ज़फ़र सरेशवाला ने डेड़ महीने पहले प्रधानमंत्री जी से 14 मुस्लिम व्यक्तियों के प्रतिनिधि-मंडल के साथ मिलने की इच्छा रखी.... निर्देश हुआ कि ज़फ़र सरेशवाला और उनका मुस्लिम शिष्ठमण्डल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजित डोभाल से मिल ले... (डोभाल साहब किसके प्रतिनिधि थे, यह बताने की ज़रूरत नहीं है, उनका कैबिनेट मिनिस्टर का दर्जा है और शक्तियों में वह नम्बर 2 या 3 माने जाते हैं)
देश के माने हुए 14 बेहद प्रभावी लोगों से युक्त प्रतिनिधि मण्डल ने 100 मिनट तक मुसलमानों के तमाम गिले शिकवे,अपेक्षाएं और मांगे खुल कर रखीं, अजित डोभाल का स्टाफ मुस्लिम शिष्ठमण्डल की सभी मांगों और शिकायतों को नोट कर रहा था... (लिंक नीचे)
1.प्रतिनिधि मण्डल ने बंगाल, यूपी और असम के मुख्यमंत्रियों के मुसलमानों के साथ व्यवहार की शिकायत की ...बुलडोजरों का ज़िक्र आया,अवैध मज़ारों,मस्जिदों इत्यादि को हटाने और लगातार नोटिस दिए जाने की शिकायतें कीं, मॉब लिंचिंग की शिकायत भी की गई.
2.मुसलमानों को घटती (?) सुविधाओं,शैक्षिक स्तर पर चर्चा की गई, मुसलमानों के लिए नौकरी,रंगनाथ मिश्रा और सच्चर कमेटी की रिपोर्टों को लागू करने की बात की गई (हालांकि सच्चर कमेटी की सभी संस्तुतियां, भाजपा की सभी सरकारों ने केंद्र और राज्य में कांग्रेस सरकारों से कहीं ज़्यादा प्रभावी तरीके से लागू की है...
3.मुस्लिमों के इस प्रतिनिधि मण्डल ने मुसलमानों के लिए 500 अलग शैक्षिक संस्थान खुलवाने और आर्थिक मदद देने की मांग की ,ज़फ़र सरेशवाला के अनुसार अजित डोभाल ने कहा कि शैक्षिक संस्थान आप लोग खोलें, उसके लिए धन की व्यवस्था देश के दस बड़े व्यापारिक घरानों की व्यवस्था 'हम' करवा देंगे...(लिंक देखें)
4.वक्फ बोर्डों और सुप्रीमकोर्ट में चल रहे मामलों पर भी ज़फ़र सरेशवाला के शिष्ठमण्डल ने सरकार से सहानभूतिपूर्वक विचार करने की मांग रखी अवश्य होगी...
5.राज्यो के मंत्रिमंडलों में मुस्लिमों को शामिल करने की डिमांड भी निसंदेह अवश्य उठी होगी...
6.यही स्थिति सैन्यबलों में भर्ती के सम्बंध में भी है..
जैसा कि अरफ़ा शबनम शेरवानी के साथ इंटरव्यू (लिंक कमेंट बॉक्स में )ज़फ़र सरेशवाला ने बताया,इस मीटिंग के बाद ज़फ़र सरेशवाला ने साहब से मुलाकात की , गौरतलब है कि इस मीटिंग के ठीक एक सप्ताह बाद ज़फ़र सरेशवाला ने असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंता विस्वास सरमा से लंबी मुलाकात की ! शुभेन्दु अधिकारी से भी ज़फ़र सरेशवाला जल्दी ही मिलने की उम्मीद कर रहा है... प्रधानमंत्री के हाथ जिसके सिर पर है,उससे मिलने को कौन मना कर सकता है ?
