मैं निराशावादी नहीं हूँ, लेकिन ये झूठी आशा भी नहीं रखता कि फिर कभी कोई लता मंगेशकर इस धरती पर जन्म लेगी. ऐसे चमत्कार दोहराने में प्रकृति भी अक्षम है. अलविदा दीदी. आज आँखें नम हैं, लेकिन मैं जीवन भर ये सोचकर मुस्कराता रहूँगा कि मेरी क़लम से निकले पहले गीत को दीदी ने आवाज़ दी थी