गुलशन नहीं गर हासिल
सेहरा में बसना पड़ता है
तन से कोमल होकर भी
मन से दृढ़ होना पड़ता है
सुंदर महकते #गुलाबों को
शूलों संग निभाना पड़ता है
थोड़ी खुशियाँ थोड़े गमों संग
जीवन बिताना पड़ता है।
मं शर��मा (रज़ा)
#बज़्म
#सरस
@hindivanii
@KavyaKutir
@ShriNarmada
@Sahityakram
मैंने तो पहल भी की थी
वो अंजाम लिखना भूल गया
हाथ भी अपना बढ़ाया मैंने
वो लकीरें बनाना भूल गया
#नीयत पर तेरी संशय न था
क्या हुआ गर कुछ भूल गया।
मं शर्मा (रज़ा)
#बज़्म#सरस@hindivanii@KavyaKutir@ShriNarmada
धूप छाँव सा गुज़रा जीवन
हद से ज्यादा खला नहीं
ना चिलचिलाती धूप दहकी
सूर्यास्त ने भी डराया नहीं
जीवन ने सिखाया चलते जाना
विराम कभी कोई लिया नहीं
पीछे छोड़े #निशान कदमों के
मुड़कर फिर कभी देखा नहीं।
मं शर्मा(रज़ा)
#बज़्म#सरस@hindivanii@KavyaKutir@ShriNarmada@KavyaKriti_
भोर के सितांचल पर,
झीने बादल छा गए
अश्रु जल का क्षार पी कर,
स्वप्न कुछ ओंधे पड़े
तिमीर विष को छांटकर ना,
स्नेह का रस उभरे
ताप उर संताप जर्जर,
अरविन्द तट पर विषमता के
गोल से खंजन पड़े,
भर कटोरी प्रीत की
पिबत गुज़री रात भर,
नैंन सुख कटे नींदागोश में
पाजेब लय सी भोर दीसे,
दीप सा श्रृंगार मेरा
सुधि तुम्हारी हर चला,
एक व्योम सा मुझे छू के गुज़रा
निशीथ पुरी मुझे लिपटे
सुबह स्वप्न बाग सूना पड़ा
थे सुगंधित रात के कण
दिन को सब बेसुध पड़े।
#बज़्म
धरती पर बसेरा मेरा
गगन खेल का मैदान है
मैं पक्षी छोटे परों वाला
मेरी बड़ी ऊँची #उड़ान है
मत तौल मेरे हौसलों को
मेरे नन्हें से वजूद से
छोटी है हस्ती मेरी पर
बहुत ऊपर तक पहचान है ।
मं शर्मा (रज़ा)
#बज़्म#सरस@hindivanii@KavyaKutir@ShriNarmada@KavyaKriti_