लखनऊ के सबसे बड़े लूलू माल ,जिसका मालिक केरल का मुस्लिम है और दुबई में रहता है,...उसको भी लखनऊ में स्थापित करने में ज़फ़र सरेशवाला की भूमिका हो सकती है, योगीजी से भी ज़फ़र सरेशवाला की मुलाकात होती रही है... और लूलू माल के मालिक से भी, मीडिया में चित्र उपलब्ध हैं....
इन मुलाकातों का क्या फर्क पड़ता है,उसका उदाहरण है कि यूपी में सभी मुस्लिम तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को मासिक भत्ता और आयुष कार्ड देने की परसों की घोषणा है...यहां तक कि असम और बंगाल में मुस्लिमों के लिए कुछ नई सुविधाओं की घोषणा होने की उम्मीद बंध गई है...
इधर हिंदुओं की स्थिति देखिये, हम इसमें ही खुश है कि इक्का दुक्का अवैध मस्जिद,दरगाह के ऊपर बुलडोजर चल जाता है,सोशल मीडिया वाले हिन्दू उन्हीं क्लिपिंग को डाल डाल कर मोदी,योगी के तराने गाते रहते हैं, मोदी ने मैलोनी को चॉकलेट पेश कर दी...इसी प्रपंच पर हम लट्टू हुए जा रहे हैं...
कुछ ''राधे राधे'' नाच-गाकर आत्ममुग्ध हैं...कुछ लड्डू गोपाल को नहला धुला, खिला कर ,शयन कराने में व्यस्त हैं... कोई निरर्थक काम हिंदुओं से छूटना नहीं चाहिए,कुछ नहीं तो 50 किलो खिचड़ी बनवा कर चौराहे पर पात्रों-कुपात्रों को फ्री खिला रहे हैं...
क्या आज तक हिंदुओं के किसी प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री इत्यादि से मिलकर अपनी चिंताओं को उन तक पहुचाने की चेष्ठा की ? PM/CM छोड़ो...हिन्दू तो अपनी समस्याओं के लिए जिले के DM तक से मिलने की हिम्मत और इच्छा नहीं जुटा पाते हैं !
यूपी के अनेक मंन्दिरों के पुजारियों की हत्या होने की लगातार खबरें आती हैं...वृंदावन/वाराणसी इत्यादि में धर्माचार्यों,महंतों और पॉलिटिकल संतों का डेरा है...कभी योगीजी से मिलकर मंन्दिरों और पुजारियों की लगातार होती हत्याओं पर सुरक्षा या आर्थिक हर्जाना मांगा ?
पिछले 12 वर्ष में प्रधानमंत्री की मुस्लिम प्रतिनिधिमंडलों से कम से कम 50 मुलाकातें अवश्य हुई होंगीं, वह बगैर वोट दिए... मनचाहा काम करा लेते हैं...
मोदी का दूसरा प्रहार आ रहा है,
धारा 30 समाप्त हो सकती है!"
मोदी ने हिंदुओं के साथ नेहरू द्वारा किए गए विश्वासघात को सुधारने के लिए पूरी तैयारी कर ली है।
क्या आपने "धारा 30" के बारे में सुना है?
क्या आप जानते हैं कि धारा 30 का मतलब क्या है?
'धारा 30' एक हिंदू-विरोधी कानून है, जिसे नेहरू ने अन्यायपूर्ण तरीके से संविधान में शामिल किया था!
जब नेहरू ने इस कानून को संविधान में शामिल करने का प्रयास किया, तो सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसका कड़ा विरोध किया।
सरदार पटेल ने कहा था,
"यह कानून हिंदुओं के साथ विश्वासघात है; अगर यह कानून संविधान में लाया गया तो मैं मंत्रिमंडल और कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दूंगा!"
आखिरकार, नेहरू को सरदार पटेल के प्रतिरोध के सामने झुकना पड़ा।
लेकिन दुर्भाग्यवश, इस घटना के कुछ समय बाद ही सरदार वल्लभभाई पटेल का अचानक निधन हो गया...!!
