शब्दों को अधरों पर रखकर, मन का भेद न खोलो, मैं आँखों से सुन सकता हूँ, तुम आँखों से बोलो।
जब-जब हृदय मथा है मैंने, तब-तब अधर लगे कुछ कहने, और जब-जब अधर सिए हैं मैंने, तब-तब नयन लगे हैं बहने को।
मत बहने दो इन नैनों को, आँसू हैं श्रृंगार हृदय का, हृदय में रहने दो। 🍁