया कि बहुजन समाज पार्टी के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कां���ीराम जी के संकल्प व समर्पण की तरह ही, मेरे लिये भी ’बहुजन समाज’ का हित, कल्याण व उसकी अस्मिता अर्थात् बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट द्वारा ’शोषित वर्ग को शासक वर्ग’ बनाने का मिशनरी लक्ष्य सर्वोपरि है और इस महान लक्ष्य की प्राप्ति के लिये निजी तौर पर मेरा ना तो कोई अपना है और ना ह�� पराया। जो भी बी.एस.पी व बहुजनों के हित के काम करेगा उसका स्वागत व आभार भी है।
और इसीलिये जिस प्रकार मान्यवर श्री कांशीराम जी ने अपने परिवार के लोगों व अन्य रिश्तों-नातों आदि को पार्टी कार्य में सहयोग करने की छूट तो दे दी थी, किन्तु उन्हंे चुनाव लड़ाने या सरकार बनने पर कोई भी पद आदि देने के वे खिलाफ थे, उसी प्रकार से उस संकल्प पर मैं भी पूरी तरह से क़ायम हूँ। जिस पर अमल करते हुये ही मैंने श्री आका��� आनन्द को पार्टी में कार्य करने की तो इनको इजाज़त दी है, जो हक़ीकत आप सभी लोगों के सामने है, लेकिन इस मामले में श्री आकाश आनन्द को अभी और अधिक परिपक्व/मैच्योर होने की जरुरत है। तब तक इनको पार्टी की अभी बड़ी ज़िम्मेवारी देना उचित नहीं होगा, जो कि विरोधियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों को इस्तेमाल करके चुनाव में हानि पहुँचाने से बचने के लिये भी समय की ज़रूरत है।
बी.एस.पी. यूपी स्टेट कार्याल�� में आयोजित इस आल-इण्डिया की बैठक को सम्बोधित करने से पहले मा. बहनजी ने बी.एस.पी. स���न्ट्रल कैम्प कार्यालय में विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ पदाधिकारियों व अन्य ज़िम्मेदार लोगों से राज्यवार समीक्षा बैठक की और उनसे उनके राज्यों में पार्टी संगठन की मज़बूती एवं पार्टी के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने के बारे में पिछली आल-इण्डिया की हुई बैठक में दिये गये दिशा-निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट ली और उल्लेखित कमियों को समयबद्ध तरीके़ से दूर करने की भी हिदयात दी। ख़ासकर यूपी, उत्तराख��्ड व पंजाब में ये कार्य चुनाव की घोषणा से काफी पहले ही पूरा करने के भी जरुरी निर्देश मा. बहनजी ने पार्टी के लोगों को दिये, जिसके लिए उन्होंने 25 अगस्त को पंजाब स्टेट की व 31 अगस्त को उत्तर प्रदेश स्टेट की अलग से पार्टी की बड़ी बैठक भी बुलाई, जिसकी जानकारी मीडिया बन्धुओं को भी है।
इसके साथ ही, बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी की अगले महीने दिनांक 9 अक्तूबर को पुण्यतिथि के ��वसर पर यूपी मंे प्रदेश स्तर पर तथा बाकी राज्यों में ज़ोन-स्तर पर ’खुली संगोष्ठी के कार्यक्रम’ पूरी मिशनरी भावना से आयोजित करने के निर्देश देते हुये कहा कि इन कार्यक्रमों को बी.एस.पी. के प्रदेश व मुख्य ज़ोन प्रभारी आदि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि ��ी.एस.पी. दिल्ली प्रदेश के सभी लोग नई दिल्ली गुरुद्वारा रकाबगंज रोड पर स्थित ’बहुजन समाज प्रेरणा स्थल’, जहाँ मान्यवर श्री कांशीराम जी की अस्थिकलश प्रतिष्ठापित है, वहाँ पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे।