पटेल की मृत्यु के बाद नेहरू ने तुरंत इस कानून को संविधान में शामिल कर दिया! 😡
अब जानिए धारा 30 की विशेषताएँ...
इस कानून के अनुसार, हिंदू अपने 'सनातन धर्म' की शिक्षा स्कूलों और कॉलेजों में न तो दे सकते हैं और न ही ले सकते हैं!
क्या यह अजीब नहीं लगता?
"धारा 30" के तहत, मुसलमान और ईसाई अपने धर्म की शिक्षा देने के लिए इस्लामिक (मदरसा) और ईसाई (कॉन्वेंट) स्कूल चला सकते हैं, लेकिन हिंदू अपने गुरुकुल या वैदिक शिक्षा पर आधारित पारंपरिक स्कूल नहीं चला सकते, जो देश के मुख्य धर्म सनातन या हिंदू धर्म और संस्कृति को संरक्षित कर सके। यदि वे ऐसा करते हैं, तो उन्हें इस कानून के तहत दंडित किया जाएगा!
साथ ही, मस्जिदों और चर्चों में दान से जमा सारा पैसा और सोना केवल उन्हीं का होता है। वे उस संपत्ति का उपयोग अपने अनुयायियों को बढ़ावा देने और अशिक्षित या कम शिक्षित हिंदुओं को धन के लालच में धर्मांतरण के लिए करते हैं। लेकिन हिंदू मंदिरों में जमा धन और सोने पर सरकार का नियंत्रण होता है!
नेहरू ने यह सब उस कुटिल गांधी के साथ मिलकर किया ताकि मुसलमानों और ईसाइयों को हिंदुओं के धर्मांतरण में सुविधा हो सके।
"धारा 30" हिंदुओं के खिलाफ एक जानबूझकर किया गया विश्वासघात है!
मुस्लिम बच्चों के लिए अपनी धार्मिक पुस्तक, कुरान पढ़ना और सीखना अनिवार्य है, और यही नियम ईसाइयों पर लागू होता है! लेकिन हमारे हिंदुओं के बारे में क्या? हमें अपने एकमात्र धर्म, जो इस प्राचीन विज्ञान पर आधारित है, की सही समझ भी नहीं है!
आइए, हम सभी सनातन धर्म की रक्षा करें। इस लेख को पढ़ें, समझें और नेहरू और कुटिल गांधी द्वारा किए गए इस अन्याय के बारे में हर जगह जागरूकता फैलाएँ।
क्योंकि धारा 30 के कारण, हम अपने स्कूलों और कॉलेजों में भगवद गीता नहीं पढ़ा सकते हैं, जबकि यह हमारा सनातन धर्म देश है।
उतार दिया अमीरी का भूत 🔥
सफाई कर्मी लिफ्ट लॉबी में झाड़ू पोछा कर रहा
तभी एक सिक्कों की खनक पे नाचने वाली ने
जबरन वहां कूड़ा फेंका....
