फिल्म #AakhiriSawal राष्ट्रीय चेतना को जागृत करती है, संघ के प्रति फैलाई गई भ्रांतियों को दूर करती है, मै अनुरोध करूंगा ज्यादा से ज्यादा दर्शक इस फिल्म को देखे, @duttsanjay जी और @iamnikhilnanda जी आपका आभार जो आपने इतनी गोपनीय जानकारी को फिल्म के माध्यम से उजागर किया।
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आज के 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी जी ने 2025 के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि 2025 भारत के लिए गर्व का वर्ष रहा है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, खेल, वैज्ञानिक नवाचार और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती प्रभावशाली उपस्थिति शामिल है।
उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख किया, जिसमें भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर कार्रवाई की, जो भारत की सुरक्षा के प्रति दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। इसके अलावा, उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम की उपलब्धियों, जैसे कि आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी और महिला क्रिकेट टीम की विश्व कप जीत, को भी उजागर किया।
प्रधानमंत्री मोदी जी ने शुबांशु शुक्ला की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में पहुंचने की उपलब्धि और भारत के वैज्ञानिक विकास को भी सराहा। उन्होंने युवाओं से 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग' में भाग लेने का आग्रह किया और स्वदेशी उत्पादों के प्रति बढ़ते आकर्षण को प्रोत्साहित किया।
#मन_की_बात
#MannKiBaat
24 दिसंबर (1704/1705 ई.) का दिन गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार के लिए अत्यंत कठिन और निर्णायक था। इस दिन की मुख्य घटनाएं निम्नलिखित हैं:
छोटे साहिबजादों की वज़ीर खान की कचहरी में पहली पेशी: 24 दिसंबर को माता गुजरी जी और दोनों छोटे साहिबजादे—बाबा जोरावर सिंह जी (9 वर्ष) और बाबा फतेह सिंह जी (6 वर्ष)—को पहली बार सरहिंद के नवाब वज़ीर खान की कचहरी में पेश किया गया।
धर्म परिवर्तन का दबाव: कचहरी में वज़ीर खान और उसके दरबारियों ने बच्चों को डराने और प्रलोभन देने की कोशिश की। उनसे कहा गया कि यदि वे इस्लाम स्वीकार कर लेते हैं, तो उन्हें छोड़ दिया जाएगा और भव्य जीवन दिया जाएगा।
साहिबजादों की निर्भीकता: इतने छोटे होने के बावजूद, साहिबजादों ने पूरी निडरता के साथ इस्लाम स्वीकार करने से मना कर दिया और अपने धर्म पर अडिग रहने का संकल्प दोहराया।
ठंडा बुर्ज में कैद: कचहरी से वापस लाने के बाद, उन्हें और माता गुजरी जी को सरहिंद के 'ठंडा बुर्ज' में रखा गया। दिसंबर की कड़ाके की ठंड में उनके पास ओढ़ने या बिछाने के लिए पर्याप्त कपड़े भी नहीं थे।
गुरु गोबिंद सिंह जी की स्थिति: इसी समय के दौरान, गुरु जी बड़े साहिबजादों की शहादत (चमकौर के युद्ध) के बाद माछीवाड़ा के जंगलों की ओर जा रहे थे, जहाँ उन्हें गनी खान और नबी खान ने सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने में मदद की थी।
गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके परिवार को शत शत नमन ⚜️ 🙏🏻 ⚜️
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ISRO’s LVM3 mission successfully deployed a record-breaking heavy satellite into LEO.
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23 दिसंबर 1704 को गुरु गोबिंद सिंह जी की माता गुजरी और छोटे साहिबज़ादे (जोरावर सिंह और फतेह सिंह) को विश्वासघाती गंगू ने मुगलों को सौंप दिया था। इन्हें सरहिंद के ठंडे बुर्ज में कैद किया गया और धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया, जिसके लिए साहिबज़ादों ने मना कर दिया था।
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22 दिसंबर का दिन सनातन इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन 1704 (कुछ स्रोतों के अनुसार 1705) में चमकौर के युद्ध (Battle of Chamkaur) के दौरान गुरु गोबिंद सिंह जी के दो बड़े साहिबजादे शहीद हुए थे।
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21 दिसंबर 1704 की रात को, मुगल सेना द्वारा विश्वासघात करने और सरसा नदी में बाढ़ (तेज बहाव) के कारण गुरु गोबिंद सिंह जी का परिवार तीन भागों में विभाजित (बिछड़) गया था। यह विभाजन माता गुजरी व छोटे साहिबजादों, बड़े साहिबजादों और स्वयं गुरुजी के अलग होने के रूप में हुआ।
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!!सतनाम श्री वाहेगुरु जी 🙏!!
आनंदपुर साहिब छोड़ने की रात...
20 दिसंबर (6 पौष) – उस ठंडी, बरसाती रात में गुरु गोविंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब का किला छोड़ दिया। श्री सिरसा नदी में भयंकर बाढ़ आई, परिवार बिछड़ गए, कई सिंह शहीद हो गए। फिर भी गुरु साहब का साहस नहीं गिरा।
यह त्याग, यह बलिदान – चारों साहिबजादों और माता गुजरी जी की शहादत की नींव है।
आइए आज हम उन महान शहीदों को याद करें और विनम्रतापूर्वक नमन करें।
वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतहे! 🙏
Jai Shree Krishna! 🙏 Celebrating the divine love and wisdom of Lord Krishna, the eternal source of joy and inspiration. May his blessings guide us all towards righteousness and inner peace. 🌟 #LordKrishna#HareKrishna#writerslife#writersoftwitter#writers