इसके अलावा, यूपी-दिल्ली सीमा पर बी.एस.पी. सरकार द्वारा स्थापित भव्य ’बहुजन प्रेरणा केन्द्र’ में रख-रखाव का वर्तमान में सरकारी कार्य चलने के कारण इस वर्ष पश्चिमी ��ूपी के लोग भी, यूपी के बाकी सभी मण्डलांे के लोगों के साथ ही लखनऊ आकर यहाँ वीआईपी रोड पर, वहाँ ’बौद्ध स्मृति उपवन’ के सामने, बी.एस.पी. सरकार द्वारा स्थापित विशाल गुम्बद आकार के भव्य ’मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल’ पर अपनी विनम्र श्रद्धांजलि एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे, जिस कार्यक्रम को पूरी मिशनरी भावना से सफल बनाना है। इसके साथ-साथ हर वर्ष की तरह बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष ��े जन्मदिन के मौके पर पार्टी को आर्थिक सहयोग देने के लिए भी ज़रूरी दिशा-निर्देश दिये गये, जिस पर पार्टी के लोगों ने अपनी सहमति भी जताई।
इसके अलावा, आरएसएस प्रमुख श्री मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान भारत की अनेकता में एकता आदि सम्बंधी कही गयी बातों का ��ंज्ञान लेते हुये बहन कु. मायावती जी ने कहा कि भारत में ख़ासकर जातिवाद व असमानता तथा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के अथक संघर्षों से एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों के अर्थात देश में ’बहुजन समाज’ के करोड़ों लोगों के वास्तविक हित, कल्याण और उनके आरक्षण के संवैधानिक अधिकार के साथ-साथ महिलाओं, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के जान, माल व मज़हब की सुरक्षा-सम्मान आदि के मामलों में आरएसएस की कथनी व करनी में ज़मीन-आसमान का भारी अन्तर होने के कारण ही उनमें विश्वसनीयता का अभाव है तथा यह संगठन काफी पुराना होने के बावजूद वह मान्यता/सम्मान अर्जित नहीं कर पाया है जो वे चाहते हैं।
इसीलिये आरएसएस के लोग, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी, कल्याणकारी व समतामूलक संविधान में अपनी पूरी आस्था व निष्ठा रखते हुये उस पर खुद ईमानदारी से अमल करें और उसी के हिसाब से अपने लोगों को उस पर अमल करने को बाध्य भी करें तो यह पूरी तरह से देश व जनहित में होगा और देश अवश्य ही अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी, अशिक्षा को दूर करके विकास की ओर तेज़ी से अग्रसर होगा जो कि संविधान का मुख्य उद्देश्य भी है और जिसके लिये बी.एस.पी. की स्थापना की गयी है और सरकार में रहते हुये व सरकार में नहीं रहने पर भी लगातार संघर्षरत है, और यही देश की जातिवादी व जनविरोधी पार्टियों के खिलाफ बी.एस.पी. की अम्बेडकरवादी पहचान है।
जबकि अन्य पार्टियों की तरह कांग्रेस पार्टी तो हर मामले में जबरदस्त दलित व अम्बेडकर विरोधी पार्टी है, जिसका इतिहास किसी से छिपा नहीं है। ऐसी स्थिति में अब पार्टी ने पूरे देश में सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले ही लड़ने का फैसला लिया है।
इसके साथ ही, पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह भी कहा कि इस समय दुनिया के कई भागों में जारी जंग तथा उसके फलस्वरूप तेज़ी से बदलते हुये संगीन हालात व सुरक्षा उपायों आदि में भी भारत की अपनी नीति/रणनीति मज़बूत होनी चाहिये।
