It's my sincere request that I'll stand inside the gate, but you have to get the children treated.
~Dimple Yadav, MP (Samajwadi Party)
जिस तरह से डिंपल यादव आज एक लीडर के रूप में उभरकर आई हैं, वो काबिल-ए-तारीफ है।
डिंपल यादव ने आज साहसिक काम किया है।
छात्रों की मदद करनी हो, पुलिस वालों से बचाव करना हो या फोर्स वालों की जोर जबरदस्ती के खिलाफ आवाज उठाना हो; पूरे दिन डटी रही हैं।
हिम्मत हौसला बढ़ाती रही हैं।
@dimpleyadav ✊
ये वीडियो IYC मुख्यालय का है,
जहां लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों की बौछार के बीच छात्र पनाह लेने आये थे।
लेकिन जलियांवाला बाग की तर्ज पर जनरल शाह के आदेश पर IYC मुख्यालय के अंदर निहत्थे छात्रों पर आंसू गैस के गोले दागे जा रहे है।
Appreciate Dimple Yadav's presence at the protest site.
While other political parties were busy calculating political gains and losses, the SP took a clear stand in support of the students.
क्रांति जब ममता का हाथ थाम ले, तब नेतृत्व केवल राजनीति नहीं रह जाता, बल्कि मानवता का सबसे सुंदर स्वरूप बन जाता है।
निस्संदेह, डिंपल यादव जी केवल संघर्ष की प्रतीक ही नहीं, बल्कि वात्सल्य, करुणा और ममता की सजीव प्रतिमूर्ति भी हैं। ❤️🙏🏻 #JantarMantarProtest
ममता का दूसरा नाम है मां!
मातृत्व, मां का प्रेम दुनिया का सबसे अनमोल अहसास होता है। शब्दों में इसे समेटना मुमकिन नहीं है। ये एक अहसास है। ममता एक ऐसा गहरा और निस्वार्थ सागर है, जिसमें सिर्फ देना और त्याग करना शामिल होता है। यह एक ऐसा अनोखा अनुभव है, जिसे केवल एक मां ही समझ सकती और महसूस कर सकती है। एक पुरुष अपने बच्चे को पलता देख और उस मां को देख सिर्फ अंदाजा लगा सकता है।
एक बेऔलाद व्यक्ति इस असीम सुख और रूहानी जुड़ाव से अनजान रह जाता है। वो कभी भी वात्सल्य को नहीं समझ सकता। वो जीवन के अन्य सुख तो पा सकता है , लेकिन अपनी संतान को सीने से लगाने का वह जादुई अहसास, उस निश्चल और निस्वार्थ वात्सल्य के कारण सभी में अपने संतान को देखने का अनुभव उनके लिए हमेशा अनसुलझा ही रहता है।
उन पत्रकारों को सलाम, जिन्होंने भागते-दौड़ते, ख़ुद पुलिस से पिटते हुए युवाओं पर चलाई गई हर लाठी को अपने लेंस में क़ैद कर दुनिया तक पहुँचाया।
उन सभी “पत्तलकारों” को हज़ार लानत, जो अभी बैठ कर यह प्लानिंग कर रहे होंगे कि मालिक को ख़ुश करने के लिए चीन-पाकिस्तान एंगल कैसे निकालें!
“शिक्षा से खिलवाड़ नहीं
अब ये अत्याचार नहीं”
जब छात्र दिन-रात मेहनत करता हैं, अपने परिवार के सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष करता हैं। लेकिन जब परीक्षा ही ईमानदार नहीं होगी, तो मेहनत का क्या मतलब रह जाता है?
इंकलाब ज़िंदाबाद!