यह मुर्दों का देश है साधो।।
सोनम वांगचुक की हालत और ज्यादा गंभीर। अब तो खङे होने में भी मुश्किल हो रही है ।
पेपर लीक जैसे गंभीर मसले पर वांगचुक प्रोटेस्ट कर रहे हैं पर क्या मजाल जो सरकार पर असर पङे।
जीवन मै इंसान धरातल से उठकर एक बड़े क्षेत्र मै सबसे हटकर शीर्ष पर पहुंच जाता हे तो लोगो के लिए यह सब सहन करना अपने आप से बाहर हो जाता हे और उसका अंत देखने के लिए उतावली हो जाती हे ।
परबतसर के ग्राम पिह के सरपंच अमरचंद जी जाजड़ा के भाई देवकरण जी जाजड़ा जो शेर बरगा जिगरा ओर 1/2
ये है बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ इलाके में तोलियासर गांव का सरकारी स्कूल गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल खुला तो कमरे की पट्टियां टूटी हुई थी, शिक्षा मंत्री जी सोचो अगर यहाँ स्कूल में बच्चे पढ़ रहे होते तो क्या होता ?
"मुझे दया नहीं चाहिए... मुझे सिर्फ न्याय चाहिए।"
जयपुर की एक साधारण बेटी रेशु गुप्ता की यह पुकार आज हजारों नहीं, लाखों लोगों का दिल झकझोर रही है।
रेशु बताती हैं कि उन्होंने बीएससी (मैथ्स) की पढ़ाई की, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की, लेकिन पिता के कोरोना काल में निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। मजबूरी में उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया और आखिरकार अपनी मेहनत से मोमोज का छोटा-सा ठेला शुरू किया, ताकि मां और बहन का सहारा बन सकें।
लेकिन उनका दावा है कि 25वें दिन ही उनकी जिंदगी बदल गई। रेशु के अनुसार, कार्रवाई के दौरान गर्म पानी से भरा स्टीमर गिरने से वे गंभीर रूप से झुलस गईं। उनका कहना है कि वे मदद के लिए चीखती रहीं, लेकिन उन्हें समय पर राहत नहीं मिली। इसके बाद भी न्याय की लड़ाई आसान नहीं रही। उनका आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के लिए कई दिनों तक पुलिस थाने के चक्कर लगाने पड़े।
रेशु कहती हैं कि आज भी वह अपने इलाज का खर्च खुद और उनका परिवार उठा रहा है। वह किसी से बदला नहीं चाहतीं, सिर्फ निष्पक्ष जांच, इलाज में सहायता और न्याय की मांग कर रही हैं। उनका सबसे बड़ा दर्द यह है कि उनके चेहरे और भविष्य को लेकर उनके मन में गहरी चिंता है। वे कहती हैं, "मैं हारना नहीं चाहती... बस थोड़ा टूट गई हूं।"
रेशु ने सरकार से अपील की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो। उन्होंने अपने इलाज का पूरा खर्च, आर्थिक सहायता और सुरक्षा की भी मांग की है। साथ ही कहा कि यदि सड़क किनारे रोजगार गलत है, तो ऐसे लोगों को सम्मानजनक रोजगार का विकल्प दिया जाए।
यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि न्याय, संवेदनशीलता और जवाबदेही की कसौटी भी है। निष्पक्ष जांच और तथ्य सामने आना जरूरी है, ताकि पीड़ित को न्याय मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
पत्रकार:- मीडिया यहां आकर बच्चों से नीट का फुल फॉर्म पूछ रही है
अभिनय सर:- आजादी की लड़ाई में अगर फ्रीडम की फुल फॉर्म और स्पैलिंग पूछी जाती तो देश आजाद नहीं होता। उस वक्त साक्षरता भी इतनी नहीं थी
मुझे लगता है इस सवाल का इससे बेहतर जवाब नहीं हो सकता जो अभिनय सर ने दिया है 🔥
जंतर-मंतर पर जोरदार रोस्टिंग! 😂
प्रसिद्ध यूट्यूब शिक्षक अभिनय सर ने CJP के प्रदर्शन के दौरान रोस्ट करके जो मुद्दे की बात बोली है न 😄
यह सुनते ही वहां मौजूद लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाए।
राजस्थान काँग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष श्री @GovindDotasra जी के सुपुत्र के लिखित परीक्षा में 343 और साक्षात्कार में 85, बन गए RAS
एक महिला के लिखित में 425 और साक्षात्कार में 25, नहीं बन पाई RAS…
वाह रे न्याय…🤔
इस पर्यावरण दिवस वन्यजीवों के घरों का संरक्षण करें अपने खेत की मेड़ के पेड़ों को ना काटें बस इतना सा करें आप।नेताओं की तरह पोस्ट करने,एक पेड़ लगाने का दिखावा करने की जरूरत नहीं है।
घायल वन्यजीवों को कंधे पर ढोना,पेड़ लगाने का दिखावा करना ओर AC कमरो में बैठकर पर्यावरण पर भाषण देना ही पर्यावरण संरक्षण नहीं होता हैं।
आपको समझना होगा मित्रों हम जिस दिखावे की नियत से पर्यावरण संरक्षण के लिए अंधाधुंध काम कर रहे हैं जो तकनीकी रूप से गलत हो वो पर्यावरण संरक्षण नहीं है वो कई नकारात्मक परिणाम लेकर आता है।
एक AI विडियो देखा किसी मित्र ने जिसमें एक पेड़ के चारों ओर पानी की खैली बनाई हुई थी ओर उस बंधु ने वो खैली केर के पेड़ के चारों ओर बना दी।जो तकनीकी रूप से उस केर को जल्द ही जला देगी।क्योंकि केर को ट्यूबवेल का 4000 सेलिनीटी वाला पानी कुछ दिनों में जला देगा।खैली में दरारे आये बिना रह नहीं सकती इसलिए ऐसा नहीं करना चाहिए।हम सार्वजनिक रूप से कहते है कि वन्यजीव संरक्षण दिखावे से कहीं ज्यादा तकनीकी पहलुओं पर काम करने की चीज है।
खैली बनाने का ट्रेंड हमने शुरू किया था लेकिन बेहद ही तकनीकी पहलुओं पर ध्यान देकर हमने खैलिया बनाई थी।खाली पेड़ से दूर हो ताकि छांव में कुते ना बैठे,वन्यजीवों के विचरण स्थल,बैठने की आखरी,या सांडा ओर जर्ड के बिलों से दूर हो ताकि उन्हें विस्थापित ना होना पड़े।क्योंकि एक जल स्रोत पर अनेकों तरह के जीव पानी पीने आते है तो कोई भी जानवर अपना घर वहां नहीं रख सकता है।
ओर भी बहुत सारे तकनीकी पहलू है जिनका हमें पालन करना चाहिए।