अभी मै जिंदा हूँ... गौरैया
लेखक :- संजय कुमार
Assistant Director - Press Information Bureau, Patna (Govt. Of India)
यह पुस्तक हमें बचपन की उस #गौरैया चिड़िया से परिचित कराता है जो हम सब के काफी करीब रहने वाली चिड़िया के रूप में जानी जाती है।
@NishantRanja@sanjaykumar_iis
राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य और महावीर मंदिर न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल जी आजीवन समाज, धर्म और मानवता की सेवा के लिए समर्पित था। आचार्य किशोर कुणाल जी ने राम मंदिर आंदोलन और महावीर मंदिर के विकास में जो योगदान दिया, वह सदैव याद रहेगा। उनकी सादगी, विद्वता और सेवा भाव हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। अपने आईपीएस के कार्यकाल में भी स्वर्गीय किशोर कुणाल जी ने कई ऐसे कार्य किए जो कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अनिवार्य थे। उनके निधन से जो अपूरणीय क्षति हुई है, उसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को इस कठिन समय में संबल दें।
ॐ शांति
बिनु सत्संग विवेक ना होई।
राम कृपा बिनु सुलभ ना सोई।।
परमात्मा कण-कण में है। किंतु कण-कण म���ं उसकी अनुभूति सुलभ नहीं है। उसके लिए सत्संग रूपी झरोखा और गुरु सदृश निर्देष्टा की आवश्यकता होती है।
मन द्वैत है। परमात्मा अद्वैत है। मन खंडित है। सत्य अखंड है। किंतु सत्य की अभिव्यक्ति जब सृष्टि के रूप में होती है तब वह लीलावश दो हिस्सों में विभक्त हो जाता है जिन्हें शिव-शक्ति, यिन-यांग अथवा पुरुष और प्रकृति कहा जाता है।
उस अविनाशी शाश्वत तत्व को अखंड रूप में जानने के लिए शिव-शक्ति को अपने भीतर 'एक' की ��रह अनुभव क���ना होता है। इसी परम अनुभूति की दिशा में एक करुण आह्वान है "सत्याक्षरा : हमारा अगला ध्यान शिविर"
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आत्मज्ञान न होने की वजह से शरीर, समाज और संयोग की गुलामी कैसे जीवन नष्ट करते है, और वही पुरानी स्क्रिप्ट चलती है ।
@Advait_Prashant
Posted by Ajay Dwivedi on Gita Community Feed.
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वैसे तो हर बुद्ध शाश्वत का संगी है। वह न आता है न जाता है। किंतु आप हमारे लिए आए और अपने पावन संग-साथ से नित्य हमारे जीवन ��ो धन्य कर रहे हैं। इसके लिए हम आपका जितना आभार कहें, कम ही होगा।अतः हे निर्मल हृदय, निष्कलुष महात्मा आपको बारंबार नमन! आप सदा स्वस्थ और दीर्घायु रहें। 🙏🏻🌹🪔
हम ई नइखी चाहत कि
एगो भाषा खाति जवन हो सकेला
उ मय चीज हमरा जियते में
भोजपुरी के भेटा जाउ ,
बात मानी हमार विश्वास करीं
हम इहो नइखी चाहत कि
सत्ता से अतना मिलो कि
भोजपुरी सबसे आगा गिना जाउ
भोजपुरी भाषा से जुडल बात,
भोजपुरी भाषा साहित्य समाज के बात
भोजपुरिया लोगन के सोझा
कवनो प्लेटफारम प,
भोजपुरी मे लिखात रहो ।
सांच पुछी त इहे ख्वाहिस बा कि
हमरा एह माटी में मिलला के बादो
एगो भाषा खातिर जवन खाद पानी चाहीं
ऊ भोजपुरी के हरमेसा, भेटात रहो
- नबीन कुमार