कर्मी ने रोका तो उसे थप्पड़ जड़ दिया
उसके बाद जो हुआ उसे देखकर आप कहोगे
बहुत सही किया गुरु... एक़ मेरी तरफ से भी ✍️
जब कंगना रनौत को थप्पड़ maa₹रा गया था, तब तुम्हारे चेहरों पर मुस्कान थी।
जब नरेंद्र मोदी के काफिले पर जूता उछाला गया, तब भी तुम ताली बजा रहे थे।
जब पंजाब में प्रधानमंत्री के काफिले को रास्ते में रोककर सुरक्षा से खिलवाड़ किया गया, तब भी तुम इसे मज़ाक समझ रहे थे।
जब अर्नब गोस्वामी को विमान में अपमानित किया गया और बाद में अपराधी की तरह घर से उठाकर ले जाया गया, तब भी तुम्हें मनोरंजन दिख रहा था।
जब कंगना का घर तोड़ा गया, तब भी तुम्हें न्याय नहीं, तमाशा दिखाई दिया।
जब Mamata Banerjee ने केंद्रीय संस्थाओं और राजनीतिक विरोधियों पर खुलेआम हमले किए, तब भी तुमने इसे साहस का नाम दिया।
जब जांच एजेंसियों को रोका गया, प्रशासन को चुनौती दी गई और कानून को ताक पर रखा गया, तब भी तुम चुप रहे।
जब भाजपा नेताओं पर हमले हुए, पत्थर चले और राजनीतिक हिंसा हुई, तब भी तुम्हें कोई खतरा नज़र नहीं आया।
जब पालघर मॉब लिचिंग में साधुओं की हत्या हुई, तब भी तुम्हारी संवेदनाएं गायब थीं।
जब राजनीतिक विरोधियों को जेल भेजा गया और सत्ता का इस्तेमाल प्रतिशोध के लिए हुआ, तब भी तुम लोकतंत्र की दुहाई नहीं दे रहे थे।
जब बंगाल चुनावों के बाद हिंसा में लोगों के घर जले, परिवार उजड़े और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया, तब भी तुम्हारी आवाज़ नहीं निकली।
जब चुनावी मैदान में विरोधियों को धमकाया गया, पीटा गया और डराने की कोशिश हुई, तब भी तुम्हें सब सामान्य लग रहा था।
जब गुंNडागर्दी, वसूली, कT-मनी और राजनीतिक आ टंकी का माहौल बना, तब भी तुमने आंखें बंद रखीं।
जब राजनीतिक कार्यालयों को आग लगाई गई, तब भी तुम्हारा गुस्सा कहीं दिखाई नहीं दिया।
जब राम, हिंदुत्व, सनातन और राम मंदिर पर लगातार कटाक्ष किए गए, तब भी तुम इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताकर बचाव करते रहे।
जब राजनीतिक विरोधियों पर विवादित और सवालों के घेरे में रहने वाले मुकदमे लगाए गए, तब भी तुमने कोई आपत्ति नहीं उठाई।
जब दूसरे देशों के आंदोलनों का हवाला देकर भारत में टकराव की राजनीति को हवा देने की कोशिश हुई, तब भी तुम उत्साहित थे।
सूची बहुत लंबी है। हर बार जब निशाना तुम्हारे विरोधी बने, तब तुम्हें सब जायज़ लगा। हर बार जब अपमान, हमला या हिंसा तुम्हारी विचारधारा के खिलाफ लोगों पर हुई, तब तुमने उसका बचाव किया।
लेकिन आज जब जनता सवाल पूछ रही है, जवाब मांग रही है, विरोध जता रही है और गुस्सा दिखा रही है, तब अचानक तुम्हें लोकतंत्र संकट में दिखाई देने लगा है।
कल तक जो हर अराजकता पर जश्न मनाते थे, आज वही लोग शालीनता और लोकतांत्रिक मर्यादा का पाठ पढ़ा रहे हैं।
समस्या विरोध से नहीं है, समस्या उस दोहरे मापदंड से है जिसमें अपने पक्ष की हर गलती क्रांति लगती है और विरोधी का हर प्रतिरोध अपराध।
देश की जनता सब देखती है, सब याद रखती है, और समय आने पर हिसाब भी करती है।
अखिलेश यादव जी का एक कारनामा सुन लीजिए
मुजफ्फरनगर में एक दंगा हुआ था वर्ष 2013 में ..
उस दंगे में हिंदू मुस्लिम मिलाकर लगभग 100 लोगों
की मौत हुई थी ..
उसके बाद समाजवादी पार्टी ने 90 करोड़ का मुआवजा घोषित किया वह भी केवल मुसलमान को
जो उस दंगे में हिंदू मरे थे उसके लिए कुछ नहीं था..
