भारत का मीडिया खान सर के पीछे हाथ धोकर लगा है.
खान सर को फरार बता रहा है, खान सर को फैजल खान लिख रहा हैं जबकि खान सर अपनी कोचिंग में क्लास ले रहे हैं.
सुनिए khan sir ने क्या कहा
यह होता है आम आदमी का जनप्रतिनिधि🔥
आज राघव चड्ढा जी ने राज्यसभा में वह मुद्दे उठाए जो लोगों की सबसे बड़ी चिंता हैं मगर उनपर कोई बात नहीं करता,
Health Insurance Companies और Private Hospitals की मनमानी पर उन्होंने बेहद ही ज़रूरी चर्चा की और सदन को अवगत करवाया।
हाईकोर्ट ने हमेशा की तरह सरकार के पक्ष मे दिया फैसला !!
"वो स्कूल मर्ज कर रहे है
छात्र और छात्र संगठन आपस मे *संगठन* मर्ज कर ले।
निश्चित रूप से हर मर्ज की दवा मिल जाएगी।"
हर शिक्षक को अपनी पसंद का स्कूल चाहिए। फर्ज कीजिए एक गणित का शिक्षक मुजफ्फरपुर से वैशाली ट्रांसफर चाहता है पर जिस स्कूल को छोड़ कर जाना चाहता है वहाँ कोई शिक्षक नहीं आना चाहता है। इसका आप के पास समाधान है?
म्युचुअल ट्रांसफर में क्या सब परेशानी है?
बिहार में टीचर ट्रांसफर मामला:
शिक्षकों को जिस तरह की मुश्किलें आ रही हैं उससे यह साफ़ है कि म्युचुअल ट्रांसफर वाला प्रयोग कामयाब नहीं है।हर शिक्षक को उसे उसकी पसंद का स्कूल चाहिये। सवाल है
ऐसे में समाधान क्या है? आप शिक्षक ही बताइए।
अगर यूपी डोमिसाइल लागू कर दे, एमपी डोमिसाइल लागू कर दे.. सारे राज्य संपूर्ण डोमिसाइल लागू कर दे… तो बिहारियों का क्या होगा?
जरा सोचिए… भावना में बह कर नहीं, सोच-समझकर जवाब दीजिए।
“इस बात पर हम यकीन कर भी ले”
मगर एक बात समझ नही आ रही है जब प्रारूप तैयार हो रहा है तो बिना प्रारूप तैयार हुए ये 50K का आंकड़ा कैसे मिला?
कैसे मान ले प्रारूप 1 माह में तैयार हो जाएगा?लिखित आदेश भी नही है।
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