बंगाल में जिस मासूम बेटी को गैंगरेप के बाद दरिंदों ने मार दिया आज उस बेटी के पिता से वीडियो कॉल पर बात की और उस बेटी के इंसाफ के लिये इस मामले को पार्लियामेंट में उठाने और क़ानूनी, आर्थिक मदद देने का वादा किया।
जल्द ही गैंगरेप करके मारी गई बारुईपुर बंगाल की बेटी के घर परिवार का दुख साझा करने जाऊँगा।
जो ग़ाज़ियाबाद कभी व्यापारिक गतिविधियों के लिये जाना जाता था वहॉं इन दिनों सिर्फ इस तरह झुंड घूमते हैं जिन्हें क़ानून व्यवस्था का कोई डर नहीं है।
जिसकी चाहते हैं लिंचिंग शुरू कर देते हैं, अब यही तय करेंगे की कौन क्या खायेगा और क्या पहनेगा।
ग़ाजियाबाद का पुलिस प्रशासन शायद सो रहा है या ग़ुंडों को खुली छूट दे रखी है ?
@Uppolice@ghaziabadpolice https://t.co/Mb8yY3oJUV
ये भाजपा शासित बंगाल की तस्वीर है जहॉं 12 साल की बिटिया के साथ गैंगरेप करके उसकी हत्या की गई और पूरा प्रशासन हत्यारों को बचाता रहा क्योंकि उनके सत्ताधारी पार्टी से रिश्ते थे।
इससे शर्मनाक और क्या हो सकता है दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर में इस वक्त चारों तरफ इस बिटिया के परिवार की चीखें गूँज रही हैं।
बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाले प्रधानमंत्री जी और उनके चहेते मुख्यमंत्री चुप्पी साधे हैं।
@WBPolice@narendramodi
सबकुछ न्यौछावर करके भी फर्ज़ निभाया जाता है,
इस दुनिया से वापस जाने को ही आया जाता है।
एक बूढ़े से शख़्स ने सारी दुनिया को ये बता दिया
अपनी शहादत देकर के भी मुल्क बचाया जाता है।।
-इमरान प्रतापगढ़ी
“साझी शहादत - साझी विरासत”
मुशायरा एवं कवि सम्मेलन
04 July 2026 5 PM
मावलंकर ऑडिटोरियम, कास्टीट्यूशन क्लब, नई दिल्ली
नफ़रतों के दौर में मुहब्बतों की एक कोशिश,
आइये आपका इंतज़ार रहेगा।
साझी शहादत - साझी विरासत की ये ख़ूबसूरत शाम सिर्फ एक साहित्यिक शाम ही नहीं थी बल्कि गंगा जमुनी तहज़ीब का एक एैसा संगम थी जिसने दिलों को मिलाने का काम किया।
ढ़ेर सारे सियासी महारथियों की मौजूदगी और शायरी का शानदार दौर, कुछ विशिष्ठ व्यक्तियों का सम्मान और मौलाना आज़ाद साहब और पंडित नेहरू पर लिखी गई डॉ मोहम्मद नौशाद की दो किताबों का विमोचन।
सम्पत सरल, चरन सिंह बशर, कुँअर जावेद, अमीर इमाम, तबरेज़ हाशमी, हिमांशी बाबरा, इब्राहिम ज़ीशान, मनिका दूबे, अब्बास क़मर की शायरी और मारूफ़ रायबरेलवी की निज़ामत ने शाम को यादगार बना दिया।
ये देश साझी शहादत से बना है और हम इसकी साझी विरासत को हमेशा बरकरार रखेंगे।
बॉम्बे हाईकोर्ट के माननीय न्यायमूर्ति माधव जामदार जी की ये टिप्पणियॉं महाराष्ट्र सरकार के साथ साथ उन सभी सरकारों के लिये आईना हैं जो पुलिस के ज़रिये नागरिकों को डराना चाहती हैं।
शुक्रिया जज साहब,
न्यायालय की चौखट एैसे ही मुखर रहे तो सत्ता के सिंहासनों पर बैठे लोगों को मजबूरन लोकतंत्र का पालन करना पड़ेगा।
