दर्पण क्या बताएगा, सुंदरता तुम्हारी!
हो अगर समय तो, देखना आंखें हमारी...
तुम्हारी मुस्कान का जादू, हमारे दिल पर छाया है!
ठीक वैसे ही जैसे, सर्द के बाद वसंत का मौसम आया है...
तुम्हारी आवाज़ की मिठास, हमारे कानों में समायी है! एक तस्वीर तुम्हारी, हमने दिल मे बसायी है....!!
मैं ढूँढता हूँ खुद को उसकी आँखो में, वो मिल जाती है मुझे मेरी बातों में....!
लगता है उसे..मेरी मंशा ठीक नहीं उसके लिए!!
अब कैसे बताऊ कि वही है सब कुछ..मेरे लिए....!✨️
अज्ञात से सवाल का
अज्ञात सा जवाब है
अज्ञात सी मेरी नींद में
अज्ञात सा इक ख़्वाब है
अज्ञात से महासागर में अज्ञात सा ही आब है
मेरी हैसियत कुछ भी नहीं कोई अज्ञात ही लाजवाब है...!🥀❤️