और अब फिर से देश में आएदिन बढ़ रही महंगाई व कु��रती हो रही मार भी काफी चिन्ताजनक है। साथ ही, वर्तमान में जेन-जी (Gen-Z) व जेन-अल्फा (Gen-Alpha) आदि की भी चल रही गम्भीर समस्याओं को दूर करना बहुत ज़रूरी है। राज्यों के साथ-साथ खासकर केन्द्र सरकार भी इन सब मामलों को ज़रूर गम्भीरता सेे ले, तो यह देश व जनहित में उचित होगा।
जारीकर्ता:
बी.एस.पी. यूपी स्टेट कार्यालय
12 माल एवेन्यू,
लखनऊ-226001
1. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर अर्थात जीडीपी ग्रोथ के सरकारी दावे को लेकर ज़बरदस्त बहस छिड़ी हुई है, और देश में ख़ासकर अति-महंगा��, अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी आदि की मार से पीड़ित आमजनता अचंभित भी है कि वह किस पर भरोसा करे और क��स पर ना करे।
2. वैसे इसके सम्बंध में सरकार के आसमान छूते दावे को प्रथम दृष्टया मान लिया जाये तो यह अच्छी बात होगी, किन्तु अगर यह जुगाड़ के आँकड़े हैं तो यह चिन्ता की बात ज़रूर है। इसीलिये जनता में उम्मीद जगाने हेतु सरकार को विश्वसनीय ढंग से यह ज़रूर बताना चाहिये कि इस उच्च विकास दर का क्या लाभ देश की करोड़ों ग़रीब मेहनतकश जनता को मिला है और आगे में इसका क्या लाभ होगा।
3. इतना ही नहीं बल्कि यह मुद���दा आमजनहित से जुड़ा होने के कारण विकास के आँकड़े व दावे दोधारी तलवार की तरह हैं। इसीलिये उन्हें ज़मीनी हक़ीक़त से भी ज़्यादातर आँका जाता है अर्थात् विकास वही सही व उपयोगी जो जनता को भाये यानी जनता के जीवन में समतामूलक परिवर्तन लाये और लोग ख़ुश व खुशहाल बनें।
4. अतः जीडीपी ग्रोथ के आँकड़े व दावे आदि अपनी जगह है, लेकिन विकास की असल हक़दार देश की करोड़ों मेहनतकश जनता को भी इसका लाभ मिलना और उसे ��सका महसूस होना भी देश व जनहित में ज़रूरी है, वरना यहाँ के लगभग 140 करोड़ लोग ’धनवान सरकार की ग़रीब जनता’ होने का बोझ लगातार ढोती रहेगी। देश का विकास तभी ’अच्छे दिन’ वाला होगा जब यहाँ की करोड़ों बहुजन मेहनतकश जनता ग़रीबी, बेरोज़गारी व भ्रष्टाचार आदि से मुक्त आत्म-सम्मान का थोड़ा सुखी जीवन जीने योग्य बनेगी।
5. इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों का दोगुना तक मानदेय बढ़ाने तथा 20 लाख लागों को सुरक्षा कवर आदि यूपी आउटसोर्स सेवा निगम की स्थापना के माध्यम से देने के फैसले से कहीं बेहतर होता लोगों को सीधे तौर पर सरकारी नौकरी देना, ताकि यह व्यवस्था अफसरशाही की मनमानी, भ्रष्टाचार एवं शोषण आदि की जंजाल से मुक्त हो।
1. ज़िला सहारनपुर की मस्जिद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में आएदिन मस्जिदों को काफी आपाधापी में अवैध बताकर उनको ध्वस्त करने का जो सरकारी ��भियान चल रहा है वह ठीक नहीं है तथा सरकार को ऐसे निगेटिव हालात से बचने के लिये इस पर तुरन्त रोक लगाकर इसके समाधान के अन्य उपाय ज़रूर करने चाहिये।
2. वैसे भी एक संवैधानिक सेक्युलर सरकार द्वारा सभी धर्मों के मानने वालों एवं उनके धार्मिक स्थलों आदि का एक समान आदर-सम्मान व उनकी सुरक्षा करने का उत्तरदायित्व बनता है। इस्लाम मज़हब में मस्जिदें हर दिन इबादत बल्कि दिन में कई बार जमात के साथ नमाज़ पढ़��े का मुख्य व अभिन्न अंग हैं, जिसको ध्यान में रखकर व भारतीय परम्परा के अनुसार सम्मान देना देश व व्यापक जनहित में ज़रूरी है।
