#OPS_FOR_JCTSL
विचार जब लुप्त हो जाता है, या विचार प्रकट करने में बाधा होती है, या किसी के विरोध से भय लगने लगता है। तब तर्क का स्थान हुल्लड़ या गुंडागर्दी ले लेती है।
100.
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आदमी क्या चूहे से भी बद्तर हो गया है ? चूहा तो अपनी रोटी के हक के लिए मेरे सिर पर चढ़ जाता है, मेरी नींद हराम कर देता है ।
~ हरिशंकर परसाई
72.
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सत्ताधीश मानसिक रूप से ‘दोगले’ नहीं ‘तिगले’ हैं। संस्कारों से सामन्तवादी हैं, जीवन मूल्य अर्द्ध-पूँजीवादी हैं और बातें समाजवाद की करते हैं।
@ashokgehlot51#OPS_FOR_JCTSL