क्या प्रोबेशन पीरियड में सरकारी विभाग अपने कर्मचारी से कार्य बहुत कम करवाता है जो उसे इतना कम वेतन दिया जाता है।ये एक बहुत ही नकारात्मक विसंगति है जो उस सरकारी कर्मचारी को बहुत तकलीफ देती है जो दिन रात मेहनत करके,पैसे खर्च करके इस पद तक पहुंचा है। इसलिए
#प्रोबेशन_में_पूर्ण_वेतन
क्या प्रोबेशन पीरियड में सरकारी विभाग अपने कर्मचारी से कार्य बहुत कम करवाता है जो उसे इतना कम वेतन दिया जाता है।ये एक बहुत ही नकारात्मक विसंगति है जो उस सरकारी कर्मचारी को बहुत तकलीफ देती है जो दिन रात मेहनत करके,पैसे खर्च करके इस पद तक पहुंचा है। इसलिए
#प्रोबेशन_में_पूर्ण_वेतन
क्या प्रोबेशन पीरियड में सरकारी विभाग अपने कर्मचारी से कार्य बहुत कम करवाता है जो उसे इतना कम वेतन दिया जाता है।ये एक बहुत ही नकारात्मक विसंगति है जो उस सरकारी कर्मचारी को बहुत तकलीफ देती है जो दिन रात मेहनत करके,पैसे खर्च करके इस पद तक पहुंचा है। इसलिए
#प्रोबेशन_में_पूर्ण_वेतन
Jis desh me pradhanmantri OBC caste se aate ho, President ST caste se aati ho, wahan @Kanchanyadav000 jaiso ki soch se hi daara hua hai general caste ka samaj
#UGC_RollBack#Rollback_UGC#UGC
Dharmendra Pradhan जी SC ST OBC के लिए: स्पेशल आरक्षण, स्पेशल कानून, स्पेशल नीतियाँ
लेकिन General Category के लिए सिर्फ़ भरोसा❓
आदरणीय Modi Ji, अब #UGCRegulations का मामला वाकई गंभीर हो गया है… #Rollback_UGC
जब देश के प्रधानमंत्री OBC हों, देश के राष्ट्रपति ST हों और देश के आधे से ज़्यादा राज्यों में OBC–ST मुख्यमंत्री हों, उस देश में भी अगर रोज़ “हज़ारों साल का हिसाब” याद दिलाया जाए, तो सवाल इतिहास का नहीं, नियत का उठता है।
यहाँ वर्तमान सत्ता में है, फिर भी दोष अतीत पर है। आज निर्णय आपके हाथ में है, लेकिन सज़ा किसी और की तय की जा रही है।
कंचना यादव जी—पढ़ी-लिखी हैं, कैंसर पर PhD है,
नेतृत्व का मंच है, फिर भी तर्क यह कि “सवर्ण को फँसाया जाना चाहिए।”
क्यों?
क्योंकि आप पैदा पहले हो गए और इतिहास आपके नाम से पहले लिख दिया गया।
यह न्याय नहीं है, यह सामूहिक अपराध सिद्धांत है।
मुद्दा यह नहीं कि कौन किस जाति से आता है, मुद्दा यह है कि शिक्षा अगर सोच को उदार न बना पाए, तो डिग्री सिर्फ़ काग़ज़ बन जाती है। 📜
सोचिए
अगर यह भाषा एक PhD धारक नेता बोल रही है,
तो वह व्यक्ति क्या सोचेगा, जिसने स्कूल का दरवाज़ा भी नहीं देखा?
जब SC ST, OBC समाज में जाते हैं तो वहाँ ग़ुस्सा नहीं,भ्रम, असमंजस और उम्मीद दिखाई देती हैं और जब उन तक यह संदेश पहुँचता है कि
“दोषी पहले से तय हैं”
तो सवाल उठता है 👇
क्या हम बराबरी बना रहे हैं या बस नए कटघरे खड़े कर रहे हैं? 🤔
इतिहास से सीख ज़रूरी है, लेकिन उसे बदले का औज़ार बनाना, यह समाज को आगे नहीं, पीछे ही ले जाता है।