देश की संसद में रक्षा मंत्री जी का खुलेआम झूठ बोलना कि कोई क्षति नहीं हुई और अब साल भर बाद 6 शहीदों के नाम सार्वजनिक करना।
ये सरकार संसद में झूठ बोलती है और अपनी पीठ थपथपाती है।
साल भर तक सैनिकों की शहादत को ना स्वीकारना,
ये उन शहीदों के परिजनों के ऑंसुओं का भी अपमान है।
अगर देश के लाखों,करोड़ों छात्रों की पीड़ा पर चर्चा करना राजनीति है तो हर राजनैतिक दल को एैसी राजनीति करनी चाहिये।
मैं देश के मीडिया कर्मियों से भी अनुरोध करूँगा कि आपके भी बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, आप भी छात्रों का साथ दीजिये, शिक्षा मंत्री को कटघरे में खड़ा करके सवाल पूछिये।
सवाल ये नहीं शीशा बचा के टूट गया
सवाल ये है कि पत्थर किधर से आया था।
“छात्रों की गूँज” प्रेस कॉंफ्रेंस में रॉंची में मीडिया के साथियों से संवाद किया और राहुल गॉंधी जी के शिक्षा के भविष्य को बचाने के ऑंदोलन को छात्रों और युवाओं से साझा किया।
@RahulGandhi@kcvenugopalmp@priyankagandhi@IYC
तुझको कितनों का लहू चाहिये एै अर्ज़-ए-वतन
कितनी आहों से कलेजा तेरा ठंडा होगा।
पेपर लीक से उधर दर्जनों छात्रों की जान चली गई और इधर प्रधानमंत्री जी धर्मेंद्र प्रधान जी की पीठ थपथपा रहे हैं, प्रधानमंत्री द्वारा शिक्षा मंत्री की प्रशंसा इस देश के लाखों छात्रों के दर्द और ऑंसू का मज़ाक है।
हमारी मॉंग है कि पेपरलीक रोका जाये, जवाबदेही तय हो।
बिना किंतु परंतु के धर्मेंद्र प्रधान जी का इस्तीफ़ा हो।
मुज़फ्फरनगर में मजदूरों की बंधुआ मजदूरी का मामला बेहद चौंकाने वाला है।
बिना मज़दूरी दिए काम करवाने के अलावा, मजदूरों को कुत्तों से कटवाया गया, भाले से गोदा गया, कोड़े मारे गए, और उन्हें मवेशियों का चारा खिलाया गया। यह इंसानी गरिमा पर हमला है - पीड़ितों को न्याय के साथ पुनर्वास और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
साथ ही हमें यह भी पूछना ज़रूरी है कि मज़दूर ऐसी खतरनाक परिस्थितियों में किन मजबूरियों में फंस जाते हैं।
जब रोज़गार ख़त्म हो जाते हैं, आमदनी ठहर जाती है, और सबसे कमज़ोर वर्गों के लिए बने मनरेगा और श्रम कानूनों जैसी सुरक्षाएं कमज़ोर कर दी जाती हैं, तो हताशा बढ़ती जाती है। जिन लोगों के पास कोई और विकल्प या सुरक्षा नहीं होती, वो ऐसे शोषण का आसान शिकार बन जाते हैं।
यह कोई आम आपराधिक घटना नहीं है - यह एक धराशाई हुई अर्थव्यवस्था का मलबा है।
राहुल गॉंधी जी द्वारा प्रारंभ किया गया ऑंदोलन “छात्रों की गूँज” के संदर्भ में प्रेस कॉंफ्रेंस के लिये रॉंची पँहुचने पर एअरपोर्ट पर झारखंड प्रदेश कॉंग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश जी, स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी जी, अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश चेयरमैन मंजूर अंसारी जी ने स्वागत किया।
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