300 में 23 प्रश्नों का डि���ीट होना बिल्कुल जस्टीफाइड नहीं है, इसी वजह से पॉलिसी के मुताबिक डिलीट हुए प्रश्नों के मार्क्स बचे ह��ए प्रश्नो में बराबर बांट दिए जाते हैं ताकि डिलीट हुए प्रश्नों का खामियाजा कैंडिडेट्स को न भुगतना पड़े। पेपर सेटर्स को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है और पेनालाइज भी किया गया है।....आर्मी में सफलता के लिए लीडर अपनी टीम को और फेल्योर के लिए खुद को जिम्मेवार मानता है। में भी इसी में विश्वास रखता हूं। पहले भी में ऐसा यहीं पर कह चुका हूं । प्रश्नों के डिलीट होने में बोर्ड के चेयरमैन की ही जिम्मेवारी होत��� है, कारणों का रोना बेफिजूल है, सिर्फ ये कहूंगा की इस सिस्टम को बेहतर करने का प्रयास किया जा सकता, और वो किया जा रहा है।
युवा बेरोजगार आप से निष्पक्ष व सत्यता आधारित परीक्षा चाहते हैं। मुझे उम्मीद है आने वाले समय में आप परीक्षा प्रणाली को मजबूत और बेहतर बनाने में हरसंभव प्रयास करेंगे।
आपका अपना शुभचिंतक
हाई कट ऑफ जाने के कारण में सोच रहा था, संभवतः
1. JRA पहला CET आधारित एग्जाम था जहां चुने हुए लगभग 67 हज़ार अभर्थियों ने हिस्सा लिया, चूंकि सब सिलेक्टेड lot था, तो सबने ही अच्छा परफॉर्म किया।
2. इसमें 23 प्रश्न डिलीट हुए हैं मगर मार्क्स डिलीट नहीं हुए, यानी उन प्रश्नों के मार्क्स सभी को मिले हैं, किसी को पूरे किसी को थोड़े कम
3. एग्जाम के बाद जब मैंने ट्विटर पर पोल करवाया था लगभग 10/% ने पेपर को easy या very easy बताया था, 20% ने मीडियम, बाकी ने डिफिकल्ट। यानी 10 से 30% कैंडीडेट्स को JRA पेपर मुश्किल नहीं लगा था उन्होंने ही अच्छा स्कोर किया होगा तो कट ऑफ ऊपर हो गई।
@BhajanlalBjp@madandilawar महोदय जी पूरे प्रदेश मे 96विद्यालयो ऐसे है जिसमे एक भी शिक्षक नही है 228विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे चल रहेहै संगठन का आग्रह है सीधी भर्ती व ड���पीसी से रिक्त पद भरवाए संज्ञान लेकर समाधान करवाए महोदय जी👏
राजस्थान संस्कृत शिक्षा विभागीय शिक्षक संघ👏