भाजपा की फंडिंग और पीएम केयर्स (PM CARES) के ऑडिट पर CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने सरकार की परेशानी बढ़ा दी, अब युवा पीढ़ी पीएम केयर फंड का हिसाब मांग रही है।
फंडिंग के मुख्य स्रोतः भाजपा को सबसे ज्यादा चंदा कॉर्पोरेट घरानों, व्यक्तिगत दानदाताओं और 'प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट' से मिलता है। (सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2024 में इलेक्टोरल बॉन्ड बैन होने के बाद अब सीधे और ट्रस्ट के जरिए चंदा लिया जा रहा है)।
विपक्ष और CJP का कहना है कि सरकार को 'पीएम केयर्स' और 'पीएमएनआरएफ' (PMNRF) फंड का पूरा हिसाब और संबंधित दस्तावेज देश के सामने रखने चाहिए।
पीएम केयर्स और पीएमएनआरएफ दोनों फंड में कोई सरकारी पैसा नहीं होता; इनमें केवल स्वैच्छिक दान आता है। इनका ऑडिट सरकारी संस्था कैग (CAG) नहीं, बल्कि स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) करते हैं।
ये दोनों फंड 'पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट' होने के कारण फिलहाल सूचना के अधिकार (RTI) के दायरे से बाहर हैं, जिसे लेकर पारदर्शिता पर लगातार सवाल उठते हैं। l
हर भारतीय को दिपके की बात को गंभीरता से लेना चाहिए अभिजीत ने बिल्कुल ठीक कहा कि भारत को नेता की नहीं,बल्कि जनांदोलन की आवश्यकता है एक ऐसा आंदोलन जो नेताओं को यह एहसास कराए कि देश की मालिक जनता है,कोई नेता नहीं,उम्मीद की एक किरण नजर आती है अनपढ़,जाहिल नेतृत्व से देश को मुक्त कराना
स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने कुल 39 पदक जीते जिसमें 13 स्वर्ण पदक भी शामिल है।
राज्यवार भारत के एथलीट का प्रदर्शन👇
हरियाणा एथलीट— 11 मेडल (13 में से 7 गोल्ड)
गुजरात एथलीट— 0 मेडल
केंद्रीय खेल बजट हरियाणा— 60 करोड़
केंद्रीय खेल बजट गुजरात— 450 करोड़
इसके बावजूद सबसे ज्यादा बजट लेकर एक भी पदक न जीतने वाले प्रदेश गुजरात को "कॉमनवेल्थ गेम्स 2030" की मेजबानी दी गई है और हरियाणा को नजरअंदाज किया गया।
गुजरात के एथलीट किसी भी टूर्नामेंट में एक भी पदक जीत नहीं जीत पाते— तो इनको दिए गए बजट का आखिर होता क्या है..??
कॉकरोच जनता पार्टी के स्थापक अभिजीत दीपके के पिताजी को नोटिस दिया गया है
उनसे सवाल पूछे गए है कि महज 65000 कि नौकरी में उन्होंने बेटे अभिजीत को विदेश पढ़ने कैसे भेजा था
इसके जवाब में अभिजीत ने वीडियो रिलीज़ कर के बताया है कि वो अपने एजुकेशन लोन और स्कॉलरशिप के कागजात दिखाने को तैयार है
लेकिन उन्होंने सवाल किया है कि क्या मोदीजी अपनी डिग्री दिखाएंगे?
वैसे सवाल तो यह भी है कि भीख मांग कर खाने वाले साहेब जी खुद विदेश घूमने कैसे गए थे?
उनकी फंडिंग किसने की थी?
जिस जमाने में अमीर लोगों के लिए भी विदेश घूमना एक सपना होता था
तब साहेब जी फूल सूट बूट में विदेश कैसे घूम रहे थे?
