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@RailMadad@RailMinIndia
हम सब क्रिकेट क्रिकेट करते रह गए…
और हमारे एक क्लब के 11 लड़कों ने लीवरपूल को 6-0 से हरा दिया…!!
वो लीवरपूल जो क्लब फुटबॉल पर राज करता है…
और दूसरी तरफ़ हमारा Minerva Fc क्लब जिसके आधे से ज़्यादा लड़के पहली बार विदेश गए थे…
सेल्यूट है इन 11 लड़कों को और इनके कोच रणजीत बजाज को…!!!
ये आंसू सैलाब लाएंगे, मोदी सरकार को उखाड़ फेकेंगे
"5 दिन से घर में LPG सिलेंडर नहीं है , बाहर लेने गया तो 300 रूपये किलो गैस मिल रही है , मैं सुबह से भूखा प्यासा सिलेंडर लेने के लिए खड़ा हुआ हूं , चाय नाश्ता कुछ नहीं किया"
कुणाल कामरा इन दिनों कमाल का काम कर रहे हैं...कुणाल देश के फ्रीडम फाइटर को रोचक तरीके से Gen Z से रुबरू करवा रहे हैं...महात्मा गांधी और पंडित नेहरू के बाद अब अब्दुल गफ्फार खान से मिलिए...
गणपति ट्यूबवेल और श्याम ट्यूबवेल से आगे जाँच कब बढ़ेगी? या फिर अलग–अलग एजेंसियों से हर बार वही स्क्रिप्ट दोहरवाई जा रही है ताकि सवा दो साल बाद भी कोई सरकार से काम का हिसाब न पूछ सके? पाँच साल अगर सिर्फ़ पकड़ा-धकड़ी में ही निकाल देने हैं, तो काम आखिर कब होगा?
पेपर-लीक की तरह यहाँ भी पिछले 15 साल से फ़र्ज़ी अनुभव-पत्रों और फ़र्ज़ी बैंक गारंटियों का खेल चलता आया है बस फ़र्क़ इतना कि किसी ने फ़र्जीवाड़ा पहले किया, किसी ने बाद में। और जब पहले वाला बाद वाले की शिकायत कर देता है, तो बात खुल जाती है वरना सब स्मूथ चलता है।
OMR शीट फर्जीवाड़ा, पेपर लीक का दर्द अभ्यर्थी, अभ्यर्थी के माता-पिता और गुरुजी से ज्यादा कोई समझ नहीं सकता...
बहुत खूब @alokrajRSSB जी
(ईमानदारी के नाते आप अपने पद से इस्तीफा दे दो)
आप बोर्ड के अध्यक्ष हैं जो 2023 को बन गए और आपको पता भी नहीं चला गजब की कार्य प्रणाली है आपकी भी
ये बच्चा सिंगरौली मध्यप्रदेश का बताया जा रहा है जो दोनों पैरो के काम नहीं करने के बावजूद इतना जोखिम भरा कार्य कर रहा है जो जानलेवा हो सकता है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने जिले में बाल अधिकारों और आदिवासी कल्याण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो के कैप्शन के अनुसार यह बच्चा ग्राम मुड़वनिया, ग्राम पंचायत बरहपान, जिला सिंगरौली का है और बैगा जनजाति से संबंध रखता है। बताया जा रहा है कि बच्चे की उम्र लगभग 12 वर्ष है। वीडियो सामने आने के बाद बाल-श्रम, शिक्षा के अधिकार और आदिवासी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है। अनुसूचित जनजाति के बच्चों के लिए सरकार द्वारा विशेष योजनाएँ और संरक्षण के प्रावधान मौजूद हैं। इसके बावजूद इस तरह के दृश्य प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करते हैं। आपको क्या लगता है कि भारत मे जनजाति कल्याण और विकलांगो के कल्याण के नाम पर चलने वाली संस्था क्या सिर्फ नाम के लिए ही है
अभी हाल ही कुछ दिनों पहले मैंने अपने पिता को खोया है, एक पुत्र द्वारा इस पीड़ा को सहन कर पाना अत्यंत दुःखद होता है। इस दौरान पूरा नागौर एवं मारवाड़ मेरे इस दुख की घड़ी में मेरे साथ खड़ा रहा लेकिन मेरा अपना परिवार सिवाय दाह संस्कार के पश्चात नदारद रहा। सुना था कि दुख की घड़ी में दुश्मन भी साथ देते हैं लेकिन मेरे अपनों ने मुझे अकेला छोड़ दिया। कल मैंने अपने पिता की समाधि हमारे पारिवारिक समाधि स्थल जहाँ मेरी परदादी स्वर्गीय गोगी देवी मिर्धा जी (1982), मेरे बड़े भाई स्वर्गीय रवि मिर्धा जी(1987), मेरे दादाजी स्वर्गीय नाथू राम मिर्धा जी(1996) इन सभी की समाधि स्थित है, उनके बगल में ही अपने पिताजी स्वर्गीय भानु प्रकाश मिर्धा जी