3. इसके साथ ही, बिना नियम-क़ानून का समुचित अनुपालन किये हुये किसी भी अभियुक्त का मकान ध्वस्त करके उसके पूरे परिवार को सामूहिक तौर पर सज़ा देकर बेघर बार कर देने की कार्रवाईयों से भी लोग काफी विचलित हैं। ऐसे में बी.एस.पी सरकार की तरह का ’क़ानून द्वारा क़ानून का राज’ का व्यवह��र ज़रूरी है।
4. अतः केवल सरकार ही नहीं बल्कि माननीय न्यायालय भी इस ओर समुचित ध्यान दें तो यह ��चित होगा। लेकिन ऐसे हालात में सभी लोग सौहार्दपूर्ण वातावरण भी ज़रूर बना कर रखें, पार्टी की यह भी अपील है।
1. देश में एक नहीं बल्कि अनेकों ऐसे उदाहरण हैं जिससे लोगों को यह लग रहा है कि सीजेपी का जेन-जी (Gen-Z) अर्थात देश के युवाओं और बेरोज़गारों आदि की ज्वलन्त समस्याओं को लेकर इनका यह आन्दोलन विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा हाईजैक कर लेने से युवाओं व छात्रों आदि को जंतर मंतर आन्दोलन के दौरान जो इनको बड़े-बड़े सपने दिखाये गये थे, वे अब स्वतंत्र कम व राजनीतिक ज़्यादा होकर गंभीर श���काओं में घिर गये हैं।
2. किन्तु ख़ासकर जेन-जी (Gen-Z) व जेन-अल्फा (Gen-Alpha) की ज़रूरी माँगों को लेकर बी.एस.पी. को पूरी सहानुभूति व इसके प्रति चिन्ता भी हमेशा रही है और आगे उनके सहयोग के लिये बी.एस.पी. के सभी स्टेट यूनिटों को ��िर्देशित किया जाता है कि वे अपने-अपने राज्य व क्षेत्र में सम्बंधित अधिकारियों से मिलकर उनकी समस्याओं के शान्तिपूर्ण तरीक़े से समाधान के लिये ज़रूर तत्पर रहें।
3. लेकिन बी.एस.पी. के अनुशासन के अनुसार पार्टी के लोग धरना, प्रदर्शन व आन्दोलन आदि नहीं करें और अपनी तन, मन, धन की शक्ति एवं ऊर्जा को चुनाव के लिये सुरक्षित रखें, ताकि करोड़ों दलितों व अन्य उपेक्षितों के सच्चे मसीहा परमपूज्य बाबा साहे�� डा. भीमराव अम्बेडकर के सपनों को साकार करने वाली ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की अपनी सरकार बनाकर जेन-जी (Gen-Z) और जेन-अल्फा (Gen-Alpha) सहित सर्वसमाज की सभी दुख-तकलीफों आदि का स्थायी समाधान निकल सके, जैसाकि बी.एस.पी. की यूपी में चार बार रही सरकारों में करके भी दिखाया गया है।
4. इसके साथ ही, जेन-जी (Gen-Z) के जंतर मंतर आन्दोलन के दौरान पुलिस अगर समय से उचित कार्रवाई करती तो श्री संजय आज़ाद जैसी गंभीर घटना नहीं ��ोती, किन्तु अब इस प्रकरण के अभियुक्तों के खिलाफ सख़्त से सख़्त क़ानूनी कार्रवाई ज़रूर होनी चाहिये वरना फिर बी.एस.पी भी ऐसे मामलों में कोई पी��े नहीं रहेगी।
यूपी के ज़िला हापुड़ के थाना हापुर नगर के अन्तर्गत दो समुदायों में हुई आपसी रंजिश व झड़प में घायल हुये दलित समाज के लोगों में से एक व्यक्ति की आज हुई मौत अति-दुखद। सरकार आरोपियों को क़ानूनी सज़ा के साथ-साथ पीड़ित परिवार की भी सहायता ज़रूर करे तो यह उचित होगा। वैसे भी आपसी रंजिशों का ख़ून-ख़राबा में बदल जाना अति-निन्दनीय एवं चिन्तनीय तथा ऐसी घटनाओं को सरकारी हस्तक्षेप आदि से हर हाल में रोका जाना चाहिये ताकि विवाद संघर्ष तक ना पहुँच पाये।
क्या लगता हैं बसपाइयों इस बार फिर से बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम जी अनुयायिओं का लाखों की संख्या में जनसैलाब लखनऊ की धरती पर नीले झंडों के साथ दिखाई देगा?
