भाप रे भाप !!
आज से पहले तो गर्मी कभी पड़ी ही नहीं थी !!
ऐसा ग़ज़ब का ज्ञान ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के लिए !!!
दिल्ली वालों को एंटरटेनमेंट की कमी तो महसूस नहीं होती होगी -- आये दिन के ऐसे बयान !!
इस बयान पर हँसना है -- या बिना पानी या कम पानी में जीना है -- या पानी की कमी को लेकर शिकायत करनी है ??!!
या फिर अपना माथा पकड़ना है कि ऐसी बयानबाज़ी को 5 साल झेलना होगा !!
@gupta_rekha@RahulGandhi@priyankagandhi@raonarenderinc@HariprasadBK2
#श्वेता_ढुल
*Sign the petition*
Tell the Modi government we choose #GreenOverGreed 🇮🇳*
This #WorldEnvironmentDay, I want to ask every young Indian one question:
What kind of India do you want to inherit?
One where rainforests have been bulldozed for casinos, coral reefs erased from maps, tribal communities pushed off their land, and the air we breathe turned into poison?
Or one where India’s natural heritage is protected, our tribal communities are safe, and progress works with nature - not against it.
Right now, the Modi government is destroying Great Nicobar Island. More than 1.5 crore trees, ancient coral reefs, irreplaceable rainforests are being destroyed - to profit one businessman.
This is your inheritance they are bulldozing. And only you can stop them.
Sign the petition. Tell the Modi government we choose #GreenOverGreed 🇮🇳
~ Rahul Gandhi
@RahulGandhi
#NicobarMatters
https://t.co/YCsd9tcOyl
I visited the southernmost tip of India.
I stood at Indira Point. I walked under trees that have stood for centuries. I dove into coral reefs among the most vibrant on earth.
And I sat with the people who live there. Tribal communities, whose land is being taken away by violating the Forest Rights Act. Settlers, many of them former soldiers, placed on these islands by the Indian government, who aren’t getting fair compensation.
The Modi government and BJP tells you Great Nicobar Project is about defence. It is not.
Expand INS Baaz - we will back the government fully. The Navy has been asking for expansion for five years - it has been ignored.
They tell you it is about a transhipment port. It is not. India is already building one in Kerala, which is on the mainland.
What it actually is: 1.5 crore trees felled. Coral reefs erased from official maps. Soldiers and tribals displaced - so one businessman can build hotels and casinos on India’s most irreplaceable ecological land.
Every young Indian I have spoken to understands this. You know that no amount of profit is worth destroying what can never be recovered.
I stand for ecologically balanced development. These islands can be the most extraordinary sustainable destination the world has ever seen. That is the India worth fighting for.
#GreenOverGreed
#NicobarMatters
#WorldEnvironmentDay
मणिपुर में मातृभूमि की रक्षा एवं सेवा का सर्वोच्च कर्तव्य निभाते हुए वीरगति को प्राप्त रेवाड़ी जिले के भाकली गाँव निवासी BSF के जांबाज़ ASI श्री दयाकिशन जी की शहादत को मैं भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करती हूँ🙏
देश की सुरक्षा के लिए दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान सदैव स्मरण रखा जाएगा और आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता रहेगा।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
ॐ शांति।
#श्वेता_ढुल
