दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) संभाग की कार्ययोजना बैठक सम्पन्न
श्री क्षत्रिय युवक संघ के दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) संभाग की वार्षिक कार्ययोजना बैठक 17 जुलाई को फरीदाबाद के सेक्टर - 8 में स्थित राजकुल संस्थान महाराणा प्रताप भवन में संपन्न हुई। 1/2
सीकरी (फरीदाबाद) में चल रहा है चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर
हरियाणा के फरीदाबाद जिले के सीकरी ग्राम में स्थित न्यू पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में श्री क्षत्रिय युवक संघ का चार दिवसीय प्राथमिक प्रशिक्षण शिविर 12 से 15 जून तक आयोजित हो रहा है। 1/2
तुत है समाज में क्षत्रिय संस्कारों को ढालने एवं शाश्वत मूल्यों को जन-जीवन में पुनः महत्त्व प्रदान करने के उद्देश्य से विगत 65 वर्षों से प्रकाशित हो रही प्रतिष्ठित पत्रिका संघशक्ति का नवीनतम अंक..
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#ShriKYS
"अवसर ! हाँ, यही प्रगति की मंजिल का मुख्य द्वार है। अवसर की ताक ही साधक का निशाना है। एक भी अवसर को चूकने का अर्थ होगा - प्रगति को धक्का देकर स्थगित करना। संयोग तो सभी लोगों के सामने आते हैं, पर भाग्यशाली ही उनका लाभ उठाते हैं। 1/2
संघ की साधना में शरीर हमारा शस्त्र - संघप्रमुख श्री
(उच्च प्रशिक्षण शिविर का दूसरा दिन)
भारतीय संस्कृति में कहा गया है कि - पहला सुख निरोगी काया। हमारी साधना में भी शरीर का स्वस्थ होना बहुत महत्वपूर्ण है। श्री क्षत्रिय युवक संघ का कार्य युद्ध के समान ही है 1/3
संघ साधना में निहित शौच, तप, संतोष, स्वाध्याय और ईश्वर प्रणिधान
(आलोक आश्रम, बाड़मेर में आयोजित उच्च प्रशिक्षण शिविर का पांचवां दिन)
पतंजलि के अष्टांग योग का दूसरा अंग नियम है। इसमें जो पांच नियम - शौच, तप, संतोष, स्वाध्याय और ईश्वर प्रणिधान - बताए गए हैं, 1/4
अनुशासन ही सच्चे संगठन का आधार
(उच्च प्रशिक्षण शिविर का छठा दिन)
अनुशासन किसी भी संस्था का प्राण होता है। कोई भी संगठन अनुशासन के बिना नहीं चल सकता। इसीलिए श्री क्षत्रिय युवक संघ की कार्य प्रणाली में स्वयंसेवकों में अनुशासन का गुण विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। 1/3
संघप्रमुख श्री के चुनाव सम्पन्न, माननीय लक्ष्मण सिंह जी बेण्याकाबास अगले पांच वर्ष तक संघप्रमुख निर्वाचित
आलोक आश्रम, बाड़मेर में आज 18 मई को उच्च प्रशिक्षण शिविर के प्रारंभ से पूर्व प्रति पांच वर्ष पर आयोजित होने वाले संघप्रमुख के चुनाव सम्पन्न हुए, 1/2
"गीता ज्ञान के आधार पर जो समाज में जागरण लाना चाहते हैं, उन्हें विशिष्ट साधकों की नहीं, सामान्य साधकों की आवश्यकता है। समाज में विशिष्ट बहुत कम हुआ करते हैं। उनका चरित्र समाज के लिए आदर्श भले ही हो जाय, वह प्रेरणादायक भी बन सकता है, 1/2
"हम समझौते से जीवन को दाव पर लगाना पसंद नहीं करते ; हम चाहते हैं भ्रांति से कोई समझौता नहीं किया जाय, अस्पष्टता को सर्वदा निर्वासित किया जायेगा तभी हमें सही रूप से मालूम होगा कि हम कहां जाना चाहते हैं और कहां जा रहे हैं।" 1/3