अगर इस बार बहनजी ने ऐलान किया तो समझ लीजिए 15 लाख से ज़्यादा लोगों का हुजूम इकट्ठा होगा।
बीएसपी की पुरानी पिच 14 साल बाद वापिस आ गई है। पार्टी यूपी में बेहतरीन प्रदर्श करेगी। अच्छे अच्छों को चौका देगी। 10 मार्च 2027 के लिए ये पोस्ट सेव करके रखें।
मैं मौर्य समाज से आता हु मैं बसपा में तीसरी पीढ़ी हु मेरे दादा जी भगवान दास मौर्��� साहब का पोता हु जिन्होंने भदोही जिले में बसपा की नींव रखी थी कांशीराम साहब के बहुत करीबी थे बसपा को अपने खून से सिंचा था
मेरे पिता श्री डॉक्टर राकेश मौर्य जी तीन बार सभासद रहे हम लोग कट्टर बसपाई है
80वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनाएं।
आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम केवल आज़ादी का उत्सव न मनाएँ, बल्कि एक मजबूत संकल्प भी लें, संविधान को मजबूत करेंगे, हर गरीब, शोषित, वंचित एवं कमजोर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करेंगे और लोकतंत्र को दो दलों की जागीर नहीं बनने देंगे।
भारत का भविष्य हमारे युवाओं के हाथों में है। इसलिए हमारी सबसे बड���ी प्राथमिकता होनी चाहिए, कि हर युवा को शिक्षा, समान अवसर, कौशल और अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने का अधिकार मिले।
जय भीम, जय भारत
1. जैसाकि सर्वविदित है कि FCRA संशोधन बिल, जिसे सरकार अति-महत्वपूर्ण बताकर अन्य विधेयकों की तरह ही इसे तुरन्त पास कराना चाहती थी, किन्तु विपक्ष के ज़बरदस्त विरोध के चलते व संसद में इस पर बिना प्रारम्भिक चर्चा के ही इसे कल काफी आपाधापी में संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया गया है।
2. वैसे इस एफसीआरए संशोधन बिल को कांग्रेस पार्टी व इनके सहयोगी दल सीधे तौर पर अल्पसंख्यक विरोधी बताकर इस बिल को वापस लेने की माँग कर रहे हैं, जबकि सरकार इसे विदेश फण्डिंग के उपयोग में कथित भ्रष्टाचार से जोड़कर इसमें कठोर बदलाव करना चाहती है। इससे स्पष्ट है कि इस बिल का सत्ता व विपक्ष दोनों ने ही राजनीतिकरण ज़्यादा कर दिया है।
3. बेहतर होता यदि विपक्ष कल इस विधेयक को रखने के दौरान् संसद को चलने देता और इसकी कमियोें को उजागर करता तो उसे पूरा देश जानता, लेकिन इन्होंने संसद को ही अपनी ज़िद के हिसाब से नहीं चलने दिया।
4. इतना ही नहीं बल्कि ऐसे अनेकों और बिल भी विपक्ष द्वारा संसद को नहीं चलने देने की वजह से सरकार ने उन्हें मिनटों में पास करा दिये हैं, जिन्हें इनको रोकना चाहिये था, जो विपक्ष ने ऐसा नहीं किया, जिसका सरकार अपने पक्ष में पूरा फायदा उठा रही है। इससे विपक्ष की या तो अन्दरुणी मिल��भगत लगती है ��ा फिर जेन-जी (Gen Z) के वोटों के स्वार्थ में इन्हें देश के अन्य मुद्दे बिल्कुल भी नज़र नहीं आ रहे हैं। हालाँकि वर्तमान हालात में जेनजी की समस्याओं के मुद्दे को प्राथमिकता देते हुये इनको जनहित के अन्य मुद्दों को भी महत्व देना चाहिये था।
