चार दशकों तक बोफोर्स के नाम पर श्री राजीव गांधी जी को बदनाम करने की राजनीति होती रही। आरोप गढ़े गए, झूठ फैलाए गए और एक ऐसे नेता की छवि पर सवाल उठाए गए, जिसने अपना पूरा जीवन देश को दिया और अंततः देश के लिए अपने प्राण भी न्योछावर कर दिए।
राजीव गांधी जी की विरासत को किसी प्रमाण की जरूरत कभी नहीं थी।
लेकिन आज का फैसला दशकों के दुष्प्रचार को एक जवाब जरूर देता है, सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।
सत्यमेव जयते।