एक और शक्तिपीठ इस्लामी चंगुल में है।
जोगुलम्बा मंदिर, गढ़वाल, तेलंगाना - 5वां शक्तिपीठ। इसमें ब्रह्मसूत्र शिवलिंग हैं।
जिहादियों ने मंदिर परिसर में बहुत सारी समाधियाँ बनवाईं।
इस मंदिर परिसर में बहुत सारे मंदिर हुआ करते थे। उनमें से कई को म्लेच्छों ने नष्ट कर दिया है। बाकी की हालत खराब है।
संभल में एक मस्जिद का नाम है....
'एक रात की मस्जिद'....
निहितार्थ समझे आप ? 😥
(संभल में बन्द कर दिए कुऍं की खुदाई से प्राप्त हुई भग्न प्राचीन मूर्ति के साथ पुलिस अधिकारी) 👇
साभार
#UPCM@myogiadityanath ने आज वाराणसी में 'काशी के कोतवाल' श्री काल भैरव जी और बाबा श्री विश्वनाथ जी का दर्शन-पूजन किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने प्रदेशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि के लिए कामना की।
@yadavakhilesh एक एक ट्वीट पर हजारों बार आम लोगों के लताड़ने के भी पूरी बेशर्मी के साथ फिर से अगला ट��वीट करते है ऐसे थोड़े ही गुंडावादी पार्टी के अध्यक्ष बने है.. निर्लज्जता की भी प्रतिभा होनी चाहिए
@iamAKstalin@Uppolice श्रीमान, कृपया त्वरित संज्ञान लें। भारत के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री और उत्तर प्रदेश के जनप्रिय नेता के खिलाफ इस प्रकार की घिनौनी और अभद्र भाषा का प्रयोग बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कड़ी कार्रवाई की जाए!
@JaikyYadav16 84 ल��ख योनियों में भटकने के बाद मनुष्य का शरीर मिला है, कृपया इसे जैकी यादव के ज्ञान लेने में बर्बाद न करें
सभी लोग पढ़ाई करें, आगे बढ़े
बाबा सिद्दकी के मरने पर बॉलीवुड भांड इस तरह रो रहे है कि जैसे खास बाप मर गया हो ।
ये मत भूलो देशवासियों यही बाबा सिद्दकी दाऊद के सा�� मकोका एक्ट में था ।
बॉलीवुड के द्वारा सनातन धर्म का मजाक इन्हीं लोगों के कारण बनता था ।।
कर्मा है लौटकर आएगा जरूर ।।
जब नेहरू के मुँह पर झन्नाटेदार झापड़ मारा गया था स्वामी विद्यानंद विदेह के द्वारा। कारण... नेहरू ने एक समा��ोह के अपने भाषण में कहा कि "हिन्दू आर्य समाज" के लोग हिंदुस्तान में शरणार्थी हैं। इतना सुनते ही स्वामी विद्यानंद विदेह जी जो उस समारोह के मुख्य अतिथि थे, उठे और मंच पर ही नेहरू को एक झन्नाटेदार झापड़ रसीद कर दिया और माइक छीनते हुए कहा कि... "आर्य समाज के लोग शरणार्थी नहीं, ये हमारे पूर्वज हैं और इस देश के मूलनिवासी हैं। तुम्हारे ही पूर्वज "अरेबिक" हैं, और तुम्हारे शरीर में अरब का खून बह रहा है। तुम इस महान देश के मूल निवासी नहीं... तुम हो शरणार्थी...।"
साथ ही कहा कि "��ाश सरदार पटेल इस देश के प्रधानमंत्री होते तो यह सब देखना न पड़ता।" (मंच पर अफरातफरी मच गई उसी समय की दुर्लभ फोटो, जो फोटोग्राफर ने बहुत मुश्किल से फिल्म की रील अपनी पेंट में छिपा कर रख ली थी)