नेता का पढ़ा लिखा होना बहुत ज़रूरी है। नेता को कभी इतिहासकार बनने की कोशिश नहीं करना चाहिए, ज़रा सा फैक्ट इधर से उधर हुआ तो वही नेता मजाक का पात्र बन जाता है। यूपी के मुख्यमंत्री @myogiadityanath ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर को लेकर जो टिप्पणी की थी उस पर @asadowaisi ने ऐसे ऐतिहासिक तथ्य सामने रखे हैं, जिससे BJP/RSS के लोगों का बिलबिलाना तय है।
ओवैसी ने अपने भाषण में एक और तथ्य रखा कि @RSSorg के संस्थापक केशवराव बलिराम हेडगेवार सिर्फ एक बार जेल गए, और वो भी तब जब उन्होंने ख़िलाफ आंदोलन में भाषण दिया था।
मशहूर शायर और लेखक जावेद अख्तर साहब बड़ी दिलचस्प बात बता रहे हैं
@Javedakhtarjadu साहब का कहना है कि मुस्लिम लीग और आरएसएस और हिंदू महासभा इन तीनों की विचारधारा एक ही थी,
ये तीनों हमख्याल संघठन हैँ,
ये तीनों भारत छोड़ो आंदोलन के खिलाफ थे
जिन्ना और सावरकर दोनों अंग्रेजों के वफ़ादार थे,
यह तीनों गांधी जी से नफरत करते थे
पूरा सुनिए,
@SushantBSinha सुशांत भाई छात्र आंदोलन को कवरेज करने के जुर्म में रांची पुलिस नहीं ले गई है।
सावन में अंडे खाने के जुर्म में रांची पुलिस थाने ले गई है।
बजरंग दल के हत्थे चढ़ जाता तो और ज्यादा परेशानी मे पर जाता बेचारा शुक्र मनाओ रांची पुलिस का।
अन्याय के खिलाफ लड़ाई में छात्र अकेले नहीं हैं ✊
📞 9811867474 पर मिस्ड कॉल दें, अगर पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने पर आपको👇
⦿ पुलिस नोटिस मिला है
⦿ हिरासत में लिया गया है
⦿ पूछताछ के लिए बुलाया गया है
⦿ लीगल कार्रवाई का सामना कर रहे हैं
⦿ BJP या राइट विंग समर्थक धमका रहे हैं
⦿ आपका ऑनलाइन उत्पीड़न किया जा रहा है
आप अपनी शिकायत-परेशानी साझा करने के लिए नीचे दिए गए QR कोड को भी स्कैन कर सकते हैं।
युवाओं और विद्यार्थियों के भावनाओं का इतना सम्मान होता तो NEET पेपर लीक के बाद जब 21 बच्चों के आत्महत्या कर ली तभी शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए था।
लाठी डंडों से पिटवा कर जब कोई चारा नहीं चला तो इस्तीफा देना पड़ा क्या यही भावनाओं का सम्मान है
युवाओं और विद्यार्थियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। श्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा इस बात का प्रमाण है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और हमारी सरकार के लिए हमारे विद्यार्थियों और युवाओं की भावनाओं का सम्मान और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिये प्रतिबद्धता सर्वोपरि हैं।
NEET परीक्षा, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों को लेकर विद्यार्थियों के मन में जो भी चिंताएँ हैं, उनका पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ समाधान किया जा रहा है।
विद्यार्थियों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना, उनका समाधान सुनिश्चित करना और उनमें यह विश्वास बनाना कि उनकी आवाज़ सुनी जाएगी और उनकी सभी समस्याओं का समाधान होगा, यही हमारी प्राथमिकता है।
मुझे विश्वास है कि अब हमारे युवा और विद्यार्थी पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी पढ़ाई, अपने सपनों और अपनी आकांक्षाओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे और एक सशक्त, समृद्ध एवं विकसित भारत के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
केंद्रीय मंत्री के रूप में श्री धर्मेंद्र प्रधान जी का कार्यकाल भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के प्रति उनके समर्पण का परिचायक रहा है। सार्वजनिक जीवन में उनका योगदान समावेशी, दूरदर्शी और नए भारत की आकांक्षाओं के अनुरूप रहा है।
देश ये भी जानना चाह रही है इन गुंडों पे क्या करवाई की गई?