अगर 50 बच्चे एक संस्थान छोड़कर भाग रहे हैं, बच्चे खुद मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगा रहे हैं, अभिभावकों को मिलने नहीं दिया जा रहा, फोन तक नियंत्रित किए जा रहे हैं — तो यह सिर्फ “अनुशासन” का मामला नहीं रह जाता, यह बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा का गंभीर प्रश्न बन जाता है।
शिक्षा के नाम पर बच्चों को डर, दबाव और कैद जैसा माहौल देना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सरकार और प्रशासन को निष्पक्ष जाँच कर सच्चाई देश के सामने रखनी चाहिए।
बच्चे मशीन नहीं हैं।
उनकी मानसिक स्थिति, सम्मान और स्वतंत्रता सबसे पहले होनी चाहिए।
@NayabSainiBJP@HariprasadBK2@raonarenderinc@JitendraBaghel_
#SUPER100 #HumanRights #Students #Education #Haryana #ChildRights
#श्वेता_ढुल
हरियाणा के 12,700 गेस्ट टीचर्स के पक्ष में आया हाईकोर्ट का फैसला सिर्फ एक कानूनी आदेश नहीं, बल्कि वर्षों से शिक्षा व्यवस्था संभाल रहे शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों की जीत है।
जब सरकार खुद मानती रही कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी थी, तब इन्हीं गेस्ट टीचर्स ने व्यवस्था को संभाला, लाखों बच्चों का भविष्य बनाया।
20 साल तक सेवा लेने के बाद उन्हें “स्पेयर पार्ट” समझना न केवल अन्याय था, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के साथ भी खिलवाड़ था।
यह फैसला उन सभी कर्मचारियों के संघर्ष को आवाज देता है जो वर्षों से अस्थायी व्यवस्था के नाम पर शोषण झेल रहे हैं।
शिक्षकों का सम्मान सुरक्षित रहेगा तभी शिक्षा का भविष्य सुरक्षित रहेगा।
बधाई आप सभी को l
व साथ ही सरकार से अपेक्षा रहेगी कि अब आप फैसला लागू करने में देर नहीं करेंगे l
@NayabSainiBJP@HariprasadBK2@raonarenderinc@JitendraBaghel_
23 और 24 मई की अमर उजाला में प्रकाशित ये खबरें किसी अफवाह का नहीं, बल्कि एक बेहद गंभीर और भयावह सच्चाई का संकेत हैं।
इन खबरों के पत्रकार गौरव सागवाल और प्रदीप पिलानिया जी हैं जिन्होंने सबसे पहले इस संस्थान का काला चिटठा सबके सामने रखाl
कल दीपक कालीरमन जी ने वहाँ पुलिस व मीडिया बुलाकर कुछ बच्चों को आज़ाद करवाया l
दोनों ही द्वारा वहाँ का जो दृश्य बताया, वह बेहद चिंताजनक और झकझोर देने वाला है।
खबरों के अनुसार —
▪️ छात्राओं के परिसर से भागने की घटनाएँ हुईं
▪️ बच्चों द्वारा मानसिक दबाव और भय का ज़िक्र किया गया
▪️ अभिभावकों ने सामान न लौटाने, बच्चों से मिलने न देने और दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए
▪️ जिला शिक्षा अधिकारी को स्वयं मौके पर पहुँचकर जांच करनी पड़ी
बच्चों को “मौत ” जैसे पत्र लिखने की नौबत क्यों आई?
छात्राएँ दीवार फांदकर भाग रही हैं।
16-17 घंटे तक उनके अभिभावकों को कोई सूचना नहीं दी जाती।
डरी हुई बच्चियाँ डेरों में जाकर छुपती हैं और वहाँ से अपने माता-पिता को फोन कर कहती हैं —
“प्लीज़ हमें यहाँ से ले जाओ…”
आख़िर ऐसा कौन सा माहौल था जहाँ बच्चियों को अपनी जान और मानसिक स्थिति बचाने के लिए भागना पड़ा?
क्यों अभिभावकों को उनकी बेटियों की जानकारी तक नहीं दी गई?
किस अधिकार से बच्चों को उनके परिवारों से काटकर रखा गया?
यह शिक्षा नहीं, अमानवीयता है।
यह अनुशासन नहीं, मानसिक दबाव और भय का वातावरण है।
शिक्षा के नाम पर यदि बच्चों का मानसिक संतुलन, स्वतंत्रता और सम्मान छीना जा रहा है, तो यह किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता।
बच्चे मशीन नहीं होते।
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के नाम पर उनका बचपन, मानसिक स्वास्थ्य और भावनाएँ कुचली नहीं जा सकतीं।
और सबसे शर्मनाक बात —
यह सब सरकार की नाक के नीचे, सरकारी संरक्षण में चल रहा था।
अगर मीडिया में खबरें न छपतीं, अगर बच्चियाँ भागकर बाहर न आतीं, तो क्या सरकार और प्रशासन चुप ही बैठे रहते?
इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए — चाहे वे संस्था संचालक हों या उन्हें संरक्षण देने वाले सरकारी लोग।
@NayabSainiBJP@HariprasadBK2@raonarenderinc@JitendraBaghel_
#श्वेता_ढुल
इस super 100 में बच्चों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार की शिकायत कल ही #NHRC नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन व #SHRC स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन में कर दी है मैंने ईमेल के माध्यम से -
सरकार से स्वतः संज्ञान लेने की कोई आशा नहीं मुझे -
दबाव में ही सही मगर संज्ञान तो लेना पड़ेगा -
ये बच्चे आपकी प्रॉपर्टी नहीं!
जानवरों से बदतर सलूक बंद हो l
दोषियों पर कार्यवाही हो l
@NayabSainiBJP@HariprasadBK2@raonarenderinc@JitendraBaghel_
#श्वेता_ढुल
बताया जा रहा है कि हरियाणा सरकार 5 लाख प्रति वर्ष प्रति बच्चे के इस जेल में देती है l
इस कैद को बंद करने के साथ साथ तीन सवालों के जवाब और दीजिये --
1) ये पैसा किसकी जेब में गया ?
2) इस जेल के संस्थापक बिहार से नवीन मिश्रा को बताया जा रहा है रेवाड़ी से खदेड़ा गया था तो इन्हें कुरुक्षेत्र में यह धंधा शुरू करने का आशीर्वाद कहाँ से प्राप्त हुआ?
3) सरकार की इतनी मेहरबानी क्यूँ है इसपर ?
@NayabSainiBJP@HariprasadBK2@raonarenderinc@JitendraBaghel_
#श्वेता_ढुल
उच्च स्तरीय #SIR_कमिटी का #सदस्य चुने जाने पर मैं अपने हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री #राव_नरेंद्र जी व हरियाणा के प्रभारी श्री #बी_के_हरिप्रसाद जी का हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ।
@raonarenderinc@HariprasadBK2
आज समिति की पहली बैठक में SIR प्रक्रिया को लेकर विस्तृत, गंभीर एवं सार्थक चर्चा हुई, जिसमें मैंने भी अपने विचार व्यक्त किये l
उसके बाद चंडीगढ़ स्थित Haryana Pradesh Congress Committee कार्यालय में BLA एवं सभी जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों के साथ SIR विषय पर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
हरियाणा में चुनाव आयोग द्वारा शुरू की जा रही SIR प्रक्रिया के अंतर्गत कांग्रेस पार्टी द्वारा नियुक्त BLA-1 पूरी मुस्तैदी के साथ एक-एक वोट की रक्षा करेंगे।
किसी भी प्रकार की मनमानी, पक्षपात अथवा मतदाता अधिकारों पर चोट को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता बूथ स्तर पर मजबूती से खड़ा होकर नए वोट जुड़वाने, मतदाता सूची को सही बनाए रखने तथा लोकतंत्र की रक्षा के लिए पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ कार्य करेगा।
#Congress #Haryana #SIR #Democracy #BLA #ShwetaDhull
#श्वेता_ढुल
आपको हैरानी होगी ये जानकर कि हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के बराना गाँव में एक #जेल है #SUPER100 नाम के NGO की जिसे सरकार का संरक्षण प्राप्त है l
जिसका संचालन बिहार से मिश्रा जी करते हैं और जहाँ पर #बच्चों_को_कैद करके रखा जाता है l
जानवरों से भी बदतर स्थिति में ये मासूम बच्चे -- इनके बारे सरकार द्वारा कहा जाता है कि इन्हें बड़े बड़े शिक्षण संस्थान, कॉलेज यूनिवर्सिटी IIT के लिए तैयार किया जाता है --
मगर सच्चाई इतनी खौफनाक है कि आपकी रूह कांप जाएगी सुनकर , देखकर --
बदबूदार कीड़ो भरा पीने का पानी - कुहनी से मारना , 4-5 दिन तक वाशरूम तक ना जाने देना -
250 बच्चों पर 7-8 वाशरूम --
मार पिटाई
जानवरों से बदतर जीवन --
इतना कि बच्चे बुरे डिप्रेशन में हैं और दिमाग़ हिल चुका है --
अभिभावकों जब अपने बच्चों को लेकर जाना चाहें तो उन्हें उनके बच्चे ही ना देना -- कभी DEO से लेटर लेकर आओ कभी किसी और अधिकारी से -- और अधिकारी न मिले तो बच्चे से मिलने तक न देना -
बच्चा किसी तरह बच कर निकल भी जाये तो उसका सामान न देना या SLC न देना! !
