@Adv_RPSingh04 इनको 2/12/24 सुबह 10 बजे से अभी (5/12/25) तक वही थाने में ही रखा हुआ है,और थाने में अभी तक क्यो रखा हुआ है इसकी पुलिस कोई लिखित जानकारी नहीं दे रही है |
2/12/24 जयपुर पुलिस की गुंडागर्दी अभी तक जारी है... ना किसी को मिल्ने दिया जा रहा है और ना ही कोई जानकारी दी हे.
महाराणा राजसिंह जैसे वीर योद्धा के इतिहास को मिटाने का दुस्साहस?
राजसमंद ही नहीं, पूरा देश ऐसा अनादर कभी सहन नहीं करेगा।
मार्ग के नाम परिवर्तन का यह काला तथा दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
महाराणा राजसिंह का जयघोष सदैव गूंजता रहेगा। 🚩🚩
.@RajCMO@KumariDiya@BjpMahimakumari@DmRajsamand
राजस्थान पुलिस का अत्याचार – शादी के दिन हिरासत में लिए गए सम्मानित नागरिक और उनके अधिकारों का उल्लंघन...
क्या यह हमारे नागरिकों के मौलिक अधिकारों के साथ न्याय है...? 02/12/2025 सुबह 10 बजे राजस्थान पुलिस ने 7 लोगों – दूल्हा, उनके पिता और दुल्हे का जीजा और 4 अन्य मेहमानो को जो शादी में आये थे को हिरासत में लिया... केवल इसलिए कि उनके रिश्तेदार, जिन्हें माननीय उच्च न्यायालय से (29/11/25 शाम 5 बजे से 4/12/25 शाम 5 बजे तक) कानूनी पैरोल मिली थी, जेल से पैरोल होने के बाद घर नहीं लौटे...
इन सब की हिरासत (02/12/25 को ही ) सुबह 10 बजे, रिसेप्शन के ठीक पहले, जबकि मेहमान आने वाले थे, की गई...
हिरासत में लिए गए लोगों में एक सेवानिवृत्त भारतीय सेना का अधिकारी और एक रेलवे कर्मचारी भी शामिल हैं। उन्हें जयपुर के झोटवारा पुलिस स्टेशन (राजस्थान) में गैरकानूनी रूप से हिरासत में रखा गया है....
यह कार्यवाही कानूनी दृष्टि से पूरी तरह गलत मानी जा रही है...कुछ बिंदु इस प्रकार हैं..:
पैरोल एक कानूनी अधिकार है...: किसी व्यक्ति को हाईकोर्ट द्वारा पैरोल पर छोड़ा गया है, इसका मतलब है कि उसे अधिकार प्राप्त है कि वह निर्दिष्ट अवधि के भीतर अपने निर्धारित स्थान पर रहे.... अभी पैरोल की अवधि पूरी भी नहीं हुई थी, इसलिए उसके अभाव को परिवार या रिश्तेदारों पर आरोप लगाना कानून के खिलाफ है...
गैरकानूनी हिरासत: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है... किसी को बिना उचित प्रक्रिया के हिरासत में लेना अवैध और मनमाना है....
दायित्व केवल आरोपी का: पैरोल पर रहने वाले व्यक्ति की गैरमौजूदगी के लिए परिवार या अन्य रिश्तेदार जिम्मेदार नहीं ठहराए जा सकते... कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि केवल आरोपी ही जवाबदेह है, परिवार या अन्य नागरिकों को परेशान करना अपराध है...
सार्वजनिक सेवकों के साथ अन्याय: हिरासत में लिए गए लोग सम्मानित और ईमानदार भारतीय नागरिक हैं, जिन्होंने देश और समाज की सेवा की है... उनका इस तरह परेशान होना सामाजिक और नैतिक दृष्टि से भी अनुचित है....
कानूनी विशेषज्ञ इसे गैरकानूनी और मनमाना कदम मान रहे हैं। परिवार ने इसे अवैध बताया है, और पुलिस ने अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है...
हम सभी से अपील है – इस अन्याय और सरकारी अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाएँ और इसे साझा करें.... यह केवल एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि हर नागरिक के अधिकारों और कानून के शासन का सवाल है....
@PoliceRajasthan@India_NHRC@RajCMO@PMOIndia@narendramodi
@Bhupesh@JitendraSAlwar Itne sare paise leta hai ticket ke naam pe garh palace ka manager kaha bhejta hai sare paiso ko kaam to kuch karwata nhi hai , jeetu bhagao bundi bachao