बाद में सुप्रीम कोर्ट फटकार के बाद उस मुआवजे में से हिन्दुओं को दिया गया ..
और आज कुछ हिंदू लोग 2027 में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना चाहते है .. सोचिए आप लोग
🙏🙏👇
ऐसी ही बेचैनी 25 सितंबर 2022 को हुई थी जब सचिन पायलट को सोनिया गांधी जी मुख्यमंत्री बनाना चाहती थी।
आज इतिहास फिर दोहराया जा रहा है जैसे ही सचिन पायलट का नाम प्रदेश अध्यक्ष की रेस में चला फिर से वही राग अलापा जा रहा है क्या अन्य किसी राज्य में आपको ऐसी बयानबाजी सुनाई दे रही है।
मध्यप्रदेश में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को राज्यसभा नहीं भेजा गया लेकिन दोनों ने चू तक नहीं की.. सिद्धरमैया को मुख्यमंत्री पद एक दिन की मीटिंग में राहुल गांधी ने हटा दिया लेकिन उन्होंने उफ़ तक नहीं की।
केसी वेणुगोपाल को केरल में मुख्यमंत्री नहीं बनाया लेकिन बीड़ी सतीशन और कांग्रेस आलाकमान के खिलाफ एक शब्द नहीं बोला।
सचिन पायलट के खिलाफ क्या क्या नहीं बोला लेकिन सचिन ने आज तक पलट कर जवाब तक नहीं दिया।
नीलकंठ की तरह जहर के हर घूंट को हंसते हुए पीते रहे।
आखिर कब तक चलेगा ये सब??
@SachinPilot
बड़ी खबर 🚨
एक व्लॉगर के कश्मीर अनुभव ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उनका दावा है कि जैसे ही वे भारतीय सेना, प्रधानमंत्री मोदी या योगी जी का नाम लेते हैं, कश्मीरी तुरंत आक्रामक हो जाते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कश्मीरी लोग अस्थिरता के लिए सेना को दोषी ठहराते हैं और आतंकवादियों को दोष देने के बजाय उस पर महिलाओं के प्रति "दुर्भावनापूर्ण इरादे" रखने का आरोप लगाते हैं। जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो उन्हें धमकियां दी गईं।
मार्टंड सूर्य मंदिर में, स्थानीय लोगों ने झूठ बोला और दावा किया कि मंदिर इस्लामी आक्रमणकारियों द्वारा नहीं, बल्कि "बिजली गिरने" से नष्ट हुआ था, और सच रिकॉर्ड करने पर उन्हें धमकाया।
उन्होंने एक बंद मंदिर में शिवलिंग भी पाया, जहां जलाभिषेक की अनुमति नहीं थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि "गोरखपुर" सुनते ही एक पुलिसकर्मी ने उन्हें परेशान किया और रिश्वत लेने के बाद ही उन्हें जाने दिया।
आपको क्या लगता है? मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने के प्रयास आज से थोड़े न चल रहे हैं। सत्ता सँभालने के तुरंत बाद ही ये उपक्रम शुरू कर दिया गया था।
2015 में जब मोदी सरकार ने विराट अनुभव वाले गजेंद्र चौहान को FTII का अध्यक्ष बनाया 4 महीने से भी अधिक समय तक विरोध प्रदर्शन किया गया। एक तरह से ये धमकी थी कि आप संस्थानों में अपनी विचारधारा के लोग नहीं बिठा सकते, और विशेषकर फ़िल्मी दुनिया में तो हस्तक्षेप नहीं ही कर सकते।
