आज देश निर्णायक मोड़ पर है!
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“जिन डिब्बों में हम पैसे छुपाते थे, उन डिब्बों में अब पैसे भी नहीं हैं और राशन भी नहीं।”
घर चलाने का जिम्मा हमारी बहनें उठाती हैं। घर में किसे खाना चाहिए, किसे कपड़े चाहिए, बच्चों का शौक क्या है, जरूरत क्या है, बचत भी करनी है- यह सब कुछ महिलाएं संभालती हैं।
लेकिन आज वे महंगाई की वजह से अपना घर नहीं चला पा रही हैं। राशन महंगा, सब्जी महंगी, फल महंगे, गैस महंगी, शिक्षा महंगी, स्वास्थ्य सुविधा महंगी, सब कुछ महंगा लेकिन आमदनी घट गई।
भाजपा सरकार महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह फेल हो चुकी है।
आज भारतीय राजकारणात, एक सत्य आहे जे वक्तृत्वाच्या पलीकडे आहे - राहुल गांधी हे मोदी आणि भाजपच्या जुगलबंदीच्या विरोधात उभे असलेले एकमेव नेते आहेत.
निवडणुकीच्या निकालांमध्ये धा��णा मह��्त्वाची असते आणि भाजप मीडिया नियंत्रण, संस्थात्मक प्रभाव, सेलिब्रिटींचे समर्थन, सर्वेक्षण आणि पैसा याद्वारे अजिंक्यतेचा आभास निर्माण करतो.
मोदी आणि भाजप अथकपणे हे कथन तयार करतात, त्यांना धैर्याने आव्हान देणाऱ्या आणि त्यांच्या विरोधात सर्वात मोठा आवाज असलेल्या राहुल गांधी यांना बदनाम करण्यासाठी कोणतेही प्रयत्न किंवा खर्च सोडत नाहीत.
2024 ची निवडणूक ही विचारधारांची लढाई आहे. मोदी एक��चे प्रतिनिधित्व करतात आणि आरजी दुसऱ्याचे प्रतिनिधित्व करतात. नितीश कुमारांसारखे नेते, तत्त्वे नसलेले, निकालाला आकार देण्यास हातभार लावत नाहीत.
केवळ राहुल गांधी मोदींशी तडजोड करणार नाहीत आणि ही राजवट उलथून टाकण्यासाठी मनापासून त्यांच्याभोवती रॅली काढावी लागेल आणि परिवर्तनाचा संदेश द्यावा लागेल हे सत्य प्रत्येक भाजपविरोधी मतदाराने ओळखले पाहिजे आणि वाढवले पाहिजे.
भाजपला असे होऊ द्यायचे नाही.'मोदी विरुद्ध कोण?' या कथनाला पेलण्यास सक्षम करून, भारताच्या आघाडीला दिशाहीन आणि चेहराहीन असे रंग देण्याची भाजपची रणनीती आहे.
भारत जोडो न्याय यात्रेची उल्लेखनीय सुरुवात ही एक गती दर्शवते ज्याने भाजपला गोंधळ घातला आहे, जो आसाममध्ये दिसल्याप्रमाणे भाजपला रोखण्याच्या त्यां���्या जिवावर उठलेल्या प्रयत्नांतून दिसून येते आणि आम्ही मुंबईत पोहोचेपर्यंत ते सर्व राज्यांमध्ये असेच करत राहतील.
राहुल गांधींचे ‘पांच न्याय’ काँग्रेसच्या पर्यायी कथनाला आकार देणारी एक दूरदर्शी चौकट आणि युवक, शेतकरी, महिला, कामगार आणि उपेक्षितांसाठी जाहीरनाम्यातील ठोस आश्वासने म्हणून सांगत���त.
ही निवडणूक राहुल गांधींची न्याय, हक्क आणि मोदींच्या विकास मॉडेलमधून वगळलेल्या 90% लोकांच्या आकांक्षा 10% श्रीमंतांसाठी राखीव असलेली लढाई आहे.
