@BharatDosi2@Kapil_Jyani_ भारत जी, चार यूनिवर्सिटियों में 25 साल से “एक भी विद्यार्थी नहीं” वाला आंकड़ा कहाँ से लाए—किसी WhatsApp यूनिवर्सिटी से? 2025–26 में भी विश्वविद्यालयों में B.A./M.A. राजस्थानी के आधिकारिक पाठ्यक्रम चल रहे हैं। पहले वर्षवार नामांकन डेटा दीजिए, फिर ज्ञान बाँटिए
@BharatDosi2@Kapil_Jyani_ पहले जनाब आप राजस्थानी को मान्यता तो दिलवाए
हर एग्जाम में हर कम्पटीशन में रखिये कि कोई भी भाषा के रूप में पंजाबी ,सिंधी, उर्दू की तरह राजस्थानी भी ले सकता हैं l
स्कूलों में 3rd Language के रूप म राजस्थानी का option दीजिए
और फिर ये सवाल पूछिएगा कि कितने बच्चे पढ़ते हैं राजस्थानी
Honorable Governor @BagadeHaribhau ,
please do not be cynical and narrow-minded.
इस मुगालते में ना रहें कि संवैधानिक हदों का अतिक्रमण करके आप अपनी मनमर्जी 9 करोड़ राजस्थानियों पर थोप देंगे।
हम जानते हैं कि हमारी सरकार में बैठे रहनुमाओं में अब रीढ़ की हड्डी नहीं बची है। वरना राजस्थानियों पर मराठी थोपने की आपकी सनक का अब तक कतरा - कतरा दास्तान हो जाती।
गवर्नर साब, आप वायसराय बनना चाहते हैं। आप मैकाले और कर्ज़न के माफिक काम कर रहे हैं। लेकिन ऐसा करके आप राजस्थान की धरती से सम्मान लेकर नहीं जाओगे।
अगर आपके हिये का राम जिंदा होता तो 9 करोड़ कंठो की राजस्थानी भाषा के साथ इंसाफ करते लेकिन आप हद दर्जे की संकीर्णता से भरे हुए सफेदपोश व्यक्ति हैं जो संवैधानिक पद पर बैठ गए हैं।
एक सदी पहले राजस्थान की धरती ने भी एक बेटा जमनालाल बजाज महाराष्ट्र भेजा था जो आपसे ज्यादा काबिल था। जमनालाल बजाज ने महाराष्ट्र में रहकर आपके लोगों की सेवा की थी। समाज सुधारक बनकर नाम और शोहरत कमाई थी। खुद की सनक और संकीर्णता मराठा भाषी लोगों पर नहीं थोपी थी।
आपको हमारे उस काबिल और महान राजस्थानी बेटे से कुछ सीख लेकर राजस्थान आना था।
हमारी सहिष्णुता का नाजायज फायदा उठाया जा रहा है। अगर कोई गवर्नर महाराष्ट्र के लिए ऐसा फैसला कर दे अब तक राजभवन के सामने कर्फ्यू लग चुका होता।
किसी एक चुनिंदा विवादित क्लिप निकाल लेने से किसी के व्यक्तित्व का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता
कर्नल केशरी सिंह किसे समाज कहते हैं यह जानने के लिए एक बार यह वीडियो सुनना चाहिए
एक दलित परिवार जब ये कह दे कि रविंद्र सिंह भाटी हमारे लिए भगवान हैं तो समझ लो उस बंदे की क्या अहमियत होगी 🙏
दलित जैसाराम मेघवाल के परिजनों ने भाटी को लेकर क्या कहा सुनिए !!
@RavindraBhati__
शिव विधानसभा के लोकप्रिय विधायक श्री @RavindraBhati__ लगातार जनता के बीच रहकर क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं. कुछ समय पहले बाड़मेर पुलिस के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह जानकारी साझा की गई थी कि उनकी सुरक्षा में एक PSO तैनात है, लेकिन वर्तमान में विधायक जी को अधिकांश दौरों पर अकेले देखा जा रहा है..
हम @RajCMO सरकार से मांग करते हैं कि विधायक रविन्द्र सिंह भाटी की सुरक्षा व्यवस्था की तत्काल समीक्षा कर उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए... जनप्रतिनिधि की सुरक्षा केवल एक व्यक्ति का विषय नहीं, बल्कि लाखों लोगों की भावनाओं और उनके लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा मामला है....
साथ ही, उनके PSO रहे तखत सिंह जी को बिना किसी ठोस कारण के निलंबित किए जाने की चर्चाएं सामने आई हैं। यदि ऐसा है, तो उनके निलंबन की निष्पक्ष समीक्षा कर उसे तत्काल निरस्त किया जाए तथा उन्हें पुनः विधायक जी की सुरक्षा में नियुक्त किया जाए....
जनता के बीच सक्रिय रहने वाले, हर वर्ग की आवाज़ उठाने वाले जनप्रतिनिधि की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है. सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता.
जनहित में हमारी मांग है विधायक रविन्द्र सिंह भाटी को शीघ्र पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाए और उनके PSO तखत सिंह जी को तत्काल बहाल किया जाए...
@BhajanlalBjp@RajCMO@RavindraBhati__@gssjodhpur@1stIndiaNews@TheKhatak@ashok_Jodhpurii@8PMnoCM
साहब, हमने तो पूरा घटनाक्रम देखा ही नहीं। प्रदर्शन स्थल पर 250-300 पुलिसकर्मी मौजूद थे, फिर कार्रवाई केवल एक कांस्टेबल पर ही क्यों? क्या बाकी सभी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे और केवल वही दोषी था?
जनता के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि कहीं यह कार्रवाई निष्पक्ष प्रशासनिक निर्णय न होकर किसी विशेष व्यक्ति को निशाना बनाने का प्रयास तो नहीं। यदि ऐसा नहीं है तो फिर चयनात्मक कार्रवाई के पीछे वास्तविक कारण क्या है?
जिस कर्मचारी ने लगभग ढाई वर्षों तक पूरी कार्यप्रणाली को निकटता से देखा, समझा और जिम्मेदारी निभाई, उसे अचानक हटाने का निर्णय कई सवाल खड़े करता है। क्या यह प्रशासनिक आवश्यकता थी या फिर द्वेषपूर्ण मानसिकता का परिणाम? किसी व्यक्ति को बार-बार हटाना, लगाना और फिर हटाना केवल प्रशासनिक अस्थिरता ही नहीं दर्शाता, बल्कि संबंधित व्यक्ति को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने जैसा भी प्रतीत होता है।
रोज-रोज की यह नौटंकी आखिर कब तक चलेगी? कभी हटाओ, कभी लगाओ, फिर हटाओ और फिर लगाओ। यदि यही व्यवस्था है तो इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?
युवा शक्ति इतना अवश्य कहना चाहती है कि जिन लोगों को अन्यायपूर्वक निशाना बनाया जा रहा है, उनकी सुरक्षा और सम्मान के लिए समाज स्वयं खड़ा होना जानता है। प्रशासन का दायित्व निष्पक्षता है, पक्षपात नहीं। जनता सब देख रही है और हर प्रश्न का उत्तर समय अवश्य मांगेगा।
@PoliceRajasthan@Barmer_Police@RajCMO