उसी वर्ष भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के बहाने किसानों को भड़काने की कोशिश की गई। यानी, किसानों को भड़काने की साज़िश भी पुरानी थी। अन्ना हजारे से लेकर मेधा पाटकर जैसों को जोड़ा गया। 2015 में ही भारतीय सेना में बगावत की ज़मीन तैयार करने का कुटिल प्रयास हुआ। OROP के बहाने सेना-इकोसिस्टम में घुसपैठ की कोशिश हुई।
अंत में थक-हारकर इन्होंने सोचा कि गुजरात भाजपा का पुराना गढ़ है और मोदी-शाह इसी प्रयोगशाला से निकले हैं तो सबसे पहले घर में वार किया जाए। पाटीदार आंदोलन भड़का दिया गया। एक 21 साल का लड़का यूँ ही आंदोलन का चेहरा नहीं बन गया। बाद में हार्दिक पटेल कांग्रेस में शामिल हो गए। अब भाजपा में हैं।
2016 आते-आते ये रोहित वेमुला नाम का शिगूफा लेकर आ गए और एक ऐसा व्यक्ति जो दलित नहीं था उसके बहाने दलितों को सरकार के ख़िलाफ़ करने की कोशिश की गई। फिर JNU में कन्हैया कुमार और उमर खालिद जैसों को पैदा करके अफजल गुरु को कल्ट साबित करने की कोशिश हुई। फिर ये राष्ट्रीय राजधानी को घेरने की साज़िश में लग गए। अंततः इन्हें जाट आरक्षण का मुद्दा मिला और पंजाब-हरियाणा में आग लगाने का तानाबाना बुना गया। यशपाल मलिक जैसों को खड़ा किया गया।
फिर इन्होंने सोचा कि भारत की कमज़ोर नस कश्मीर को छुआ जाए। वहाँ आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद जमकर युवाओं को भड़काया गया। हिज़्बुल-हुर्रियत से लेकर तमाम अलगाववादियों को सक्रिय कर दिया गया। पाकिस्तान से समर्थन आ ही गया। इन्हें अंदाज़ा नहीं था कि इसी कश्मीर में अनुच्छेद-370 और 35A के हटने के बाद पूर्ण लोकतंत्र लागू होगा और पाकिस्तान में घुस-घुसकर ऑपरेशंस होंगे।
पाटीदार आंदोलन की भीड़ देखकर और गुजरात में आने वाले चुनाव को देखकर इन्होंने फिर मोदी-शाह के गढ़ में दलित आंदोलन भड़काया और जिग्नेश मेवाणी को पैदा किया। इस तरह इनका 2016 ख़त्म हुआ और ये मोदी सरकार का कुछ नहीं उखाड़ पाए।
फिर इन्हें लगने लगा कि भाजपा को उसी की पिच पर परास्त किया जाए और उस क्षेत्र को चुना जाए जहाँ पार्टी अबतक पाँव नहीं जमा पाई है। ये पहुँचे तमिलनाडु। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ जल्लीकट्टू को लेकर माहौल बनाया गया। PETA खुलकर शामिल हुआ। फिर ये अलग-अलग जगह अलगाववाद भड़काने की कुटिल योजना में लग गए। पश्चिम बंगाल में दार्जीलिंग में गोरखालैंड के लिए आंदोलन भड़काया गया।
2018 आते-आते ये समझ चुके थे कि मोदी सरकार और मजबूत हो रही है। ऐसे में इन्होंने 2019 की तैयारी शुरू कर दी। भीमा-कोरेगाँव के बहाने फिर से दलित-वामपंथी गठबंधन बनाने की कोशिश हुई, अर्बन नक्सलियों को काम पर लगाया गया। प्रकाश आंबेडकर से लेकर 'एल्गर परिषद' तक सब बुद्धिजीवी वर्ग में मोदी सरकार के विरुद्ध माहौल बनाने में लग गए। सरकार ने धर-पकड़ शुरू की तो एमनेस्टी-CIVICUS जैसी संस्थाएँ अर्बन-नक्सलियों के समर्थन में उतर आईं।
