परीक्षा आगे क्यों बढ़ाई गई? नोटिस में केवल पुरानी और नई तारीखों के साथ एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के निर्देश दिए गए हैंविद्यार्थियों के साथ न्याय हैं दुर्धरा से विद्यार्थी रह रहा है उसको आर्थिक जोकिंग भी उठाना पड़ रहा है! @madandilawar @mgsu_bikaner @RajBhavanJaipur @GovindDotasra
जोहार,
आज खरसावां गोलीकांड की बरसी है। 1 जनवरी 1948 को खरसावां हाट में अपनी स्वायत्तता की माँग करने वाले निर्दोष आदिवासियों पर निर्ममता से गोलियाँ बरसाई गईं थी, जिसमें हजारों लोग शहीद हुए थे।
अपनी अगली पीढ़ी को इन शहीदों के बारे में बताइए। यही इनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कैप्टन साहब चंपाराम जी फौजी के स्वर्गवास से समाज ने अपना एक मजबूत स्तंभ खो दिया। शेरगढ़ सोलंकिया तला, पूरा क्षेत्र शोक में डूबा है। समाज के भामाशाह, आर्थिक आधार और प्रेरणास्रोत के रूप में आपके अनुकरणीय कार्य सदैव स्मरणीय रहेंगे। आप हमेशा समाज के दिलों में जीवित रहेंगे।
लिच्छा राम भील हत्याकांड दिनांक 17/12/2025 को भांडू चारणान (तह. शेरगढ़, जोधपुर) निवासी लिच्छा राम भील की बेरहमी से हत्या कर दी गई परिजनों का आरोप है कि स्थानीय पुलिस व दोषियों की मिलीभगत से गिरफ्तारी में देरी हो रही है।परिजन महात्मा गांधी हॉस्पिटल जोधपुर की मोर्चरी के
हक और अधिकारों की लड़ाई में निमंत्रण नहीं भेजे जाते। जिसका ज़मीर ज़िंदा है, वह खुद सड़क पर उतरता है। थानेदार साहब अमराराम जी पर बजरी माफिया के जानलेवा हमले के खिलाफ कल अधिक से अधिक संख्या में समदड़ी तहसील मुख्यालय पहुँचे। #न्याय_दो_अमराराम_जी_को#बजरी_माफिया_हाय_हाय#जल_जंगल_जमीन
समदड़ी में उपनिरीक्षक अमराराम पर हुए जानलेवा हमले के आरोपी अब तक गिरफ्तार नहीं! क्या राजस्थान सरकार बजरी माफिया के सामने झुक चुकी है?भील समाज का धैर्य अब खत्म हो चुका है।👉 अगर आरोपियों को तुरंत नहीं पकड़ा गया तो सोमवार को उग्र प्रदर्शन होगा।
सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं हो सकता है।
मेरे 7 साल के संघर्ष में मुझे न्यायालय ने न्याय दिया है।
जातंकवादी लोगो ने मुझे झूठा कहा लेकिन मै कभी भी अपने लक्ष्य से भटका नहीं।
आज माननीय कोर्ट ने जमीन का फैसला मेरे पक्ष में दिया।
सभी मानवतावादी साथियों का दिल से शुक्रिया।
बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद माननीय श्री राजकुमार रोज जी को सोशल मीडिया के माध्यम से मिली धमकी घोर निंदनीय है। स्वतंत्र भारत में इस तरह की घटना लोकतंत्र पर धब्बा है। सरकार और प्रशासन तुरंत ठोस कार्रवाई करे तथा सांसद जी को सुरक्षा मुहैया कराए।
बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद माननीय श्री राजकुमार रोज जी को सोशल मीडिया के माध्यम से मिली धमकी घोर निंदनीय है। स्वतंत्र भारत में इस तरह की घटना लोकतंत्र पर धब्बा है। सरकार और प्रशासन तुरंत ठोस कार्रवाई करे तथा सांसद जी को सुरक्षा मुहैया कराए।
जेलू (तिंवरी) में भील समाज के मांगीलाल पुत्र पांचाराम के घर को राजपूत समाज के लोगों ने जलाकर राख कर दिया। @roat_mla
प्रशासन से निवेदन है कि दोषियों पर तुरंत कानूनी कार्यवाही हो। गरीब आदिवासी परिवार के साथ हुआ यह अन्याय शर्मनाक है। @RajsthanPolice5@PoliceRajasthan@CP_Jodhpur
जोहार साथियों
दोवड़ा थाने मे मारपीट की घटना को लेकर पीड़ित परिवार के साथ जिला मुख्यालय पर शांतिपूर्वक धरना चल रहा है। जो भी साथी पीड़ित के प्रति सहानुभूति रखता है वो जिला मुख्यालय पर ही पहुंचे, बाकी अन्य जगह किसी भी प्रकार की धांधली नही करें। हमे पीड़ित को न्याय दिलाना है।
लद्दाख की धरती से निकले पर्यावरणविद्, शिक्षाविद और लद्दाख के आदिवासी समुदाय के अग्रणी समाजसेवी सोनम वांगचुक आज जेल की सलाखों के पीछे हैं।
उन पर रासुका जैसे कानून लगाकर जेल भेजा गया है। पर सवाल यह है - क्या किसी इंसान को उसकी जमीन की रक्षा, 6th Schedule, लदाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और पर्यावरण की रक्षा की मांग उठाने पर जेल में डालना न्याय है ?
सोनम वांगचुक ने हिमालय और ग्लेशियर बचाने की मुहिम को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया, स्थानीय युवाओं को नई सोच और आत्मनिर्भरता की राह दिखाई और हमेशा प्रकृति व मानव कल्याण को प्राथमिकता दी
आज उनकी गिरफ्तारी केवल लद्दाख की आवाज़ को नही दबाती, बल्कि यह हर उस नागरिक की आवाज़ को दबाती है जो पर्यावरण, न्याय, अपने हक अधिकारों और मानवता के लिए खड़ा होता है।
✊ हम सब सोनम वांगचुक के साथ खड़े है।
@RahulGandhi@narendramodi #StandWithSonamWangchuk #JusticeForLadakh #ReleaseSonamWangchuk
सोनम वांगचुक और लद्दाख की जनता केवल अपने संवैधानिक अधिकारों और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।आज लद्दाख की आवाज़ केवल एक क्षेत्र की आवाज़ नहीं है, यह पूरे देश की लड़ाई है।क्योंकि अगर लद्दाख की आवाज़ दबाई जा सकती है तो कल किसी भी हिस्से की आवाज़ दबाई जा सकती है।
कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी लोकतंत्र पर सीधा हमला है।
यह कदम दर्शाता है कि सरकार जनता की आवाज़ से डरती है और असहमति को दबाने के लिए जेल का सहारा ले रही है।
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मोदी सरकार का यह कायरतापूर्ण और निरंकुश रवैया साबित करता है कि अब वह लोकतांत्रिक नहीं बल्कि तानाशाही रास्ते पर चल पड़ी है।
सवाल यह है — अपनी ज़मीन, रोज़गार और पहचान की रक्षा करना कब से देशद्रोह हो गया?
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