मोदी आणि प्रसारमाध्यमांनी दाखवलेल्या दर्शनी भागाच्या विरुद्ध,२०२४ हे भाजपसाठी पूर्ण करारापासून दूर आहे.
लढाई तीव्र होत आहे. एकजुटीने उभे राहा, कारण लढा नुकताच सुरू झाला आहे.
मैं अक्सर सोचता हूँ क्या राहुल Rahul Gandhi सुक़ून से घर में बैठकर इस मौसम में कहवा नही पी सकते हैं । दुनिया की सैर करते हुए मौज भरी ज़िन्दगी नही जी सकते हैं । उसे पढ़ने का शौक है, तो सोफ़े पर लेटकर,महीन पतला मुलायम कम्बल पैरों पर डालकर वह दुनिया के बड़े लेखकों की आयी नई किताब भी तो पढ़ सकता है । उसे स्पोर्ट्स पसन्द है, तो वह अपने खिलाड़ी साथियों के साथ मस्त खेलता ।
इन सबसे अलग वह चाहें तो अपनी माँ, जो कुछ बीमार हैं । उनके पास बैठकर उनकी ख़िदमत करता और मज़े से घर पर लोगों से मिलते हुए, अपनी शाम गुज़ारता । पहाड़,नदियां,समंदर,रेगिस्तान,जंगल में घूमता और चटखारे ले लेकर उसके क़िस्से सुनाता । मगर वह तो यह सब नही कर रहा,वह तो सड़क पर ठोकर खा रहा है ।
हज़ारों किलोमीटर पैदल चला,अब हज़ारों किलोमीटर चलने फिर निकल आया । जो उसके दरवाज़े पर दो मिनट मुलाकात के लिए महीनों दिल्ली में पड़े रहते थे । उसपर अपने गुंडों से हमला करवा रहे हैं । उसे गिरफ्तार करने की धमकी दे रहे हैं । उसके चलने में बाधाएं पैदा कर रहे हैं । टीवी स्क्रीन से उसकी पूरी यात्रा ग़ायब है । मंदिर उसे जाने नही दिया जाता है । यूनिवर्सिटी के बच्चों से मिलने पर उसपर पाबंदी लगा दी जाती है । साथ चलते साथियों को प्रताड़ित करने के हर उपाय किये जाते हैं ।
मेरी समझ में दो बातें नही आती । एक राहुल यह कर क्यों रहे हैं । दूसरी अगर हुक़ूमत को उनका डर नही है और वह अप्रासंगिक ��ो गए हैं, तो उसकी राह में कांटे क्यों बिछाए जा रहे हैं । पहले प्रश्न का उत्तर है, ज़िद । यह ज़िद की किसी को भी हम पूरा मुल्क और उसकी सांसे एक मुट्ठी में नही लेने देंगे । इसके लिए उसने अपना सर्वस्व त्याग दिया है । अब जिनके लिए निकला है, उन्हें जागना है । वह जागेंगे,आज नही तो कल,क्योंकि हर नशे के बाद,एक पल तो होश का आता ही है ।
अब रही बात रास्ते में बाधा की,तो आप समझें या न समझें,हुक़ूमत राहुल की अहमियत ���मझती है । उसे पता है कि यह जो बोल रहा है, कल जो भी हुक़ूमत के ख़िलाफ़ खड़ा होगा, यही ज़बान बोलेगा । मुँह उसका होगा मगर शब्द राहुल के होंगे । दूसरी बात यह लोगों के दिलों से डर निकाल देगा । जिधर जाता है, लोग डरना छोड़ देते हैं । यह वह शख्स है, जो किसी घर में बैठ जाए,तो उस घर से डर विदा हो जाता है । अहंकार के विरुद्ध जो सबसे बड़ी लड़ाई है, वह है निडर होना । निडर बनाने का यह महारथी है, अपने ही पूर्वजों की तरह....
