मैं सोच रहा हूँ आईटी सेल अब कास्ट सेंसस को कैसे डिफेंड करेगी! मेरे कुछ सुझाव हैं:
१. राहुल गाँधी से ��ोदी जी ने मुद्दा ही छीन लिया।
२. 2021 जनगणना में पता चला है कि सवर्णों की संख्या देश में 60% है, तो आरक्षण कम हो सकता है।
३. अब मुसलमानों की भी जाति पता चल जाएगी, फिर उन्हें भी आरक्षण में डाला जाएगा जिससे भीम-मीम नैरेटिव में दरार पड़ेगी।
४. अब लोगों के सर से ‘पहलगाम पर मोदी क्या करेंगे’ की जगह, कास्ट की बातें होंगी और सेना पर कोई दवाब नहीं रहेगा।
५. जो विपक्ष आज सोचता है, मोदी जी 2004 में सोच चुके होते हैं। भाजपा ने ही सबसे पहले कास्ट सेंसस की बात की थी और फलाना कमिटी बनाई थी।
६. हर चुनाव से पहले अलग रणनीति होती है, ‘एक हैं तो सेफ हैं’ से दो चुनाव जीत गए, अब बिहार में जातिवाद के दम पर चुनाव जीतेंगे।
७. अब आरक्षण 85% करके राहुल गाँधी से ‘जितनी आबादी, उतना हक’ का नारा भी छीन लेंगे।
८. भाजपा ने इस एक घोषणा से सारी जातिवादी पार्टियों की कमर तोड़ दी है, अब उनके पास राजनीति के लिए कुछ बचा ही नहीं।
९. पसमांदा का 85% वोट अब भाजपा को ट्रांसफर होगा क्योंकि उन्हें भी अब आरक्षण दिया जा सकेगा।
हमारे देश का दुर्भाग्य है विपक्ष को इस बात की चिंता नही है कि विकास कितना हुआ , महिला सुरक्षा पर देश की स्थिति क्या है, बेरोजगारी दर बढ़ क्यों रही , उन्हें फिक्र है तो सिर्फ इस बात की जल्द से जल्द देश को जातिगत जनगणना के आधार पर बाटा जाए उन्हें फिक्र है तो सिर्फ आरक्षण की।
हमने तो केवल तीन जगह मांगी...
श्री अयोध्या धाम का उत्सव लोगों ने देखा...
नंदी बाबा ने भी कहा कि हम काहे इंतजार करें...
हमारे कृष्ण कन्हैया कहां मानने वाले हैं...
देश कितना राममय है इसका अंदाज�� इससे लगाइए।
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले रामचरितमानस मांग के कारण 50 वर्षों में पहली बार यूपी के गोरखपुर में गीता प्रेस को अपने स्टॉक में रामचरितमानस की कमी का सामना करना पड़ रहा है।