16 साल की उम्र मे कँगना रनौत ने पहला बॉयफ्रेंड बनाया
17 साल की उम्र मे घर से भागी और ड्रग्स लेना शुरू किया
18 साल की उम्र मे आदित्य पंचोली के साथ अफेयर
19 साल की उम्र मे पहली फ़िल्म गैंगस्टर रिलीज हुई
22 साल की उम्र मे अध्ययन सुमन के साथ अफेयर हुआ
26 साल की उम्र मे ऋतिक रोशन के साथ अफेयर हुआ
38 साल की उम्र मे कँगना सांसद बनी,
अब ये GenZ महिलाओ पर नशेड़ी, बदसूरत और चरित्रहीन होने का आरोप लगा रही है
कंगना जैसी महिलाओ को ये नहीं भूलना चाहिए कि यही GenZ अगर अपनी पर आ गयी तो औकात दिखाने मे टाइम नहीं लगाएगी
जिसकी छलनी में हजारों छेद हो उसे दूसरों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए
युवाओं का स्टार कहे जाने वाले स्वार्थी विराट कोहली बहुत बड़ा व्यापारी है।
जब One8 ब्रांड का जूता बेचना था तब दिल्ली में आकर प्रमोशन किया और इसकी कीमत 9999 रुपए रखी युवाओ ने इसे खूब खरीदा।
लेकिन जब युवाओ के लिए आवाज उठाने की बारी आई तब स्वार्थी विराट ने एक शब्द नहीं...Open news
एक ने कहा, जिन्होंने 12 साल तक करोड़ों अरबों खर्च करके राहुल गांधी को पप्पू साबित करने की कोशिश की, वे मात्र 12 दिन में खुद ही पप्पू साबित हो गए। बिना किसी के प्रयास किए।
आप कुछ लोगों को थोड़े समय के लिए मूर्ख बना सकते हैं। सब लोगों को हमेशा के लिए मूर्ख नहीं बना सकते।
इस आंदोलन ने बहुत कुछ साबित किया।
हम तुम्हें याद रखेंगे, कॉमरेड...
प्रिय नेहा, @neha_aisa
मैं तुम्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता, बस उतना ही जानता हूँ जितना इस आंदोलन के माध्यम से जाना जा सकता था; और शायद अब सब लोग तुम्हें उतना ही जानते हैं... मेरी उम्र तुमसे कम है, पर इतनी भी नहीं कि हम दोनों Gen-Z की श्रेणी में न आ सकें।
मैं चाहता भी यही हूँ कि मेरी बेटी, पोती या पत्नी बिल्कुल तुम्हारे जैसी हों, जो गरज कर कह सकें कि, "हम याद रखेंगे।" नेहा, हम भी तुम्हें याद रखेंगे कॉमरेड।
जब भी कहीं अन्याय के खिलाफ़ लड़ती हुई कोई अड़ियल लड़की दिख जाएगी, हम तुम्हें याद रखेंगे। जब हज़ारों की भीड़ में कोई लड़की अपने हक़ के लिए डट जाएगी, तो हम तुम्हें याद रखेंगे। और बहन, हम तुम्हें तब भी याद रखेंगे जब मेरी बेटी कभी मुझसे कहेगी, "पापा, किसी शेरनी की कहानी सुनाओ ना!" तब मैं तुम्हें याद करके अपनी बेटी को सुनाऊँगा कि एक शेरनी थी, जो मगरमच्छ के जबड़े में हाथ डालकर कहती थी–"हम सब याद रखेंगे..."
तो नेहा, कहानी बस इतनी सी है कि हमने तुम्हें याद रख लिया है। हमने याद रख लिया है कि कैसे एक बच्ची छोटे से खिलौने के लिए खाना-पीना छोड़कर अपने पापा से वो खिलौना खरीदवा लेती है, और कैसे एक अड़ियल लड़की भूखी रहकर शिक्षा मंत्री से इस्तीफ़ा ले लेती है।
तुम्हें देखकर लगता है कि अगर स्त्रियों से उनके हक़ न छीने गए होते, तो यह दुनिया कितनी खूबसूरत होती; शायद भारत और भी विकसित होता। पता नहीं। तुम्हें देखकर ऐसा लगा, तो लिख दिया। सोचने और लिखने के बीच बस एक धागे भर का फ़र्क होता है... लेकिन मैं जो सोचता हूँ, वही लिखता हूँ।
और अभी मैं सोच रहा हूँ कि तुम आंदोलन के लिए ही बनी हो। तुम्हारी आवाज़ भाषण के लिए ही बनी है–किसी वाइस चांसलर को झुका देने के लिए, किसी डफली पर अपना हाथ फेरने के लिए, या किसी मनमाने मंत्री के कलेजे पर चढ़कर इस्तीफ़ा ले लेने के लिए...
कॉमरेड, तुम्हें लाल सलाम!
ख़त लिखने वाला लड़का।
चाय इश्क़ और राजनीति।
जंतरमंतर प्रोटेस्ट खत्म होने के बाद युवा #GenZ ने सड़क पर फैलाया कचरा साफ किया और फिर घर गए।
अब गोदीमीडिया की बारी है जिन्होंने इनको आतंकी, विदेशी फंडिंग गैंग, देशविरोधी कहा अपना कचरा समेटकर इनसे माफी मांगे।
अबदेश के युवा नागरिक जागरूक होरहा है
अब मोदीजी का एजेंडा बंद होगा क्योंकि मोदी सभी को अनपढ़ बनाकर रखना चाहते हैं इसीलिए देशभर मे बहुतसे स्कूलों को बंदकर दिया है
और 12साल में एकभी नया स्कूल और कॉलेज भी नहीं बनाया है,शिक्षामाफियाओं से साठ-गांठ कर के पेपरलीक करवाना और पैसा उगाई करत