पंचायत चुनाव में वोट उसे दे
जो गाँव के छोटे छोटे झगड़े,
पंचायत में बैठा कर निपटा सके
उस दलाल को वोट ना दे,
जो झगड़ो के बहाने राजनीति करे,
और थाने में दलाली करके अपना पेट भरे।
जाना किधर था, न जाने कहां बढ़ रहा हूॅं
दूसरों की किस्मत लिखनी थी
खुद की लकीरें पढ़ रहा हूॅं
गुस्सा सबसे हूॅं पर खुद से लड़ रहा हूॅं
हासिल तो नहीं किया कुछ फिर क्यों खोने से डर रहा हूॅं
इन धड़कनों पर मत जाओ
मगर अंदर मर चुका हूॅं "🩶