ऐसा लग रहा है जैसे सुनियोजित तरीके से सबसे ब्राइट बच्चों को पागल बनाने के लिए इस संस्थान को सम्पूर्ण संरक्षण दे रही है हरियाणा सरकार !
यह जेल नहीं तो और क्या है --
आज मेरे कुछ जांबाज़ बहादुर साथियों की वजह से यहाँ पुलिस बुला ली गयी -- मीडिया इक्क्ठा किया गया तो 22-25 बच्चे बचकर निकल पाए हैं -- पढ़ाई में अव्वल यह बच्चे अब ठीक से बोल पाने में भी असमर्थ हैं -- डिप्रेशन में हैं --अटक अटक कर बोल रहे हैं --
माता पिता का रो रोकर बुरा हाल हो गया है --
इन 25 बच्चों में से केवल एक बच्चे ने बाहर निकलकर ठहाका लगाया कि मैं आज़ाद हो गया! !
ध्यान रखिये मैं शब्द बोल रही हूँ “आज़ाद” हो गया l
अपनी पोल खुलते देखकर संस्थापक मिश्रा जी ने बाहरवी के कुछ बच्चों से एक पेज पर स्पष्टिकरण लिखकर रटवाया और पढ़वाया है जिसे रिकॉर्ड किया है -- जिसमे बुलवाया है कि सब ठीक है -- सब चंगा है --!
क्या वाकई है ?
डालने को पीड़ित बच्चों की वीडियो मैं भी डाल सकती हूँ और सरकार के कारनामे सार्वजनिक हो जाएंगे --- लेकिन मैं इन vulnerable बच्चों की प्राइवेसी का मज़ाक नहीं उड़ा सकती --
@NayabSainiBJP जी -- शर्म कीजिये !
@HariprasadBK2@raonarenderinc@BhupinderShooda@DeependerSHooda@JitendraBaghel_
(video credit- https://t.co/AGVPtz1gfZ)
#श्वेता_ढुल
“हर चौथा छात्र अपनी कॉपी दोबारा देखने को मजबूर हो जाए — यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।
CBSE के OSM सिस्टम में लाखों छात्रों द्वारा स्कैन कॉपी मांगना बताता है कि बच्चों का भरोसा मूल्यांकन प्रक्रिया से उठ रहा है।
जब शिक्षक दबाव में हों, कॉपियाँ जल्दबाज़ी में जांची जाएँ, और क्रॉस-चेकिंग जैसी प्रक्रियाएँ कमजोर पड़ जाएँ — तो सबसे बड़ा नुकसान मेहनत करने वाले छात्रों का होता है।
एक नंबर सिर्फ अंक नहीं होता, किसी छात्र का आत्मविश्वास, भविष्य और अवसर तय करता है।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवीय संवेदनशीलता बेहद ज़रूरी है।
बच्चों को “सिस्टम की गलती” की कीमत नहीं चुकानी चाहिए।”
10-15 साल तक ठेके पर काम लेना और फिर उन्हें अस्थायी बताना — यह सिर्फ़ अन्याय नहीं, शोषण है।
जब कर्मचारी वर्षों तक एक ही विभाग, एक ही ज़िम्मेदारी और स्थायी प्रकृति के काम में सेवा दे रहे हैं, तो उन्हें “कच्चा” कहकर उनके भविष्य से खिलवाड़ क्यों?
