अगर कोई जातिवादी है, ईश्वरवादी है तो क्या वो निष्पक्ष इतिहास लिख सकता है?
जवाब है नहीं, क्योकि वो हर जगह लॉजिकल फ़ालसी इस्तेमाल करेगा और जहाँ जहाँ उसके जाति वर्चस्व की बात आयेगी वहाँ वो सबको मिसलिड कर अपने जाति के पक्ष में डाटा को भुनाने की कोशिश करेगा ।
अगर वो ईश्वरवादी हुआ तो एक तो नीम दूजे करेला यानी इतिहास को देखने का नजरिया की उसका लॉजिकल फालसी से सुरु होगा और वही पर खत्म होगा ।
अब आप आसानी से समझ सकते है की भारत का इतिहास चाहे लेफ्ट हो या राइट या फिर सेंटर किसी ने भी निष्पक्ष हो कर नहीं लिखा क्योकि ये भले भी ईश्वरवादी हो या नहीं हो लेकिन जातिय वर्चस्व वाले जरूर है ।
T20 क्रिकेट विश्व कप जीतने के बाद कल Lucknow में आधी रात को मनी दिवाली, अटल चौक, लोहिया चौराहा, हजरतगंज में लोगो ने मनाया जीत का जश्न, #RohitSharma𓃵 और #viratkholi के नारों से झूम उठा उत्तर प्रदेश, #Barabanki में भी मनाई गई आतिशबाजी। #T20WorldCupFinal#T20WorldCup #T20WorldCup2024 #WorldChampions #UttarPradesh
भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार एवं ज्ञान के प्रतीक 'भारत रत्न' बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती पर उन्हें मेरा कोटि-कोटि वंदन।
आपके आदर्श हमें निरंतर पथ प्रदर्शित करते रहेंगे।
#बाबासाहेब_आंबेडकर#AmbedkarJayanti2024
महामानव, ज्ञान सूर्य, भारतीय संविधान निर्माता ,विश्व रत्न, भारत रत्न बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर जी की जयंती पर सभी बहुजन साथियों को ढेरों बधाइयां एवं शुभकामनाएं💐💐💐
बाबा साहेब आपकी बदौलत ही हमारे जीवन में खुशियां है आपको कोटि कोटि नमन
#जयभीम#बाबासाहेब
सिम्बल आफ नॉलेज, विश्व प्रसिद्ध दार्शनिक, भारतीय संविधान के सृजनकर्ता, महान कानूनविद, असंख्य शोषितों पीड़ितों के मुक्तिदाता, सामाजिक न्याय के प्रणेता, बहुमुखी प्रतिभा के धनी, भारत रत्न बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की जयंती पर शत्-शत् नमन, कोटि-कोटि प्रणाम व भावभीनी श्रद्धांजलि।उनके अवतरण दिवस पर देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभ मंगलकामनाएं!
#AmbedkarJayanti #Ambedkar
प्रश्न : सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के पूर्वज मौर्य अंगार स्तूप बनाये थे मान लिया लेकिन क्या सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के समकालीन कुछ भी ऐसा सबूत है जिससे ये पता चले कि वो भी हिंदू या वैदिक नहीं थे?
जवाब : हाँ बिल्कुल समकालीन सबूत है लेकिन उससे पहले गौर करे।
सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के पूर्वज बुद्धिस्ट थे ये साबित हो चुका है तो सवाल यह है की चंद्रगुप्त मौर्य ने कब धर्म परिवर्तन कर वैदिक ब्राह्मणवादी या हिंदू बने इसका क्या कुछ भी समकालीन सबूत है?
अगर इसका कोई भी सबूत नहीं है न ही वैदिक काल का कोई सबूत आज तक मिला है तो फिर ये अटकलें बिना सबूत के किस आधार पर लगाई जा रही है की वो हिंदू या वैदिक थे?