की समाधि का निर्माणकार्य शुरू करवाया। कार्य चल ही रहा था जिसे पुलिस ने आकर बीच में ही रुकवा दिया क्योंकि मेरी बहन ज्योति मिर्धा ने समाधि स्थल को अपनी निजी संपत्ति बताते हुए समाधि स्थल पर अपना दावा जताया तथा आनन फानन में मुझ पर एक सरासर झूठा और मनगढ़ंत आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज करवाया। जिस व्यक्ति के माध्यम से मुझ पर यह मुकदमा दर्ज करवाया जब उसने उस पत्र को पढ़ा और समझा तब उसने तुरंत ही मुकदमा वापस ले लिया। उसके बाद इन्होंने प्रेमप्रकाश मिर्धा जिनका नाथूराम जी मिर्धा के वारिसों से कोई लेना देना नहीं है, उन द्वारा मुझ पर दोबारा मुकदमा दर्ज कराया गया है। निर्माणकार्य रुकवा कर समाधि स्थल पर पुलिस द्वारा ताला जड़ रात भर पहरा दिया गया। ऐसे गमगीन माहौल में मैंने भी पुलिस प्रशासन को पूर्ण सहयोग किया तथा किसी भी प्रकार की अनावश्यक घटना होने से परहेज किया।
आज दिन में जब मैंने अपने पिता की समाधि स्थल पर जाने का प्रयास किया तो पुलिस द्वारा मुझे जबरन रोका गया तथा मुझसे ज़मीन संबंधी कागजात मांगे गए। पूर्व में जब हमारा और ज्योति जी के परिवार का संपत्ति बंटवारा हुआ था उस समय समाधि स्थल को दोनों परिवारों का साँझा समाधि स्थल होना तय हुआ था। हमने बाबा के समाधि स्थल के लिए रास्ता भी रखा जिससे हम हर साल बाबा की पुण्यतिथि पर जाते हैं और लोग भी बाबा की समाधि पर जाते हैं। तब हमने यह भी कहा कि यदि इस समाधि स्थल के बदले में आप को हमारी कोई ज़मीन चाहिए तो हम दुगुनी ज़मीन देने को तैयार हैं लेकिन तब ज्योति जी और बड़ी माँ स्वर्गीय वीणा मिर्धा जी ने इंकार करते हुए कहा कि हम इतने गए बीते नहीं कि पारिवारिक समाधि स्थल के एवज में आपसे ज़मीन लेंगे। उस वक्त जो हुआ वह सामान्य रूप से हर परिवार में होता है...आपसी सहमति। ऐसा मानकर हमने कभी इस विषय को दोबारा उठाना उचित नहीं समझा। लेकिन अब मेरे स्वर्गीय पिता की समाधि निर्माण को ही निजी संपत्ति होने के नाम पर रोका जा रहा है। क्या 'बाबा' स्व नाथूराम मिर्धा जी की समाधि किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति हो सकती है...??
इन 15 दिनों में मैंने कई मानसिक प्रताड़नाएं सहन की। उसे मैं इस वीडियो के माध्यम से आप सबके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ। मैंने अपना फ़र्ज़ निभाते हुए एक पुत्र को उनके पिता के साथ, एक पोते को उनकी दादी के साथ और एक पिता को उनके पुत्र के साथ इस सांसारिक जीवन के बाद इकट्ठा करने का काम किया है। यदि मेरा यह कृत्य इंसानी भावना के विरुद्ध है तो मैं एक गुनहगार हूँ, ईश्वर मुझे न्याय दे।
@BhajanlalBjp@bhajanlaloffice
RPSC के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा द्वारा ED की पूछताछ में RPSC का सदस्य बनने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी एक कांग्रेसी नेता को पैसे देकर डील करना स्वीकार किया गया है,यह तथ्य प्रमाणित करना है कि तंत्र में भ्रष्टाचार की जड़े कितनी गहरी है,मैं मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp
जी को कहना चाहता हूं कि आपने कहा था मगरमच्छों को पकड़ेंगे,आखिर बड़े मगरमच्छों पर
कब कार्रवाई होगी ?
@RajCMO
जब रेप दोषियों को राहत मिलती है,तो डर सिर्फ एक परिवार में नहीं पूरे समाज में फैलता है।आज पीड़िता सड़कों पर है —और सवाल सिस्टम से है।
#JusticeForUnnaoVictim
अगर अरावली टूटी,तो कल कुएँ सूखेंगे,
तापमान बढ़ेगा, और आने वाली पीढ़ियाँ हमें माफ़ नहीं करेंगी।
यह लड़ाई सरकार बनाम जनता की नहीं है,
यह लड़ाई लालच बनाम जीवन की है
लालची नेताओं के लिए इसी प्रकार का जवाब तैयार रखे ।
#अरावली_बचाओ