हाईकोर्ट का यह फैसला उन हजारों एनएचएम कर्मियों की लड़ाई को आवाज़ देता है जिन्होंने अपना जीवन स्वास्थ्य सेवाओं में झोंक दिया, लेकिन बदले में मिला सिर्फ़ असुरक्षित भविष्य।
लेकिन माननीय हाई कोर्ट का फैसला भी नहीं माना गया -
ना पक्का किया गया ना ही समय से वेतन दे रहे हैं !!!
सरकारें योजनाएँ बदलती रहीं,
लेकिन कर्मियों की मेहनत नहीं बदली।
फिर अधिकार देने में डर कैसा?
जो कर्मचारी 10-15 साल से जनता की सेवा कर रहे हैं,
उन्हें स्थायित्व, सम्मान और सुरक्षा मिलनी ही चाहिए।
संविदा व्यवस्था अगर स्थायी कामों पर चलेगी,
तो युवाओं का भविष्य हमेशा अस्थिर रहेगा।
कहने भर को ना कहें कि न्यायालय व न्याय का सम्मान करते हैं - करके दिखाएं l
@NayabSainiBJP@HariprasadBK2@raonarenderinc@JitendraBaghel_
#श्वेता_ढुल
दिक्कत तब होती है जब एक शिक्षक, जिसे युवा सुनते और मानते हैं, तथ्यों से हटकर राजनीतिक टिप्पणी करता है।
आप एक अच्छा शिक्षण संस्थान चलाते हैं और युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करते हैं — यह निश्चित रूप से सराहनीय कार्य है।
इसी वजह से आपकी कही हुई बातों का प्रभाव भी बहुत व्यापक होता है।
लेकिन अधूरी या गलत जानकारी साझा करना केवल एक व्यक्तिगत राय नहीं रह जाती, बल्कि वह MISINFORMATION का रूप ले लेती है।
आपको फॉलो करने वाले अनेक युवा उसे ही अंतिम सत्य मान लेते हैं।
अच्छी बात है कि आपने अपनी गलती स्वीकार की, लेकिन यदि कांग्रेस का पक्ष या पूरा संदर्भ भी साथ रखा जाता तो बात अधिक निष्पक्ष और संतुलित होती।
हाँ, लोगों की भावनाएँ आहत हुई हैं, और केवल एक “sorry” से वह पूरी तरह ठीक भी नहीं होता।
क्योंकि जब एक शिक्षक किसी राजनीतिक पक्ष के विरुद्ध माहौल बनाता हुआ दिखाई देता है, तो उससे निराशा होना स्वाभाविक है।
परिमल जी, आपसे ऐसी अपेक्षा नहीं थी।
एक शिक्षक का स्थान समाज में सर्वोपरि माना जाता है।
इसलिए उससे निष्पक्षता, संतुलन और जिम्मेदारी की उम्मीद सबसे अधिक की जाती है।
आदर सहित
श्वेता ढुल
जितना हँस सकते हो, हँस लो,
जितना जी सकते हो, जी लो,
वक़्त की उँगलियों से फिसलती
ये उम्र लौटकर नहीं आती।
आज जो चेहरा आईने में
रोशनी सा चमक रहा है,
कल उसी चेहरे पर
अनुभव की झुर्रियाँ उतरेंगी।
आज जो कदम बिना रुके
सपनों के पीछे भागते हैं,
कल वही थककर
यादों के सहारे चलेंगे।
इसलिए संभाल कर मत जीना इतना
कि जीवन ही हाथ से निकल जाए,
थोड़ा बिखरो, थोड़ा मुस्कुराओ,
कुछ पागलपन भी रहने दो।
क्योंकि एक दिन
हम तस्वीरों में ढूँढेंगे खुद को
और कहेंगे—
“काश… उस उम्र में थोड़ा और जी लिया होता।”
#श्वेता_ढुल
#ईरान हमें सस्ते दामों पर कच्चा तेल देने के लिए तैयार है लेकिन अमेरिका ने आँख दिखा दी और प्रधानमंत्री भारत डर गए और ईरान को मना कर दिया !