5. इसके साथ ही, इनको अयोध्या में राममन्दिर के चढ़ावे में गड़बड़ी का अर्थात् इसके भ्रष्टाचार का मुद्दा भी संसद में उठाना चाहिये था, जिसे भी अब विपक्ष ने अपने राजनैतिक स्वार्थ में उसे पीछे कर दिया है, जबकि इस पर संसद में चर्चा होना बहुत ज़रूरी है।
6. ऐसे में देश की जनता, सत्ता व विपक्ष के बीच इस समय संसद सत्र के दौरान् भी चल रही उनके अपने-अपने राजनैतिक स्वार्थ की लड़ाई से पूरी तरह से सचेत रहते हुये अपनी एकमात्र अम्बेडकरवादी बहुजन समाज पार्टी, जो ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीतियों व सिद्धान्तों के आधार पर पूरी ईमानदारी व निष्ठा से चल रही है, उससे देश �� आम-जनहित में जुड़े, यही समय की माँग व सर्वसमाज के हित में भी है।
उत्तर प्रदेश में बी.एस.पी. सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे श्री अनन्त कुमार मिश्रा उर्फ अन्टू मिश्रा को उनकी पार्टी विरोधी गतिविधियों आदि के फलस्वरूप आज तत्काल प्रभाव से उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।
वैसे भी अब जबकि ख़ासकर उ���्तर प्रदेश में चुनावी माहौल काफी गरमाया हुआ है, पार्टी के सभी स्तर के लोगों को विरोधियों के सभी प्रकार के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों से सावधान रहते हुये अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ बी.एस.पी. के अम्बेडकरवादी मिशन को आगामी विधानसभा आमचुनाव में सफल बनाने में पूरे जी-जान से लगे रहना है, यही संदेश व अपील भी है।
1. उत्तराखण्ड स्टेट के हल्द्वानी में अभी हाल ही में, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे के हुये प्रोग��राम के बाद उनके मंच का दलित होने की वजह से शुद्धीकरण किया गया है। यह जानकारी कल संसद के ज़रिये भी देश को मिली है। यह मामला अति-निन्दनीय व चिन्तनीय है तथा वहाँ कि सरकार बिना कोई देरी किये हुये ऐसे जातिवादी एवं सामन्ती तत्वों के विरुद्ध सख़्त क़ानूनों के तहत् उचित कार्रवाई करके उन्हें जेल भेजे।
2. साथ ही, इस घटना आदि के सम्बंध में आर.एस.एस. के मुखिया को भी संज्ञान लेकर ज़रुर गंभीरता से सोचना चाहिये जो कि दलितों के आर्थिक तौर पर थोड़ा मज़बूत हुये लोगों को आरक्षण से वंचित करने की बात कर रहें हैं।
3. इसके इलावा, अभी हाल ही में महाराष्ट्र के नान्देड़ में शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख श्री सुखबीर सिंह बादल पर किये गये हमले की घटना भी अति-दुःखद व चिन्तनीय है। केन्द्र व महाराष्ट्र की सरकार इस घटना को पूरी गम्भीरता से लेते हुये दोषियों के विरुद्ध सख़्त क़ानूनी कार्रवाई करे।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीतियों एवं सिद्धान्त पर चलने वाली विशिष्ट पहचान वाली पार्टी है, जो किसी भी समाज के व्यक्ति विशेष से ज़्यादा, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के पवित्र संविधान की सच्ची मंशा के मुताबिक़, सर्वसमाज के हित व कल्याण के लिये समर्पित है और इसीलिये पार्टी में नेताओं की नहीं बल्कि पूरे तन, मन, धन से समर्पित अम्बेडकरवादी कार्यकर्ताओं की ही फौज हर स्तर पर अधिकतर सक्रिय है। यही मान्यवर श्री कांशीराम जी द्वारा पार्टी व मूवमेन्ट के हित मे��� स्थापित परम्परा भी है।
