It's been three days since I placed a request for new service. I paid..Booked Slot for same day.. Still awaiting BUT No response..Not even a single call from @airtelindia And What a complete Absence @Airtel_Presence ! That's how u lose d loyalty of an old customer @airtelnews
If they didn’t put medals on our shoulders for 38 years, what will they put now?
Former DIG, Border Security Force, Narendra Nath Dhar Dubey, who played a crucial role in tracking down and neutralizing the mastermind behind the 2001 Indian Parliament Attack, Ghazi Baba, speaks candidly on one of the most debated issues today , the CAPF General Administration Bill 2026.
#CAPFvsIPS #CAPFBill2026 #SupremeCourt #TheEdge
CAPF बिल एक बिल नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है।
आज लोकसभा के सदन में मैंने स्पष्ट कहा कि Supreme Court of India ने साफ निर्देश दिया था कि CAPF अधिकारियों के साथ हो रहे अन्याय को समाप्त किया जाए और उन्हें Indian Administrative Service और Indian Police Service के समकक्ष व्यवस्थित सेवा का दर्जा दिया जाए। लेकिन सरकार उस फैसले को लागू करने के बजाय कानून बदलकर उसे निष्प्रभावी करने की कोशिश कर रही है।
जब फैसला पक्ष में होता है तो स्वीकार, और जब खिलाफ होता है तो कानून बदल दिया जाता है — यह कैसी परंपरा स्थापित की जा रही है?
CAPF के अधिकारी UPSC के माध्यम से चयनित ग्रुप ‘A’ अधिकारी हैं, उनकी योग्यता और क्षमता किसी भी स्तर पर IPS से कम नहीं है। देश की सीमाओं से लेकर आतंकवाद, नक्सलवाद, आपदा प्रबंधन और चुनावों तक—हर जगह CAPF ने अपनी निष्पक्षता और क्षमता साबित की है। यही कारण है कि चुनावों में भी इन बलों की तैनाती होती है, क्योंकि देश को उन पर भरोसा है।
लेकिन यह बिल उस भरोसे को तोड़ने वाला है।
जब नेतृत्व ऐसे अधिकारियों के हाथ में होगा जो सीधे सरकार के नियंत्रण में हों, तो क्या CAPF की निष्पक्षता बरकरार रह पाएगी? क्या यह चुनावों को प्रभावित करने का एक नया औजार नहीं बनेगा?
सरकार से सीधा सवाल है—क्या आपको अपने ही CAPF अधिकारियों पर भरोसा नहीं है?
सच्चाई साफ है—यह बिल CAPF को मजबूत करने के लिए नहीं, बल्कि उस पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए लाया गया है।
पुलवामा से लेकर दंतेवाड़ा, मणिपुर से लेकर चीन सीमा तक—हर चुनौती में CAPF के जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। लेकिन जब उन्हें सम्मान और अधिकार देने की बात आई, तो सरकार उन्हें दंडित करने वाला कानून लेकर आ गई।
यह अन्याय है, और इसका पुरजोर विरोध होगा।
मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं—आने वाले समय में जब INDIA गठबंधन की सरकार बनेगी, तो इस कानून को पहले ही सत्र में रद्द किया जाएगा।
लोकतंत्र, संविधान और हमारे वीर जवानों के सम्मान के लिए यह लड़ाई जारी रहेगी…
#CAPF #LokSabha #SudhakarSingh #ips
हमारी माँग है कि Central Armed Police Forces (General Administration) Bill, 2026 को detailed scrutiny के लिए Select Committee को भेज देना चाहिए।
हमारे जाँबाज़ CAPF Personnel के हक़ में हम ये बात कह रहें हैं।
मैं इन कारणों पर इस विधेयक का विरोध करता हूँ:
1. Deputation का Institutionalisation
वरिष्ठ पदों जैसे IG, ADG तथा विशेष रूप से SDG और DG स्तर पर निश्चित प्रतिनियुक्ति कोटा निर्धारित करके, यह विधेयक deputation/ प्रतिनियुक्ति को स्थायी बना देता है। इससे CAPF कैडर अधिकारियों के लिए नेतृत्व के अवसर सीमित होते हैं और एक असमान service structure को मजबूती मिलती है।
2. करियर प्रगति और मनोबल पर उलटा प्रभाव
यह कठोर deputation framework, प्रमोशन के अवसरों को सीमित करता है और CAPF अधिकारियों के करियर में stagnation को बढ़ावा देता है, जिससे उन armed forces के मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है जो देश में आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
3. Consultation और representation का अभाव
यह विधेयक CAPF के लोगों से पर्याप्त consultation के बिना तैयार किया गया है और न ही उन्हें policy-making या cadre management में सार्थक भूमिका प्रदान करता है, जबकि इसके प्रावधानों से वे सीधे प्रभावित होते हैं।
4.Spirit of Judicial Directions की भावना का उल्लंघन
यह विधेयक Sanjay Prakash vs Union of India में Supreme Court of India द्वारा दिए गए निर्देशों के विपरीत है, जिसमें CAPF अधिकारियों को Organised Group A Services के रूप में मान्यता दी गई थी और deputation को कम करने का निर्देश दिया गया था। इन निर्देशों को लागू करने के बजाय, यह विधेयक Supreme Court के निर्देशों को प्रभावी रूप से कमजोर करता है।
What A Clarity & Vision on the Subject. She commands utmost respect for being so Flamboyant,🚩 Hatsoff @MahuaMoitra@CAPFbill26
https://t.co/HC37IrQhgt
असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक जी ने नक्सली मुठभेड़ के दौरान IED ब्लास्ट में अपना एक पैर खो दिया - देश की रक्षा में सब कुछ दांव पर लगा दिया।
और इस बलिदान के बदले मिला क्या?
