This immortal song was first published on November 7, 1875, in the literary magazine 'Bangadarshan'. Later, Bankim Babu included it in his historic novel 'Anandamath' (1882), which ignited the flame of revolution. #VandeMataram#VandeMataram150#vskmalwa
हल्दीघाटी के कणों में
व्याप्त वंदे मातरम्
दिव्य जौहर ज्वाल का है
तेज वंदे मातरम्
वीरों के बलिदान की
हुंकार वंदे मातरम् ।।
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यह पावन गीत महज़ शब्दों का मेल नहीं, बल्कि भारत माँ के अमर सपूतों के त्याग, तपस्या और बलिदान की
गाथा है। आज 150 वर्षों के बाद भी इसकी गर्जना हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊंचा कर देती है।
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उपन्यास के रूप में छपने से पहले, 'आनदंमठ' बंगाली मासिक पत्रिका 'बंगदर्शन' में धारावाहिक के रूप में
प्रकाशित हुआ था। मार्च-अप्रैल 1881 के अकं की पहली किस्त में यह महामंत्र छपा था। #वन्देमातरम्#VandeMataram150#vskmalwa
विभाजन के उस भयावह कालखंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने अपने घर-परिवार, सुख-सुविधा और व्यक्तिगत जीवन की चिंता किए बिना समाज और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना जीवन दांव पर लगा दिया।
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सरदार गुरजीत सिंह को घेर लिया मुस्लिम भीड़ ने,
बेरहमी से मार कर पवित्र पगड़ी को कुचल दिया पैरों से,
साथी गुरमीत सिंह को भी पीट डाला गया लाठी डंडों से,
अयान खान, नौशाद और काले कुरैशी लीड कर रहे थे हमलावरों को,
धर्मनिरपेक्षता में प्रदेश में टॉप पर चल रही बिजनौर पुलिस ने सिखों पर भी दर्ज कर ली है FIR,
रोते हुए पीड़ित सिंह बताएँगे अपनी पीड़ा और खुद के साथ हुआ अत्याचार,. आज शाम 7pm हमारे शो 'जवाब तो चाहिए' में सिर्फ सुदर्शन न्यूज़ पर..
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