मेरे जूते तो आ ग��� तेरे पैरों में, मेरे बच्चे
अब फट भी गए तो घर के बाहर रखने हैं
के कल कोई मुसीबत भी आये तेरे लिए
जूते देख के लौट जाए के तेरा बाप घर पे है
~ हर्ष बशर
#खुदशायर
मैं कौन हूं
मैं मौन हूं
मौन जब कहे नहीं
न जानिए सहे नहीं
ये रुक गया है बांध सा
सौ गनीमतें बहे नहीं
चुप जब ये है खड़ा
ये मौन चुप से भी बड़ा
न जनिए लाचार है
ये मौन भी प्रहार है
ये मौन ने चुना है ख़ुद
नहीं के बोलना है खुद
नहीं किसी सज़ा से है
ये म���न इक वजह से है
...
~हर्ष बशर
ये रोकता भी खुद को है
ये सोचता भी खुद को है
सोचने ने के बाद भी
ये तोलता भी खुद को है
ये मौन की हैं आदतें
या शोक हों, शिकायतें
हों नफ़रतें या चाहतें
जख्म हों या राहतें
पहाड़ है ढहता नहीं
सागर है ये बहता नहीं
खुद को भी सहता नहीं
बस बोल के कहता नहीं
...
~ हर्ष बशर
त���रा मेरी बात पे एतबार कर आने से
एक जिंदगी जी गया मैं इस बहाने से
तेरे शिकवों की क्या शिकायत मैं करुं
और संवर गया मैं तेरे आज़माने से
~ हर्ष बशर
#बशर #खुदशायर
@NeerajManr58486@kotak811 It's down right now. I am unable to make a transfer.
@kotak811 i have faced this multiple times in past 1 month. You are losing trust. One more time and I am pulling funds out.
किसी हिचकिचाते हुए, अंजाम की तरह
सुर्ख़ लिबास में बैठी है, वो शाम की तरह
सरक रही है शब और, नमीं उन आंखों की
के बन रही है "शबनम", उस���े नाम की तरह
~ हर्ष बशर
#बशर #खुदशायर