राजस्थान एसआई भर्ती में इंटरव्यू में 50 में से 18 अंक अनिवार्य होने को लेकर विवाद बढ़ गया है। अभ्यर्थियों का सवाल है कि जब देश के कई राज्यों में इंटरव्यू खत्म हो चुका है, तो राजस्थान में यह नियम अब भी क्यों लागू है?
1.यदि देश के 15 राज्यों में एसआई भर्ती में इंटरव्यू नहीं होता, तो राजस्थान में इसे अनिवार्य रखने का औचित्य क्या है?
2 जब लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता से अभ्यर्थियों की योग्यता साबित हो जाती है, तो फिर इंटरव्यू की आवश्यकता क्यों?
3.क्या इंटरव्यू में 50 में से 18 अंक की अनिवार्यता प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों के साथ अन्याय नहीं है?
4.यदि अन्य राज्यों ने पारदर्शिता के लिए इंटरव्यू समाप्त कर दिया, तो राजस्थान अब तक इस व्यवस्था पर क्यों कायम है?
5.क्या इंटरव्यू प्रक्रिया चयन को अधिक निष्पक्ष बनाती है या विवादों को जन्म देती है?
6.सरकार युवाओं की मांग पर इस नियम की समीक्षा करने से क्यों बच रही है?
7.क्या भर्ती प्रक्रिया में समान अवसर देने के लिए इंटरव्यू की अनिवार्यता हटाना उचित नहीं होगा?
8.जब देशभर में एक समान प्रवृत्ति इंटरव्यू खत्म करने की है, तो राजस्थान अलग राह पर क्यों चल रहा है?
9.क्या यह नियम योग्य अभ्यर्थियों के चयन में बाधा बन सकता है?
युवाओं की लगातार उठ रही मांग के बावजूद इस विषय पर स्पष्ट निर्णय कब लिया जाएगा?
300 करोड़ खर्च कर कोचिंग संस्था के लिए जगह बनाई लेकिन कोचिंग संस्थान को अब भेजा नहीं जा रहा…जहाँ चल रहे वहाँ बच्चों को भेड़ बकरी की तरह भरा जाता है कोई सुरक्षा के उपाय नहीं और जहाँ उपाय है वो जगह भूत बंगला बन रहा है।
जनता के टैक्स के पैसों का दुरुपयोग खुलकर हो रहा
https://t.co/S5Q4skZQHc
लखनऊ में जो हुआ वो सिर्फ़ हादसा नहीं आपराधिक कृत्य है
हादसे के बाद राजनेताओं का दौरा कैंसिल, मौक़े का मुआयना करना, घड़ियाली आंसू बहाना, ये सब कब तक चलता रहेगा?
कब सत्ता में बैठे नेता ज़िम्मेदारी तय कर क़सूरवार की सज़ा जल्द सुनिश्चित करेंगे और कब ऐसा नज़ीर पेश करेंगे कि अगली बार फ़ायर सेफ़्टी नियमों को ताक पर रख निर्माण न हो और निर्माण के बाद भी उसका
उचित रखरखाव हो रहा है या नहीं इसके लिए असरदार मैकेनिज़्म तय करेंगे?
इंटरव्यू में व्यक्तिपरकता (Subjectivity) अधिक होती है, जिससे पक्षपात या विवाद की संभावना बढ़ जाती है।
विशेष रूप से "50 में न्यूनतम 18 अंक अनिवार्य" जैसे नियम पर सवाल उठना स्वाभाविक है, क्योंकि एक अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के बावजूद भी इंटरव्यू में कम अंक मिलने पर बाहर हो सकता है।
भर्ती प्रक्रिया ऐसी हो जिसमें....
पारदर्शिता हो,
विवाद की गुंजाइश कम हो,
योग्य उम्मीदवारों के साथ न्याय हो,
और चयन पूरी तरह मेरिट आधारित हो।
युवाओं का भविष्य भर्ती नियमों की स्पष्टता और निष्पक्षता पर निर्भर करता है, इसलिए इस विषय पर गंभीर विचार-विमर्श आवश्यक है।
#SI_भर्ती
यह सबसे गंदी व्यवस्था है इसको समाप्त किया जाना चाहिए पूर्व में मन की बात में आदरणीय प्रधानमंत्री जी भी बोल चुके है और केंद्र में केंद्र सरकार के ग्रुप 'बी' (गैर-राजपत्रित/Non-Gazetted), ग्रुप 'सी' (Group C), और ग्रुप 'डी' (Group D) के पदों पर भर्ती के लिए इंटरव्यू को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया तो फिर राजस्थान में क्यों जारी है यह
यदि अभ्यर्थी की योग्यता का आकलन लिखित परीक्षा और अन्य निर्धारित प्रक्रियाओं से हो चुका है, तो चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए साक्षात्कार ख़त्म होने चाहिए
डॉ धीर सिंह धाभाई
#si #इंटरव्यू
@alokrajRSSB पी. एल. बैरवा साहब को सादर नमन। आपने मेरे कार्य की सराहना करते हुए कहा था कि आप प्रतिनियुक्ति करवाकर यहीं बोर्ड में ही आ जाइए। आपकी वह एक घंटे की मुलाकात सदैव स्मृतियों में रहेगी।
पूर्व जन्म में क्या पुण्य किए थे इस आदमी ने?
भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह आज अपना 69वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर उन्हें हरियाणा के रवि चौहान और उनकी पत्नी संगीता चौहान ने ढाई करोड़ रुपए मूल्य का घोड़ा भेंट किया है। यह घोड़ा लंदन से लाया गया है। इससे पहले उन्हें डेढ़ करोड़ रुपए का एक और घोड़ा गिफ्ट में मिला था। इसके अलावा एक खिलाड़ी ने उन्हें सोने की चेन गिफ्ट की।
जन्मदिन के मौके पर पांच लाख लोगों के लिए जीमण भी रखा गया है। इस मौके पर बृजभूषण शरण सिंह खुली जीप में 100 गाड़ियों के काफिले के साथ निकले। जन्मदिन पर ऐसा शक्ति प्रदर्शन हमने नहीं देखा। राजस्थान में भी भाजपा और कांग्रेस के कई नेता जन्मदिन पर बड़े कार्यक्रम आयोजित करते रहे हैं लेकिन वे अपने घर पर ही ज्यादा से ज्यादा माला साफा आदि पहनाने के कार्यक्रम करते हैं।
यह इतनी चमक दमक आती कहां से है? भगवान जाने। बिना किसी पद पर होते हुए इतने लोगों का जीमण कैसे होता है और कोई क्यों ढाई करोड़ का घोड़ा गिफ्ट करता है, यह भी भगवान ही जाने। हम साधारण लोग सिर्फ यही मान सकते हैं कि पूर्व जन्म में कोई बड़े भारी पुण्य किए हुए होंगे जिनका फल इस जन्म में मिल रहा है।
हेल्थ इंश्योरेंस पर GST हटाते ही इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलना चाहिए था न कि बीमा कंपनियों को, मगर GST हटते ही बीमा कंपनियों ने बेस प्रीमियम को 8 से 12 फीसदी तक बढ़ा दिया जो साफ तौर पर जनता के साथ धोखा और सरकार के नीतिगत फैसले का दुरुपयोग है | चूंकि हेल्थ इंश्योरेंस कोई लग्ज़री व्यवस्था नहीं बल्कि ज़रूरत है क्योंकि बीमारी पहले ही इंसान को तोड़ देती है और उस पर बीमा कंपनियों की लालच भरी नीतियाँ आम आदमी की कमर तोड़ रही हैं ऐसे में GST हटने का फायदा उपभोक्ता को मिलना चाहिए था मगर उसका तोड़ बीमा कंपनियों ने निकाल लिया जो जनता के हित में नहीं है |
मेरा प्रधानमंत्री श्री @narendramodi व वित्त मंत्री श्रीमती @nsitharaman से प्रश्न है कि
1- क्या हर सुधार का लाभ सिर्फ कॉरपोरेट मुनाफे तक सीमित रहेगा ?
2- क्या IRDAI और सरकार,बीमा कम्पनियों की इस मनमर्जी पर सख़्त निगरानी रखेंगी या चुप रहेंगी ?
@PMOIndia@FinMinIndia
देश की कोई भी बीमा कंपनी हो ,बीमा बेचते वक्त लोक लुभावने वादे करके आपको बीमा बेच देती है ,
लेकिन जब आपको उस बीमें की जरूरत पड़ती है तो कोई न कोई बहाना बताकर आपको बेनिफिट देने से मना कर दिया जाता है ,
जनता के पास इसका कोई हल नहीं है बस हर बार कस्टमर केयर एक्जीक्यूटिव को कॉल लगाओ उसको पूरा इश्यू बताओ और फिर एक नई लंबी डेडलाइन का इंतजार करो ।
🚨🚨 बीमा को सुरक्षा कहा गया था, लेकिन असल में ये धैर्य परीक्षा बन चुका है।
>> प्रीमियम समय पर कटता है — ऑटो-डेबिट, SMS, ईमेल, रिमाइंडर… सब तेज़।
लेकिन जब क्लेम का वक्त आता है 👇
• फाइल “अंडर रिव्यू” में चली जाती है,
• फोन “कस्टमर केयर” में अटक जाता है,
• और मरीज “मेंटल ट्रॉमा” में।
>> यही वो सिस्टम है जिस पर @ajeetbharti सवाल उठा रहे हैं — और ये सवाल किसी एक केस का नहीं, पूरे बीमा इकोसिस्टम का है।
>> आज भारत में बीमा ऐसा प्रोडक्ट बन गया है, जिसमें रिस्क ग्राहक का है, फायदा कंपनी का है, और जवाबदेही किसी की नहीं।
@HDFCERGOGIC जैसी बड़ी कंपनियाँ भी क्लेम के समय भरोसे की जगह क्लॉज़, सब-क्लॉज़ और जांच का जाल बिछा देती हैं।
>> बीमा लेने वाला सोचता है — “मुसीबत में सहारा मिलेगा”
और सिस्टम कहता है — पहले साबित करो कि तुम सच में बीमार हो।
👉🏻 जब सुरक्षा शर्तों में उलझ जाए, तो उसे बीमा नहीं
संस्थागत असंवेदनशीलता कहा जाता है।
ये वीडियो देख आपका दिल दहल जाएगा! यह विडियो चौमूं का है जहा पर किसान शंकरलाल सुंडा PNB बैंक में अपनी KCC के पैसे जमा करवाने करीब ₹1.50 लाख रुपये अपने बैग में रख कर बैंक आया जब काउंटर पर पैसे निकालने के लिए बैग खोला तो कटा हुआ बैग मिला। एक किसान के लिए यह सिर्फ पैसा नहीं, उसका खून-पसीना है। प्रशासन से अपील है इस पीड़ित व्यक्ति की मदद जल्द से जल्द की जाए
इस भाई की जो भी मदद कर सकते हैं, करें।
गरीब और पीड़ित की मदद ही ईश्वर की सबसे बड़ी पूजा है।
और जयपुर पुलिस अपना काम कर दे तो किसी को आगे आने की जरूरत ही नहीं होगी।
@jaipur_police