2. इसीलिये ब्राह्मण समाज व अन्य सभी समाज के जो भी लोग अभी तक पार्टी से निकाले गये हैं या निकाले जा रहे हैं या वे अपने निजी स्वार्थ में दूसरी पार्टियों में चले गये हैं या फिर वे अपने ग़लत कारनामों की वजह से उनसे बचने के लिये ख़ासकर सत्ताधारी पार्टी में शामिल हो गये हैं, तो उनका पार्टी के प्रति समर्पण भाव लोगों की निगाह में भी उनके कार्यों के ऑकलन के आधार पर काफी सशंकित व निराशाजनक बना रहा है, क्योंकि ख़ासकर बी.एस.पी. सरकार के दौरान भी ऐसे लोगों ने अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ के लिए ही पार्टी से फायदा ज़्यादा उठाया है और अपने समाज व पार्टी के हित के लिए वे लोग अधिकतर निष्क्रिय व उदासीन ही बने रहे हैं।
3. इतना ही नहीं बल्कि इन्हीं सब कारणों से उन लोगों ने अपनेे समाज को भी सही से बी.एस.पी. में नहीं जोड़ा है, जो कि पार्टी की अपेक्षा के विरुद्ध इनका यह सब कृत्य होने की वजह से पिछले कई लोकसभा व विधानसभा आमचुनावों में पार्टी को काफी नुकसान भी उठाना पड़ा है, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है।
4. किन्तु उसके बाद से पार्टी में लम्बे अरसे से ईमानदार व हर मामले में पार्टी के प्रति लगातार समर्पित एवं निष्ठावान चले आ रहे पार्टी के वरिष्ठ लोगों द्वारा आएदिन नये कर्मठ व ईमानदार लोगों व ख़ासकर युवाओं को पार्टी की नर्सरी में तैयार किया जाता रहा है, जो यह अभियान पूरी तरह से ज��री है।
5. और अब वे लोग काफी हद तक पार्टी की अपेक्षा के अनुसार जी-जान से लगातार लगे हुये हैं। पार्टी को पूरी उम्मीद है कि ये सभी नये व पुराने लोग हर मामले में ज़्यादा बेहतर, साफ-सुथरे व मिशनरी मानसिकता के बनकर उभरेंगे और वे सच्चे अम्बेडकरवादी एवं संविधानवादी संघर्ष के भरपूर तौर पर काम आयेंगे।
6. इसके साथ ही, पार्टी ख़ासकर ब्राह्मण समाज को यह भी विश्वास दिलाना चाहती है कि वे अपनी पूरी मज़बूती के ��ाथ पार्टी से जुड़े रहें और उन्हें हर चुनाव में उनकी तैयारी के आधार पर उनकी भागीदारी यानी चुनावी उम्मीदवार बनाने तथा सरकार बनने पर सन 2007 की तरह ही इनको व अन्य सभी समाज को भी पूरा-पूरा उचित मान-सम्मान ज़रूर दिया जाता रहेगा। और सर्वसमाज आधारित ऐसी अपनी बी.एस.पी. पार्टी को ज़मीनी स्तर पर तैयार करने के मामले में अब विशेषकर दलित समाज को ही अपनी अह्म भूमिका निभानी है। वैसे बी.एस.पी. की नर्सरी, सर्वसमा�� के हसीन गुलदस्तों से ही, अधिकतर हरी-भरी व सजी रहती है