कभी मुझे लगता है
मेरे अंदर बहुत सारी आत्माएं
पल-पल रूप बदलती हैं
मुझसे कई तरह के
खेल करवाती हैं
समझ नहीं आता कि
मैं इंसान हू�� कि दर्द में भटकी आत्मा
मेरी क्या कहानी है
कौन हूं मैं
कहां से आया हूं मैं
आज फिर वही काली रात है
बत्तियां बंद हैं
अंधेरे में मैं गुम हूं💀
@bhatnagarp27
मैं रोज़ कई तरह की ज़िंदगी जीता हूँ
रोता भी हूँ हँसता भी हूँ
गुस्सा भी करता हूँ शांत भी हो जाता हूँ
खूब बोलता भी हूँ चुप भी रह जाता हूँ
लिखता हूँ मिटा भी देता हूँ
थकता भी हूँ काम करता भी हूँ
मैं ऐसा क्यों हूँ.. कौन हूँ मैं😢🥺
@bhatnagarp27#Patriot#DemocracyInAction#SadNight
मुझसे पूछ—मैंने खुद को कितना थाम रखा है,
दिल हर बार तेरी ओर चला… मगर रोक रखा है।
कहने को बहुत कुछ था हर लम्हा,
पर खामोशी में ही सब कुछ संजोकर रख रखा है।
𝕏 अंकित यादव 𓂃✍︎