वोट की ताकत देखो -
नये यूपी के सीएम सडकों पर “इफ्तार पार्टी” नहीं करते , नवरात्रि में “माँ दुर्गा की पूजा” करते हैं।
सीएम योगी जी ने कलश स्थापित कर विधि विधान से माँ दुर्गा का पूजन किया।
We don't shut down hospitals for doctors to take vacations
We don't shut down police department for cops to take vacations
Why do we then shut down courts for the Judges to take vacations
WELL SAID @sanjeevsanyal 👏
Axis Bank is Celebrating Navratri with Santa Claus
Heights of demeaning a Hindu Festival
@AxisBank - Retract this Ad immediately or face Boycott Calls!
RT Max Guys! Axis Bank needs to be taught a lesson
Hello BSD के @AxisBank
ये तुम्हारे ऐड में नवरात्रि का पर्व है
और तुम इसमें संता घुसेड़ रहे हो भेंचो दोगले...
इसे समय रहते हटा दो.. वरना ऐसी धज्जियाँ
उड़ेंगी कि खुद तुम्हारी औलादें Axis बैंक से खाते बंद करा लेंगी...
Repost & Tag Axis बैंक हिन्दुओं ✊
📍 "Two-tier judiciary"
#Abolish_Collegium_System
भारत में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी-बड़ी बेंच तो बनती जा रही हैं—5 जज, 3 जज, 11 जज की—but आज तक इस बुनियादी सवाल पर कोई गंभीर बहस नहीं हुई कि #Minority कौन कहलाएगा❓
➡️ क्या भारत की भाषाओं को आधार बनाया जाएगा, या विश्व की 6,000+ भाषाओं को भारत में माइनॉरिटी का दर्जा मिलेगा❓
➡️ क्या लिंग के आधार पर माइनॉरिटी तय होगी❓
➡️ क्या भारत में जन्मे धर्मों के आधार पर माइनॉरिटी परिभाषित होंगे, या फिर दुनिया के 1,100 धर्मों को भारत में मान्यता मिलेगी❓
फिर यह भी तय होना चाहिए—
👉 माइनॉरिटी की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर होगी❓
👉 या राज्य स्तर पर❓
👉 या ज़िला स्तर पर❓
और यह परिभाषा क्या होगी—
संख्या के आधार पर, या प्रतिशत के आधार पर❓
यदि प्रतिशत आधार पर होगी तो—0.5% वाला माइनॉरिटी कहलाएगा, 1% वाला या 2% वाला❓
आज तक इस मुद्दे पर न संसद में बहस हुई, न सुप्रीम कोर्ट में, न ही UPSC/IAS के सिलेबस में कोई स्पष्ट परिभाषा दी गई।
मैं माननीय सुप्रीम कोर्ट से निवेदन करता हूँ कि—
👉 सबसे पहले "माइनॉरिटी" की स्पष्ट पहचान और गाइडलाइन तय की जाए।
हालाँकि यह कार्य संसद और केंद्र सरकार का है, क्योंकि—
📌 नेशनल माइनॉरिटी कमिशन एक्ट और माइनॉरिटी एजुकेशन एक्ट संसद द्वारा बनाए गए कानून हैं।
इसलिए यह ज़िम्मेदारी संसद और सरकार की है कि तय करें—
✅ राष्ट्रीय स्तर पर माइनॉरिटी देखी जाएगी❓
✅ राज्य स्तर पर❓
✅ या ज़िले के स्तर पर❓
और वह संख्या क्या होगी—सैकड़ा, हज़ार, लाख, दस लाख या करोड़❓
आदरणीय @AshwiniUpadhyay जी @HMOIndia@PMOIndia
Do you think we need to have a strict framework to deal with those who insult our Gods, culture and nation, particularly those sitting in important positions?
उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश साहब ने खजुराहो के भगवान विष्णु मूर्ति के बारे में टिप्पणी कर दी और कह रहे हैं कि मेरी बातों को गलत तरीके से उद्धृत किया गया। लेकिन अभी हाल ही में मेहरौली में आशिक अल्लाह दरगाह और बाबा फरीद के चिल्लगाह के बारे में आदेश दिया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया न केवल इस संरक्षण दे बल्कि इसे इसके भग्नाववशेषों की मरम्मत करवायें। ध्यान रखने की बात है कि ये दोनों स्थान या दोनों मजार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तहत संरक्षित नहीं थे। इसके याचिकाकर्ता जमीर अहमद। इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने उन्हें नहीं कहा कि आप अल्लाह के पास जाइए और दुआ करिए।
अब पता चला है कि इसी सुप्रीम कोर्ट ने ही अगस्त में ही ASI को आदेश दिया था कि दिल्ली स्तिथ दो मजारो की मरम्मत कराए। ये दोनों मजार ASI द्वारा संरक्षित मोनुमेंट्स की लिस्ट में भी नहीं है। याने ASI को उन मजारो पर पैसा खर्च करने का अधिकार ही नहीं है। याने सुप्रीम कोर्ट ने पब्लिक मनी खर्च करने का आदेश दिया जिसकी सुप्रीम कोर्ट को कोई अथॉरिटी नहीं है। ये केवल संसद कर सकती है।
सत्य यही है कि भारत एक इस्लामिक देश है जिसमें हिंदू जज़िया देने के लिए रहते है।
और भारत का हिंदू शासक वर्ग आज भी वही intermediary है जो पिछले एक हज़ार साल से था। याने भारत का हिंदू शासक वर्ग आज भी मुसलमानो/ईसाईयो की सेवा करता है और हिंदुओं का खून चुसता है, उन्हें अपमानित करता है।
1. That is the power of mental chains of slavery. Slaves remain slaves even when the enslavers are long gone.
2. Wise enslavers always appoint intermediaries from among the slaves only to control the slaves. They are the best slave controllers.
आज यह कहते हुए गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ ...
भगवान विष्णु के अपमान पर कम से कम एक महामंडलेश्वर की प्रतिक्रिया तो आई..
इससे पहले तो जो बड़े बड़े बाबा है वो लेटर लिख कर अपना कर्तव्य पूरा कर रहे थे…
बिना शर्त माफ़ी मांगे गवई नहीं तो पूरा संत समाज उतरेगा सड़को पर
भारत के मुख्य न्यायाधीश श्री गवई को पूरे हिंदू समाज से माफ़ी माँगनी चाहिए । जो उन्होंने बोला वह निहायती घटिया और बदजुबानी है । इससे बड़ा हेट स्पीच क्या हो सकता है ? नूपुर शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट को जरा अपनी ही टिप्पणी याद करनी चाहिए । क्या इसलिए हिंदुओं को अपमानित किया जाता है क्यों कि हिंदू सर तन से जुड़ा के नारे लगाता हुया सड़कों पर नहीं उतर आता ? हाय रे हमारे संत महंत और कथा वाचक ! सबके गले सूखे हुए है ।
आज देश के CJI सामने आए और भगवान विष्णु पर की गई टिप्पणी पर कहा की “वे सभी धर्मो का सम्मान करते हैं”।सोशल मीडिया का नाम लेकर मामले को दबाने की कोशिश की गई।
मैं उनके कथन से संतुष्ट नहीं हूँ और आप भी संतुष्ट नहीं होंगे। मेरा मानना है की यदि उन्होंने जो शब्द समाचारो में प्रकाशित किए गए वो नहीं कहे तो उन्हें आदेश पारित कर उन शब्दों को हटाने की बात की जानी चाहिए थी और यदि कहे है तो शब्दों को वापस ले कर सभी हिंदुओं से माफ़ी माँगनी चाहिए:-विनीत जिंदल, अधिवक्ता