राहुल की यात्रा को जितना रोका जाएगा । अहंकार की सत्ता उतनी ही दरकती जाएगी । मेरी तो उन लोगों से गुज़ारिश है, जो माहौल में सुक़ून लाना चाहते हैं । वह इनके साथ खड़े हों । इनकीं यात्राओं की बातें,अवरोध,मकसद,तस्वीरे लगाएं,ताकि उनसे कोई दूसरा भी जाने क्या हो रहा है ।
जब मीडिया अहंकार की सत्ता के आगे नतमस्तक हो तो,आम लोगों को पत्रकार-लेखक बनना पड़ता है ��� राहुल की ख़बर रखिये, उसे बताइये,यह हम सबका अब कर्तव्य है । मुल्क की खूबसूरती बनाए रखने के लिए,हमें भी अपना अपना कंफर्ट छोड़ना होगा,जैसे राहुल ने छोड़ा है ।
यह न्याय की यात्रा है । दिलों को जोड़ने का महायज्ञ है । अपने अपने हिस्से की आहुति दीजिये,बिना अगर मगर के...दूर असम की सड़कों में वह चल रहा है । उसकी हिम्मत बढ़ाए, साथ दें,इस वक़्त मुल्क को उसकी ही ज़रूरत है । यह बात कुछ लोगों को वर्षों ब��द समझ आएगी मगर जो समझदार हैं, अभी समझ रहें हैं, वह उसका साथ दें । उसके बारे में लिखें,बात करें,तस्वीरें लगाएं और जब मौका आए,तो कदम से कदम मिलाकर चल निकले । राहुल के लिए मोहब्बत और मोहब्बत के लिए मोहब्बत ज़िंदाबाद.
सामाजिक न्याय के अप्रतिम योद्धा जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को उनकी जन्म शताब्दी पर सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। वह निश्चित ही भारत के अ���मोल रत्न हैं और उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न दिए जाने के फैसले का स्वागत है।
2011 में हुई सामाजिक और आर्थिक जातीय जनगणना के नतीजों को भाजपा सरकार द्वारा छिपाना और राष्ट्रव्यापी जनगणना के प्रति उनकी उदासीनता सामाजिक न्याय के आंदोलन को कमज़ोर करने का प्रयास है।
'भागीदारी न्याय‘ भारत जोड़ो न्याय यात्रा के पांच न्यायों में से एक प्रमुख न्याय और सामाजिक समानता का केंद्र बिंदु है, जिसकी शुरुआत ���िर्फ जातिगत जनगणना के बाद ही हो सकती है।
सही मायने में ��ही कदम जननायक कर्पूरी ठाकुर जी और पिछड़ों और वंचितों के अधिकारों के लिए उनके संघर्षों को सच्ची श्रद्धांजलि भी होगा।
देश को अब ‘सांकेतिक राजनीति’ नहीं ‘वास्तविक न्याय’ चाहिए।
आज से शुरू हो रही है
भारत जोड़ो न्याय यात्रा
हम पहुंचेंगे हर घर तक
न्याय का हक़, मिलने तक
गली, मोहल्ला, संसद तक
न्याय का हक़, मिलने तक
सहो मत...डरो मत!
#BharatJodoNyayYatra
Best wishes to all on the festive occasion of Makar Sankranti, Pongal, Bhogi, Magh Bihu and Uttarayan!
May these harvest festivals mark the beginning of a new period of hope, opportunity and progress in all your lives.
मणिपुर पिछले 8 महीने से हिंसा की चपेट में है।
आज भारत जोड़ो न्याय यात्रा की शुरुआत से पहले इस हिंसा में मारे गए लोगों को मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।
#BharatJodoNyayYatra
भारत जोड़ो न्याय यात्रा की शुरुआत के दौरान रैली को संबोधित करते हुए श्री @RahulGandhi जी ने कहा — "शायद नरेंद्र मोदी के लिए, BJP और RSS के लिए मणिपुर देश का भाग ही नहीं है। आपका जो दुख है, आपका जो दर्द है वो उनका दुख, उनका दर्द नहीं है"