आज मजदूर दिवस के उपलक्ष में मु��े रामधारी सिंह "दिनकर" जी ये कविता याद आयी, ये कविता हमारे समाज का मजदूरों के प्रति दृष्टिकोण को दर्शाता है....
मैं मजदुर हूँ, मुझे देवों की बस्ती से क्या?
मैं मजदुर हूँ मुझे देवों की बस्ती से क्या!
अगणित बार धरा पर मैंने स्वर्ग बनाये,
@DC_Palamu महोदय ऑनलाइन पढ़ाई तो शुरू हो गया है,परंतु किताबे उपलब्ध नहीं होने के चलते ��च्चों को काफी परेशानी हो रही है ,अतः महोदय से निवेदन करना है किताबे भी उपलब्ध कराने की कृपा की जाय 🙏