जहां तक सम्राट चन्द्रगुप्त के समकालीन उनके बौद्ध होने की बात है तो सबूत के तौर पर मैगस्थनीज़ की इंडिका जो मूलतः खो चुकी थी लेकिन दुबारा कम्पाइल की गई पुराने ग्रीक नोट्स के आधार पर उसमे भी उस समय के राजा यानी चंद्रगुप्त मौर्य समन लोग से ही अपने रिचुअल फंक्शन परफॉर्म करवाते थे तथा राय मशवरा लेते थे यह साफ़ साफ़ लिखा है।
उस किताब में बमन समन दोनों की चर्चा है लेकिन राजा समन लोग से ही राय मशवरा तथा रिचुअल परफ़ॉर्म के अलावा, चिकित्सा भी करवाते थे ये साबित करता है कि समन लोग ही चंद्रगुप्त मौर्य के लिए महत्वपूर्ण थे, इंडिका कम्पाइल करने वाले शौनबैक ने भी समन को बौद्ध ही माना है।
यही नहीं पूरे मैगस्थनीज़ की इंडिका में बुद्ध के अलावा किसी भी वैदिक या आज के किसी भी हिन्दू गॉड या उनके किसी धर्मग्रंथ की चर्चा तक नहीं है।
चुकी सम्राट चन्द्रगुप्त के पूर्वज़ बुद्ध अस्थियों के लिए अंगार स्तूप बनवाए और उनके पोते सम्राट असोक ने 84000 स्तूप बनवाए और इस बीच में किसी के भी धर्म परिवर्तन का कोई सिंगल एविडेंस तक नहीं है। इस आधार पर यह साबित होता है कि सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य विशुद्ध रूप से बौद्ध थे।
अब सवाल है कि उनके वंशजों ने कब और कैसे बौद्ध धम्म छोड़ कर धर्म परिवर्तन कर लिया जो अपने पुरखों की विरासत पर चुप्पी साध लिए या बात करने से कतराने लगे या भुला दिये?
रिफरेन्स : मैगस्थनीज़ की इंडिका (अनुवादक रामचंद्र शुक्ल)
होलिका दहन की काल्पनिक कहानी पकड़ा कर होली खेलने की मनगढ़त खेल रचा गया।
यही नहीं नरसिंह अवतार करा होलिका के भाई हिरणकश्यप की हत्या करवाई गई कागज के पन्नो पर पिछले 500 सालों के अंदर।
जबकि पुरातत्व सबूत डंके की चोट पर कह रहा है कि नरसिंह कोई अवतार नहीं बल्कि बुद्धिज्म की शिल्पकला है।
ख़ुद बुद्ध को नरसिंह कहा गया है यही नहीं शिल्पकला में नरसिंह के ऊपर बुद्ध बैठे हुए बनाये है।
11वी सदी तक भी नरसिंह बुद्धिज्म का हिस्सा थे।
सवाल यह है कि कब उन्हें बुद्ध से दूर कर विष्णु का अवतार घोसित कर कहानी काग़ज़ पर बदली गई?
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वज्रयान की मूर्तियाँ अच्छाई और बुराई की सिम्बोलिक रिप्रजेंटेशन के लिये बनाई जाती थी इसका फिजिकल हिंसा से कोई मतलब ही नहीं था ये पंचशील पालन करने वाले लोग है जहां हिंसा वर्जित है।
ये वज्रयान है यह सिंबॉलिक रिप्रजेंटेशन है। वज्रयान को समझना बच्चों का खेल नहीं है । सावधानी हटी की मुँह जली।
पहले वज्रयान को समझो या फिर पोस्ट ढंग से पढ़ो।
अन्यथा ब्राह्मणवादी गपौड़ की तरह कल्पना बुनोगे तो पैरो की धम्म धम्म भी पायल की छम छम सुनाई पड़ेगी।
आज ही के दिन 21 मार्च 1920 को बाबासाहेब ने मनगांव में पहली सार्वजनिक मीटिंग आयोजित की।
इस सभा में शाहूजी महाराज ने डॉ बाबासाहेब को शोषित वर्गों के सच्चे नेता के रूप में स्वीकार किया था और शाहू जी महाराज ने कहा था कि वह आपको गुलामी से मुक्त कर देंगे
20 मार्च 1927 को यही वह ऐतिहासिक पल था। जिसने अस्पृश्य वर्ग में क्रान्ति का मार्ग प्रशस्त किया। यह एक प्रतीकात्मक क्रिया थी जिसके द्वारा यह सिद्ध किया गया था कि हम भी मनुष्य हैं हमें भी अन्य मनुष्यों के समान मानवीय अधिकार हैं।
इस संघर्ष के दिन को नमन🙏🙏🙏🙏🙏💐💐💐💐💐
सामाजिक परिवर्तन के महानायक, शोषितों, वंचितों एवं पिछड़े वर्गों की राजनीतिक चेतना को जगाने वाले बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम साहब जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन।