ये सब फालतू के सवाल मत उठाया करो जी!
स्कूल, किताब, पढ़ाई और छात्रों के भविष्य से हमारा क्या लेना देना? 😡
आप तो यह पूछो कि कांवड यात्रा में फूल बरसाने इस बार कौन जा रहा है, कौनसे फूल बरसाए जाएंगे, हेलीकॉप्टर तैयार है या नहीं. 🤷😌
भारत माता की जय! वंदे मातरम्!
MP में जब सरकारी स्कूलों के बच्चों ने मुख्यमंत्री जी से स्कूल में बिजली ना रहने और खराब पंखों की समस्या के बारे में बताया तो
स्कूल में इंवर्टर और नए पंखे लगवाने की जगह CM साहब कह रहे हैं कि पंखा हवा नहीं देता!
हवा तो कमरे में पहले से ही है, पंखा तो बस उसे हिला रहा है🤔🙏
गडकरी ने पेट्रोल में इथेनॉल मिला कर दो तरीक़े से जनता की जेब काटी है !
कम माइलेज और मैकेनिकल खर्च और अब मंहगी हो गयी चीनी का बोझ : उमाशंकर सिंह, वरिष्ठ पत्रकार
नागपुर हां वही नागपुर जहां संघ का मुख्यालय है
जहां महानगर पालिका में भाजपा है
हां वही नागपुर जहां से मुख्यमंत्री आते है
नागपुर महानगर पालिका में वंदे मातरम्
के मात्र दो छंद गाए गए
शाह की बात माने तो नागपुर के
भाजपा नेता,संघ नेता देशद्रोही हो गए क्या 🤔
भैंस के तबेले में सरकारी स्कूल चलाएंगे लेकिन किसी ने अगर सच दिखाया तो उस पर हमले करेंगे.
ABP न्यूज के हवाले से जयपुर के पास चल रहे सरकारी स्कूल का हाल देखिए
अफसरों ने अपने फोन पब्लिक रिलेशन ऑफिसर (PRO) या स्टेनो को दे रखे हैं। यही लोग तय करते हैं कि आपकी बात अफसर से होगी या नहीं। नियम है कि DM-SSP सरकारी नंबर अनिवार्य रूप से अपने पास रखेंगे। लोगों की कॉल खुद उठाएंगे।
लोगों की समस्याओं का तेजी से समाधान हो, इसके लिए सरकार इन नंबरों पर करोड़ों रुपए खर्च करती है। सिर्फ पुलिस विभाग के सरकारी नंबरों के रिचार्ज पर सालभर में 9 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। लेकिन, अधिकारी हैं कि लोगों की समस्याएं फोन पर सुनना ही नहीं चाहते।
इसकी शिकायत समय-समय पर सांसद-विधायक मुख्यमंत्री से करते रहे हैं। तो क्या वाकई में अफसर सरकारी नंबर नहीं उठाते? इसकी पड़ताल करने के लिए दैनिक भास्कर ने 75 जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस कप्तानों को फोन किया। एक बार नहीं बल्कि तीन बार किया गया।
सिर्फ तीन DM ने खुद फोन उठाया। SSP की स्थिति तो और खराब, किसी ने फोन ही नहीं उठाया। पूरी रिपोर्ट: https://t.co/N03UGyrxGV
🚨 प्रोफेसर रतन लाल ने जो अमीश देवगन को जवाब दिया है, ये जरूर वायरल होगा 😂
•अमीश: क्या आपको लगता है कि देश का युवा “दिमागी नक्सलियों” के साथ खड़ा होगा?
•रतन लाल 🔥: पहले मेरी बात सुनिए.. आपने बहस नहीं, बल्कि एक मूल्य-निर्णय दे दिया... प्रधानमंत्री ने किसी का नाम नहीं लिया
क्या वह चीन या पाकिस्तान की बात कर रहे थे? अगर चीन की बात है, तो सीधे उसका नाम लीजिए..चीन अरुणाचल में घुसपैठ कर रहा है..क्या आप उस पर सवाल उठाने का साहस रखते हैं?
•अमीश: दिमागी नक्सलवाद देश के खिलाफ है..युवाओं को इससे दूर रहना चाहिए
•रतन लाल 🎯: जैसे ही सवाल उठते हैं, “पटर-पटर” शुरू हो जाता है...मणिपुर, NEET पेपर लीक, सड़कों पर बच्चे, बेरोजगारी, 2 करोड़ नौकरियां, ₹15 लाख, अच्छे दिन, स्मार्ट सिटी:-इन सवालों के जवाब भी तो देने होंगे
•अमीश: इतिहास पर भी चर्चा होनी चाहिए
•रतन लाल ⚡️: इतिहास जरूर पढ़ाइए, लेकिन पहले आज के सवालों का जवाब दीजिए, सवाल पूछना राष्ट्रविरोधी नहीं है.. जवाबदेही ही लोकतंत्र है
कहते हैं न कि डूबते को तिनके का सहारा काफ़ी है।
अमित शाह भी अपनी डूबी इज़्ज़त बचाने के लिए वंदे मातरम् का सहारा ले रहे हैं।
इसीलिए जो अमित शाह पूरे मानसून सत्र के दौरान संसद में ‘चूँ’ तक नहीं बोले, आज बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं।
कल तक सरदार पटेल से अपनी तुलना कर रहे थे, आज सरदार पटेल की निंदा करने चले हैं।
ये वंदे मातरम् का बचाव नहीं, अपने सिकुड़ते राजनीतिक करियर का बचाव कर रहे हैं।
स्मृति ईरानी ने कहा था कि
कमल का बटन दबाओ,
चीनी 13 रूपये किलो मिलेगी,
जबकि आज कमल का बटन दबाने वालों को चीनी
60 से 75 रूपये प्रति किलो मिल रही है,
नेताओं को अपने कथनी करनी पर कोई शर्म नहीं आती है,