#रूस - यानि कि हमारे पुराने मित्र से नेचुरल गैस का कंटेनर गुजरात के लिए निकला लेकिन गुजरात पोर्ट पर उतरवाने की बजाए हमारे प्रधानमंत्री जी ने मना कर दिया (फिर से अमेरिका के दबाव में) व उससे खाद - फ़र्टिलाइज़र जो बनना था वह रह गया -
परिणामस्वरूप मोदी जी किसानों से कहने लगे कि नेचुरल खेती करें - केमिकल फ़र्टिलाइज़र, खाद का प्रयोग न करें !
#अमेरिका से इतना भय क्यूँ ?
कि हम अपने पुराने मित्रों को नाराज़ कर रहे हैं - देश suffer कर रहा है - #आर्थिक_संकट के मुहाने पर खड़ा है लेकिन अमेरिका जो कह दे उसे YES BOSS कहकर जैसे माना जा रहा है! !
#अडानी अमेरिका में 2400 करोड़ रूपये देकर आये हैं अपने ऊपर से सारे इलज़ाम हटवाने के लिए लेकिन क्या एक भी मीडिया चैनल ने यह बताया ?
इलज़ाम क्या ??- भारत में रिश्वत देकर अडानी ने काम निकलवाये --
लेकिन क्या भारत सरकार ने ज़हमत उठायी यह जानने की या जनता को बताने की कि किस अधिकारी, नेता, मंत्री को यह रिश्वत दी गयी ??
क्या उनके नाम बाहर आये या कभी आएंगे ??!!
आज #रुपया औँधे मुँह गिरा पड़ा है -- लगातार गिर रहा है - #तेल के दाम बढे जा रहे हैं -- और सारा बोझ जनता के सिर पर डाला जा रहा है --
याद कीजिये जब अंतराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 30-40-50-60 $ प्रति बैरल था तब भी भारत में तेल महंगा था -- आज जब 110$ प्रति बैरल है तब तो क्या ही कहने -- तो तब की कमाई जो सरकारी तेल कम्पनियो व सरकार ने दोनों हाथों से कमाई वो अब जनता को राहत देने के लिए सब्सिडी के रूप में इस्तेमाल क्यूँ नहीं की जा रही है? ?
इसके उलट #एथनोल जो बेहद सस्ता है और 20% तक तेल में मिलाया जा रहा है उसे और 100₹ में बेच रहे हो? ?
आज अमेरिका के सेक्रेटरी ने भारत आकर कहा कि अमेरिका 500 बिलियन डॉलर का सामान भारत को बेचेगा !!
मतलब लगभगा 47,850 करोड़ रूपये का क़ृषि उत्पादन, टेक्नोलॉजी का सामान -- यह एक तरीके की हत्या होगी हमारे ज़रूरतमंद गरीब तबके की -- क्या यह बताया गया कि इसका असर हमारे किसानों, छोटे व्यापारियों और स्थानीय उद्योगों पर क्या पड़ेगा?
आलम देखिये हमारी गुलामी और भय का कि यह बात हमारे प्रधानमंत्री ने नहीं बताई कि भारत यह सब खरीदेगा !!
कहाँ गयी हमारे देश की संप्रभुता? ?
यह unacceptable है !
क्यूँ आपकी गलतियों की सज़ा भारत और भारतवासी भुगत रहे हैं ??
क्युं हमारी सरकार हमारे लिए नहीं है ?
सवाल यह है कि क्या भारत की नीतियाँ अब भारतीय हितों से ज़्यादा अमेरिकी दबाव से तय होंगी?
देश की संप्रभुता सिर्फ भाषणों से नहीं बचती —
उसके लिए जनता के हित में फैसले लेने पड़ते हैं।
देशहित में सवाल पूछना गुनाह नहीं — ज़िम्मेदारी है l
@narendramodi@RahulGandhi@priyankagandhi@HariprasadBK2@raonarenderinc
#श्वेता_ढुल