ब्रेकिंग 🚨:
विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तैयारी वाकई ज़बरदस्त है 🤯
उन्होंने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में विरोध-प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज के वीडियो क्लिप दिखाए हैं।
अभी 9.7 करोड़ (97 मिलियन) लोग उन्हें देखे हैं 🔥🔥
जंतर मंतर पर आधी रात को जब मैं लोगों से बात कर रहा था तो दिल्ली पुलिस वाले मेरी रिकॉर्डिंग करवा रहे थे .
पता नहीं इस तरह की रिकॉर्डिंग का क्या मकसद होता है ?
जैसे ही मैंने महिला पुलिस को अपने कैमरे में दिखाया, वो पीछे हट गई .
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, अगर उमर खालिद ने वास्तव में आतंकवाद को भड़काया है, तो सरकार इसे अदालत में साबित क्यों नहीं करती? बिना मुकदमे के 6 साल तक जेल में रखना न्याय का मजाक है।
मदरसे के छात्र ने बनाई सोलर से चलने वाली साइकिल, सोलापुर का नाम किया रोशन। कहते हैं कि बड़े सपनों की कोई उम्र नहीं होती, और इसे एक बार फिर सच साबित कर दिखाया है सोलापुर के एक होनहार छात्र ने। सौर ऊर्जा से चलने वाली साइकिल बनाकर इस छात्र ने न केवल अपनी प्रतिभा का परिचय दिया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि भारत का भविष्य नवाचार, विज्ञान और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक के हाथों में सुरक्षित है। ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों को हमारा सलाम! यही युवा आने वाले भारत की नई पहचान हैं। आइए, इस उपलब्धि को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ और इस होनहार छात्र का उत्साह बढ़ाएँ। ❤️ अगर आपको भी इस छात्र पर गर्व है, तो इस पोस्ट को Like, Share और Comment ज़रूर करें।
महाराष्ट्र की डॉ. नमिरा सिद्दीकी ने NEET MDS में देश में पहला स्थान हासिल किया है। डॉ. नमिरा सिद्दीकी ने कहा, मैंने 802 अंक हासिल किए और NEET MDS में ऑल इंडिया रैंक 1 प्राप्त की। सबसे पहले, मैं अपनी इस उपलब्धि और इन अंकों को अपने माता-पिता को समर्पित करना चाहूंगी। यह सफलता कई लोगों के योगदान का परिणाम है। मुझे अपने कॉलेज से ज़बरदस्त सहयोग मिला, और मेरे माता-पिता हमेशा मेरे साथ खड़े रहे और हर चीज़ में मेरा साथ दिया। मुझे उस कोचिंग संस्थान से भी बहुत मदद मिली जहाँ मैंने परीक्षा की तैयारी की थी, जिसने इस रैंक को हासिल करने में मेरी मदद करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
❗विश्वविद्यालय से हटेगा महान क्रांतिकारी बरकतुल्ला भोपाली का नाम
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अब नाम होगा "मां वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय"।
▪️आइए जान लीजिए
कौन थे मौलाना बरकतुल्ला भोपाली..
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अंग्रेजी राज के खिलाफ़ बिगुल फूंकने वाली ग़दर पार्टी के संस्थापकों में शामिल थे।
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सन 1915 में काबुल में बनी पहली निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री थे।
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आज़ादी की लड़ाई में समर्थन हासिल करने 1919 में रूस में लेनिन से मिले।
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जिनके वैचारिक पुरखे अंग्रेजों की चाकरी करते रहे आज वे लोग क्रांतिकारी मौलाना बरकतुल्ला भोपाली का नाम मिटा रहे हैं।
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आज़ादी की लड़ाई में जिनका कोई योगदान नहीं वे क्या जानें किसी क्रांतिकारी की कद्र..!
@puru_ag@kidwai_hafeez@irfhabib@rpuni
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