विभाग आवंटन के बाद #चतुर्थ_श्रेणी भर्ती प्रक्रिया एकदम शांत सी हो गई है।☺️
कोई उथल-पुथल नहीं, कोई हलचल नहीं।
एकदम सन्नाटा।
विभाग आवंटन के लिए ही हो-हल्ला हो रहा था बस, उल्टे-सीधे विभाग मिलते ही सब खामोश😄
चतुर्थ श्रेणी भर्ती:
ARD का रैंडम विभाग आवंटन समझ से परे है। 10हजार रेंक से लेकर 13हजार रैंक तक लगातार सभी को शिक्षा विभाग अलॉट किया गया है।
यदि रेंडिमिली विभाग का आवंटन करना था तो पदों की संख्या के अनुपात में रैंडम मैथड यूज़ करना चाहिए था
@educationnagari
ये मामला कोर्ट में तो जाना ही था क्योंकि रैंडमली विभाग आवंटन की प्रक्रिया पूर्णतः आधारहीन और अन्यायपूर्ण है।
अभ्यर्थियों की choice और मेरिट क्रमांक के आधार पर विभाग आवंटन किया जाना चाहिए जिससे अधिक प्राप्तांक (अच्छी मेरिट) वाले अभ्यर्थियों को लाभ मिले।
@kambesh78@dharmraj9511
@DONTQUITE5@kambesh78@dharmraj9511 किसी भी अभ्यर्थी को लगेगा कि उसके साथ गलत हुआ है तो वो कोर्ट की शरण में जाने का अधिकार रखता है, अब उसके कोर्ट जाने से भर्ती प्रक्रिया में विलंब होता है तो ये उसकी गलती नहीं, सिस्टम की गलती है जिसने उसे कोर्ट जाने को मजबूर किया है। किसी को मजा नहीं आता समय और पैसा खराब करने में।
@kambesh78@dharmraj9511 न्यायालय संतुष्ट या असंतुष्ट लोगों की संख्या के आधार पर नहीं, साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देते हैं भाई।
किसी भी सिद्धांत/नियम को सिर्फ इसलिए उचित नहीं मान सकते कि ज्यादा लोग इससे सहमत हैं।
कानून गलत और अन्यायपूर्ण तो न्यायालय जवाब मांगने और उसमें सुधार करवाने की ताकत रखते हैं।
@kambesh78 भाई,
कोई अन्याय सिर्फ इसलिए स्वीकार नहीं किया जा सकता कि वो नियम बनाकर किया गया है।
नियम भी गलत होते हैं, विरोध करना पड़ता है, समीक्षा होती है और बदलाव होते हैं, न्याय मिलता है। बस आवाज उठानी पड़ती है।
रैंडम विभाग आवंटन प्रक्रिया गलत है तो गलत है।
@dharmraj9511
पहले सभी चयनित अभ्यर्थियों से विभागों की प्राथमिकता(Preference) ली जाती,फिर राज्यस्तरीय मेरिट के क्रम में सबसे पहले प्रथम रैंक वाले को उसकी पहली पसंद का विभाग,उसके बाद द्वितीय रैंक वाले को,और इसी प्रकार क्रमशः सभी अभ्यर्थियों को उनकी उपलब्ध वरीयता के अनुसार विभाग आवंटित किए जाते।
@KrishanTetawral@saranhanuman5@ashokgehlot51 अगर हर इंसान पहले ही ये सोचकर घर बैठ जाए कि कुछ नहीं होगा तो अन्याय के खिलाफ कोई बोलेगा ही नहीं।
होगा या नहीं होगा वो बाद की बात है,
सबसे पहला काम है गलत के खिलाफ हमें आवाज उठानी है और अपना ये काम हम बखूबी करेंगे चाहे परिणाम जो भी हो।
@kambesh78@dharmraj9511 जिस नियम से विभाग आवंटन किया गया है उसमें खामी है तो आवाज उठाई जानी चाहिए, गलत व्यवस्था आज नहीं तो कल बदलनी चाहिए, अन्याय कभी बर्दाश्त नहीं किया जाए।
हम गलत होता देखकर भी केवल इस स्वार्थ से मुंह बंद नहीं रख सकते कि भर्ती जल्दी हो जाए।
@kambesh78@dharmraj9511 कुछ नहीं होगा ये तो मुझे भी पता है मेरे भाई लेकिन ये प्रक्रिया गलत है इसमें कोई दोराय नहीं।
इस प्रक्रिया में मनमर्जी से या सिफारिश से किस आधार पर विभाग दिए जाते हैं, कुछ नहीं पता इसलिए प्रक्रिया इतनी पारदर्शी हो जो स्पष्ट हो और अच्छी मेरिट वाले अभ्यर्थियों को लाभ मिले।
@Ravikumar151315 आज के इस प्रतियोगिता और आधुनिकता के जमाने में तुक्के से पर्ची उछालकर विभाग चेप देना न्यायसंगत कैसे हो सकता है?
बिना किसी आधार की इस औचित्यहीन प्रक्रिया से अच्छी रैंक वाला अभ्यर्थी कभी संतुष्ट नहीं हो सकता।
अभ्यर्थी की choice और मेरिट क्रमांक के आधार पर विभाग आवंटन होना चाहिए।
#चतुर्थ_श्रेणी_भर्ती में फिलहाल सब कुछ नियमानुसार ही चल रहा है लेकिन भविष्य में होने वाली भर्तियों में विभाग आवंटन randomly करने की बजाय अभ्यर्थियों से choice लेकर उनके मेरिट क्रमांक के आधार पर करना चाहिए।
रैंडम प्रक्रिया संतोषजनक नहीं है, इसमें बदलाव होना जरूरी है।
@kambesh78