अगर इस तरह से ये सड़क छाप गुंडे मवाली स्टूडेंट्स से टकराते है उसके बाद रोना रोने से कोई फायदा नहीं
मैं जानता हूँ कि पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है। लाखों विद्यार्थी और उनके अभिभावकों के लिए बहुत ही पीड़ादायक है। और इसलिए, पेपर लीक की घटना से अब तक पिछले ढाई महीनों में अनेक कदम उठाए गए। गुनहगारों को पकड़ा गया है, वे जेल में पड़े हैं।
सरकार ने अपनी पूरी शक्ति का उपयोग करके कम से कम समय में 22 लाख विद्यार्थियों के एग्जाम हो जाएं, इसका प्रबंध किया। और अभी पांच-छह दिन पहले 19 तारीख को रिजल्ट भी आ गया। और देश भर में उत्तीर्ण हो गए विद्यार्थियों की खुशियों की खबरें भी आ रही हैं।
लेकिन हम यहां पर संतोष मानने वाले लोगों में से नहीं हैं, और इसलिए मैंने आज फास्ट-ट्रैक कोर्ट के लिए विभागों को निर्देश दिए थे। आज विभागों ने लगातार मेहनत करके देर रात मुझे मसौदा भी दे दिया। फास्ट-ट्रैक कोर्ट और कठोर सजा के प्रावधान वाले इस मसौदे पर कल कैबिनेट में चर्चा होगी। कैबिनेट के साथियों के सुझाव के बाद उसका अंतिम रूप दिया जाएगा। और सोमवार से संसद का दूसरा सप्ताह शुरू हो रहा है, तब जल्द-से-जल्द इस बिल को सदन में पारित कराने का प्रयास किया जाएगा।
- प्रधानमंत्री श्री @narendramodi का NEET पेपर लीक पर देश के नाम जरूरी संदेश
अगर आपको लगता है कि आप पत्रकारों के साथ बदसलूकी करेंगे और हम चुप रहेंगे,
तो आप ग़लतफ़हमी में हैं.
महिला पत्रकारों के साथ जितना गंदा व्यवहार हुआ है, वो हम सभी को शर्मिंदा करता है.
भीड़तंत्र कभी भी लोकतंत्र नहीं हो सकता-
@rajnathsingh@narendramodi देश की युवाओं की इतनी ही चिंता थी तो 21 दिनों में युवाओं से बात क्यों नहीं किया अप लोगों ने लाठी डंडों से पिटवा कर दूसरों के सर ठेकरा फिरने से युवाओं के हितैषी नहीं बन जाओगे आपलोग।
बिल्कुल लेनी चाहिए क्यों के उनलोगों के कारण आपके बेटे को परीक्षा सेंटर पहुंचने में देर हुई।
ईमानदारी से जवाब देना जितना आपको आपके बेटे की चिंता है उतना ही चिंता देश भर के छात्रों की भी है?
अगर है तो सरकार धरने पे बैठे युवाओं के दर्द को समझती तो ये नौबत ही नहीं आती।
मेरे सरकारी आवास सफदरजंग लेन के बाहर सड़क पर @RahulGandhi जी के धरने के कारण मेरे छोटे बेटे को परीक्षा सेंटर में आधे घंटे विलंब से पहुँचना पड़ा? शायद इसकी ज़िम्मेदारी @INCIndia पार्टी लेगी ?
प्रभु श्रीराम के मंदिर में हुए ज़मीन घोटाले से संबंधित 13 दस्तावेज मैंने SIT को दिया और भी काग़ज़ात देने के लिए समय माँग रहा हूँ।
ज़मीन के नाम पर चंपत राय गैंग ने सैकड़ों करोड़ का घोटाला किया है, अगर कार्यवाही नही हुई तो कोर्ट जाऊँगा।
देखिए नीतीश राजपूत की ये रिपोर्ट।
एक ही तरह के केस में दो अलग अलग फैसले
जज की कुर्सी पे बैठे लोगों के निष्पक्षता पे सवाल खड़ा करता है।
क्या कोर्ट सिर्फ मुसलमानों को सजा देने के लिए बनी है?
या देश का कानून सभी नागरिकों के लिया सामान है??
वाराणसी में बीजेपी पार्षद की नाव पर चिकन और शराब पार्टी करने वालों को 24 घंटे के अंदर वाराणसी कोर्ट से जमानत मिल गई !
मार्च में कुछ मुस्लिम युवकों ने भी नाव पर इफ्तार पार्टी की थी , जिसमें बिरयानी खाई गई थी ,
इस मामले में गिरफ्तार सभी लोगों की जमानत याचिका वाराणसी कोर्ट ने रद्द कर दिया था , और लगभग दो महीने जेल में रहने के बाद हाईकोर्ट से जमानत मिली थी !
हैं न देश की कानून व्यवस्था मजेदार !
दोनों ही घटना गाजियाबाद की है सोचिए गाजियाबाद पुलिस ने मुसलमानों के नरसंहार करने के लिए उकसाने वालों को खुली छूट।
और मुसलमान के कत्ल पे प्रदर्शन करने वालो को मां बहन की गालिया।
अब ये मुसलमान जाए तो कहां जाए
Location: Ghaziabad, Uttar Pradesh
“Islam ends with genocide; Whoever starts first will win..”
Extremist Anil Yadav, referring to the 1947 Partition, called for the genocide of Indian Muslims.
Newsclick पर झूठ बोलने वाले इस शख्स में इतनी भी हिम्मत नहीं की ट्रम्प की आलोचना तो दूर अमरीका का नाम भी ले सके . विदेशी साजिश पर इनकी प्रेस वार्ता याद है? यहां दिख रहा है- मगर ये कायर खामोश हैं . Shame on you Anurag