ईश्वर की कृपा से भारतीय किसान हूँ ..मिटटी को बचाने और नया जीवन देने के जुगाड़ में ..शिकायत करना मेरी फितरत में नहीं ..हमेशा समाधान की और अग्रसर और तत्पर
भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था की दिशा में प्रभावी कार्रवाई—
वाराणसी इकाई द्वारा जनपद गाजीपुर में उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के वरिष्ठ सहायक एवं प्राइवेट वाहन चालक को ₹16,000/- रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया गया।
कृपया भ्रष्टाचार के प्रकरणों को एसीओ की हेल्पलाइन: 📱9454402484, ✉️[email protected] पर रिपोर्ट करें।
#UPPolice
A massive, united voice has risen - devout Hindus and multiple Hindu organizations have come together and officially filed complaints at Ponda and Mapusa, demanding equal enforcement of the law.
Those who insulted our revered deities Lord Ram & Mata Sita must face immediate arrest and strict action.
The law cannot be optional. Arrest Lord Rama Abusers!!!
#StopSelectiveAction_GoaPolice
ऐसा सख्त था महराज जिनका मुल्कों में राज जिन घर झूलता हाथी
हो जिन घर झूलता हाथी रे उन घर दिया ना बाती
हावड़ा शहर कुछ ऐसे ही जी रहा है , एक दौर था जब रेलवे के किसी भी पार्ट लोहे के किसी भी औजार, स्टील पर लिखा होता था made in howarah , यहां इतनी इंडस्ट्री थी । लिलुआ क्षेत्र में ही 300 से ज्यादा बड़े rolling factory , wagon workshop , foundries थी । करीब 30 हजार से अधिक लोग तो बस 1 डेढ़ किलोमीटर के व्यास में नौकरी करते थे और पास में चलता था लघु उद्योग , छोटे छोटे ढलाई घर , रोलिंग मिल । 3 लाख के करीब आबादी सिर्फ इस धंधे से चलती थी । सोचिए कितने परिवारों को ये जगह पालती थी । बंगाल हैमर , burfkhana जैसी बड़ी बड़ी कई सौ कम्पनी या हुआ करती थी । इसी वजह से इसे शैफील्ड ऑफ ईस्ट कहा जाता था । हुगली नदी के किनारे बसा ये शहर हमेशा आबाद रहता था , हर दम चिमनियों से धुआं निकलता रहता था । उस दौर में ये प्लैंड इंडस्ट्रियल एरिया था । और आज की हकीकत ये है कि सब बंद हो चुका है , chandi को हटा दे तो कोई बड़ी फैक्ट्री नहीं बची है । यही हाल फॉरशोर रोड का है उस पर बात बाद में करेंगे । मजदूर 60 रुपए घंटे की नौकरी पर खट रहा है । फैक्ट्री गोडाउन में तब्दील हो चुकी है । कुछ में टर्फ और रेस्टोरेंट बना दिए गए है । एक के बाद एक फैक्ट्री की जमीन को रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी में तब्दील कर दिया जा रहा है , इंडस्ट्री कभी यहां थी इसका नामोनिशान मिटाया जा रहा है । आज महुआ के स्टेटमेंट का आप काउंटर कर सकते है क्योंकि फैक्ट्री के अवशेष तो है , 5 साल बाद ये भी नहीं रहेंगे । मजदूरों को हमेशा एक उम्मीद रहती थी कि आज नहीं तो कल फैक्ट्री चालू होगा । इस उम्मीद का दम घोटा जा रहा है एक बिल के सहारे जो ममता सरकार लेकर आई जिसमें इंडस्ट्रियल लैंड को रेजिडेंशियल लैंड में तब्दील करने का गुनाह किया गया । फैक्ट्री के भीतर यूनियन खूब चोरिया कर रहा है । मशीनों को काट काट कर बेचा जा रहा है । मजदूरों के पीएफ ग्रैजुएटी के पैसों को भी टीएमसी यूनियन के लोग डकार गए है। रेलवे लाइन जहां से रॉ मैटेरियल आता था फिनिश्ड प्रोडक्ट मार्केट में जाता था वो भी पार्क बनाकर ढक दिया गया है । कुल मिलाकर हावड़ा को इंडस्ट्री का graveyard बना दिया गया है । जो आज तो नजर भी आ रहा है , शायद अगले 5 साल में नजर भी ना आए ।
@Pamphlet_in@ThePamphletWB ने इसपर विस्तृत रिपोर्ट की है । आप सब इसे हमारे यूट्यूब चैनल पर देख सकते है ।
@PratyushWB@vickyshukla354@akashdwivedi99
स्वराज द्वीप—अंडमान का सुकून भरा उष्णकटिबंधीय स्वर्ग—जहाँ हरे-भरे वर्षावनों की गोद में बसे सुनहरे समुद्री तट, नीले समंदर का अनूठा आमंत्रण देते हैं। पूर्व में हैवलॉक द्वीप के नाम से प्रसिद्ध यह अतुलनीय द्वीप अपने निर्मल जल, जीवंत समुद्री जीवन और अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटन मानचित्र पर एक खास छाप छोड़ता है। लगभग 113 वर्ग किमी में फैला यह द्वीप विश्राम और रोमांच का अद्भुत तालमेल है, जहाँ हर लहर और हरियाली सुकून और आकर्षण का नया आयाम प्रस्तुत करती है।
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आज बहरामगंज,राष्ट्रीय राजमार्ग -35,चुनार नगरपालिका, जनपद-मीरजापुर में “नवनिर्मित सरदार वल्लभ भाई पटेल निर्यात सुविधा केंद्र” का स्थलीय निरीक्षण किया।
केंद्र सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन एपिडा संस्था द्वारा स्थापित यह सुविधा क्षेत्रीय किसानों को निर्यात लिंकेज उपलब्ध कराने की दिशा एक मील का पत्थर सिद्ध होगी।
@drjaibhu अब यह सब सुनते हैं तो लिखना पड़ रहा है, अभी चार दिन पहले हमारे खेती के कार्य मे सहयोगी आशीष श्रीवास्तव जी मजदूरों को खाना लेकर खेत में गए थे, खेत जो कि बिलकुल दलित बस्ती से लगा हुआ है। मसूर के फसल में बकरी चराने रही थी, आशीष ने पूछा कि किसकी बकरी है तो छुन्नू दलित गरियाने लगे
@AgriGoI कायदे से छ फीट ऊंची घेराबंदी करवाने में 730/- रु प्रति रनिंग मीटर का खर्च आता है। कृषि विभाग ने इस खर्च का आंकड़ा 300/- रु प्रति रनिंग मीटर रखा है और इस पर 50 प्रतिशत की छूट किसानों को फिलहाल उद्यान विभाग से मिलने वाली है, पहले आओ पहले पाओ। जिले में लक्ष्य को बढाईऐ
@AgriGoI आपके मप्र के ही किसान हैं शायद नरसिंहपुर जिले के श्री गुलाबसिंह राव लोधी जी, दलहन खेती के अग्रणी किसान, कृपया🙏 इस बैठक में उन्हें अवश्य ही आमंत्रित किजिए, सादर धन्यवाद🙏