एकेन शुष्कवृक्षेण, दह्यमाने��� वह्निना। दह्यते तद्वनं सर्वं, कुपुत्रेण कुलं यथा॥
जैसे एक ही सूखे वृक्ष में आग लगने पर सारा वन जल जाता है इसी प्रकार एक ही कुपुत्र सारे कुल को बदनाम कर देता है।
सर्वशास्त्रमयी गीता सर्वदेवमयो हरि:।
सर्वतीर्थमयी गङ्गा सर्वदेवमयो मनु:।।
गीता सभी शास्त्रों का सार है, भगवान विष्णु (हरि) सभी देवताओं के स्वरूप हैं, गंगा नदी सभी तीर्थों को समाहित करती है, और मनु का धर्मशास्त्र सभी देवताओं के समान है।
गीता जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं
कार्तिकस्य सिते पक्षे अन्नकूटं समाचरेत्।
गोवर्धनोत्सवं चैव श्रीविष्णु: प्रीयतामिति।।
कार्तिक मास के शक्ल पक्ष की प्रतिपदा को अन्नकूट महोत्सव मनाया जाता है, इस दिन गोवर्धन की पूजा कर अन्नकूट का उत्सव मनाना चाहिये, इससे भगवान् विष्णु की प्रसन्नता प्राप्त होती है।
प्रिय मित्रो !
धनतेरस आप सबके जीवन मे धन समृद्धि , नरक चर्तुदशी निरोगता , दीपावली जीवन को जगमगाने वाली खुशियाँ , गोवर्द्धन पूजा (अन्न कूट ) अन्न समृद्धि ,और यम द्वितीया भाईयो मे प्रेम लेकर आये ।
जय श्रीकृष्ण !
जय श्री राधे !
दीपावली की शुभकामनाएँ
अनंत संसार महासमुद्रे,मग्नं समभ्युद्धर वासुदेव।
अनंतरूपे विनियोजयस्व,ह्यनंतसूत्राय नमो नमस्ते।।
‘हे वासुदेव,इस अनंत संसार रूपी महासमुद्र मे��� डूबे हुए लोगों की रक्षा करो तथा उन्हें अनंत रूप के ध्यान में संलग्न करो,अनंत रूप प्रभु तुम्हें नमस्कार है।
अनन्तचतुर्दशी की शुभकामनाएँ
एवं परस्परापेक्षा शक्ति शक्तिमतो स्थिता।
न शिवेन बिना शक्तिर्न शक्त्याबिन शिवः।।
शक्ति और शक्तिमान को सदा एक दूसरे की अपेक्षा रहती है,न तो शिव (शक्तिमान) के बिना शक्ति रह सकती है, और न ही शक्ति के बिना शिव रह सकते हैं,इकार (शक्ति) हीन शिव को शव कहा जाता है।
एकेनापि सुवृक्षेण पुष्पिते��� सुगन्धिना।
वासितं वै वनं सर्वं सुपुत्रेण कुलं यथा।।
फूलों से युक्त तथा सुन्दर गन्ध से युक्त एक भी सुन्दर वृक्ष के द्वारा सारा वन उसी प्रकार सुगन्धित हो जाता है, जैसे एक ही सुपुत्र के द्वारा वंश प्रतिष्ठित हो जाता है।
फाल्गुनेकृष्णपक्षस्ययातिथि:स्याच्चतुर्दशी।
तस्यांयातामसीरात्रि:सोच्चतेशिवरात्रिका।।
फाल्गुनमास कृष्णपक्ष की चतुर्दशीतिथि शिवरात्रि कहलातीहै,ज्योतिषशास्त्रानुसार फाल्गुनकृष्ण चतुर्दशीतिथि ��ें चन्द्रमा सूर्य के समीप होताहै वही समय जीवनरूपी चन्द्रमाका शिवरूपी सूर्य के साथ योगहोताहै।
सर्वशास्त्रमयी गीता सर्वदेवमयो हरि:।
सर्वतीर्थमयी गङ्गा सर्वदेवमयो मनु:।।
जैसे मनुजी सर्वदेवमय हैं, गङ्गा सकल तीर्थमयी है और श्रीहरि सर्वदेवमय हैं, इसी प्रकार गीता सर्वशास्त्रमयी है।
��्रीगीता जयन्ती पर अनन्त शुभकामनाएँ
संपत्सरस्वती सत्यं सन्तानं सदनुग्रहः।
सत्ता सुकृत सम्भारः सकाराः सप्त दुर्लभाः॥
संपत्ति, सरस्वती, सत्य, संतान, सज्जन कृपा, सत्ता, और सत्कृत्य की सामग्री ये सात 'स' कार दुर्लभ हैं।
कार्तिकस्य सिते पक्षे अन्नकूटं ��माचरेत्।
गोवर्धनोत्सवं चैव श्रीविष्णु: प्रीयतामिति।।
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को अन्नकूट महोत्सव मनाया जाता है, इस दिन गोवर्धन की पूजा कर अन्नकूट का उत्सव मनाना चाहिये, इससे भगवान् विष्णुकी प्रसन्नता प्राप्त होती है।