15 साल से अधिक की निष्ठापूर्ण सेवा के बावजूद - प्रमोशन नहीं, अपनी ही फोर्स को लीड करने का अधिकार नहीं। क्योंकि सभी शीर्ष पद IPS अफसरों के लिए आरक्षित हैं।
यह सिर्फ एक अफसर की पीड़ा नहीं - यह लाखों CAPF जवानों के साथ हो रहा संस्थागत अन्याय है।
ये जवान सीमाओं पर तैनात रहते हैं, आतंक और नक्सलवाद से लोहा लेते हैं, लोकतंत्र के उत्सव चुनावों को सुरक्षित बनाते हैं। लेकिन जब इनके अधिकार और सम्मान की बात आती है, तो व्यवस्था मुँह फेर लेती है।
खुद CAPF के जवान इस भेदभाव के विरुद्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट तक ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। फिर भी, वर्तमान सरकार इसी अन्याय को कानूनी रूप से स्थायी बनाने पर आमादा है।
यह विधेयक केवल एक करियर रोकने का प्रयास नहीं - यह उन लोगों का मनोबल तोड़ने की कोशिश है जो देश की पहली रक्षा पंक्ति हैं। और जब उनका मनोबल टूटता है, तो राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव हिलती है।
हम CAPF के जवानों का सम्मान सिर्फ शब्दों में नहीं, नीतियों में करते हैं। कांग्रेस का साफ वादा है - हमारी सरकार आते ही यह भेदभावपूर्ण कानून समाप्त होगा। क्योंकि जो देश के लिए लड़ता है, उसे नेतृत्व का अधिकार मिलना ही चाहिए।
What A Clarity & Vision on the Subject. She commands utmost respect for being so Flamboyant,🚩 Hatsoff @MahuaMoitra@CAPFbill26
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My plea in Rajya Sabha today to Home Minister to re consider the bill the CAPF. To protect the interest of a million strong para military force & 13K grade A duty officers. @crpfindia @MINISTRYOFHOME2 @AmitShahOffice
@SwetaKumari1986@SudhanshuTrived@BJP4India बिल पर बहस के दौरान सुधांशु त्रिवेदी जी ने आल्हा ऊदल करके आज फिर वही किया हैं जो भाजपा सरकार आज तक करती आई है
ये शहीदों का कफ़न बेच कर वोट लेना है बस
सुप्रीम कोर्ट के फैसले और 15 साल वाले बाद भी प्रमोशन नहीं के मामले को बड़ी चतुराई से मोदी चालीसा में छिपा दिया गया है वाह 😀
VIDEO | As Amit Shah will present the bill on the Central Armed Police Forces (General Administration) Bill 2026 in Rajya Sabha, AAP leader Sanjay Singh (@SanjayAzadSln) says, "We believe that there are a lot of injustices happening with our paramilitary forces by the government. They ask for votes in the name of our jawans, but when it comes to giving them their rights, respect and restoring their pension, they behave differently."
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/bIyFWTfmBd)
After winning the review, we expected progress. Instead, we got legislation aimed at undermining paramilitary welfare. The Supreme Court's order is a victory for truth and justice. 🛡️
The Govt must stop moving against those who bleed for the country. 👮♂️💪
#ParamilitaryForces