गुजरात, रोहित वेमुला और भीमा-कोरेगाँव के बाद दलितों को भड़काने की एक और कोशिश हुई और इस बार भी जल्लिकट्टु की तरह सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बहाना बनाया गया। SC/ST एक्ट को लेकर ख़िलाफ़ देशभर में आग लगाई गई। मोदी सरकार ने क़दम पीछे लिए और जिस तरह से भूमि अधिग्रहण वाले अध्यादेश को लैप्स हो जाने दिया था वैसे ही इस बार एक्ट के कड़े प्रावधानों को पुनः स्थापित किया। तमिलनाडु के थूथुकुडी में एंटी-स्टरलाइट प्रोटेस्ट्स हुए।
फिर इन्हें लगा कि हमला सीधे हिन्दू धर्म पर करना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री पर से शर्त हटा दिया। तृप्ति देसाई और रेहाना फातिमा जैसे नास्तिकों व हिन्दू विरोधियों की चाल सफल हुई। पूरे केरल में हिन्दू सड़क पर उतर आए, लेफ्ट सरकार ने जमकर लाठियाँ बरसाईं और केस पर केस दर्ज किए।
खैर... इतना कुछ होने के बावजूद 2019 में एक बार फिर से भाजपा पहले से भी अधिक बहुमत के साथ सत्ता में आ गई तो विदेश में बैठी ताक़तों के कान खड़े हो गए। तबतक दुनियाभर में मोदी की जन-कल्याणकारी व जन-उत्थान की योजनाओं का डंका बज चुका था। विदेश में मोदी के जाते ही गर्वित भारतीय प्रवासी समुदाय उत्साहित हो जाता था। तख़्तापलट की साज़िश रचने वाली शक्तियों ने इस बार कुछ बड़ा करने की सोची।
किसान और मुसलमान - दो वर्ग चुने गए। किसानों में भी पंजाब-हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शक्तिशाली किसान। बिहार-बंगाल वाले मेहनती किसान नहीं। शाहीन बाग़ में CAA के ख़िलाफ़ तम्बू लग गया और दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का। साल भर ड्रामा चलता रहा, AAP सरकार दोनों को दाना-पानी देती रही। तबतक मोदी सरकार भी समझ चुकी थी कि बल-प्रयोग से मामला बिगड़ेगा। किसानों की बात मानते हुए तीनों कृषि क़ानून स्वयं प्रधानमंत्री ने TV पर आकर वापस लेने की घोषणा की। शाहीन बाग़ उपद्रव दिल्ली दंगों में परिवर्तित हुआ और हिन्दुओं का नरसंहार हुआ, तब दंगाइयों पर कार्रवाई शुरू हुई। हिकेन्स नेक को काटकर भारत के टुकड़े-टुकड़े करने की मंशा रखने वाला शरजील इमाम जेल गया।
2020-21 में इन दोनों उपद्रवों के विफल होने के बाद विदेश में बैठी ताक़तों को बहुत बड़ा झटका लगा। वो समझ नहीं पा रहे थे कि करें क्या। उन्होंने कोरोना महामारी को ही औजार बनाने की ठानी। लॉकडाउन के बीच प्रवासी मजदूरों में भय पैदा करने की कोशिश हुई। उनसे प्रदर्शन करवाए गए। इसी बीच हाथरस में एक लड़की की मौत के बहाने दलितों को फिर से भड़काया गया। इन्हें योगी में मोदी से भी बड़ा ख़तरा नज़र आने लगा। चंद्रशेखर आज़ाद 'रावण' जैसे खिलाड़ी उभरे। योगी के ख़िलाफ़ षड्यंत्र रचे जाने लगे। 2022 में योगी की वापसी हुई। गैंग को झटका लगा, ये कन्फ्यूज्ड हो गए।
कांग्रेस पार्टी परेशान हो गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि कौन सा मुद्दा चुनें। पत्रकारों को अपने पाले में करके सड़क से लेकर संसद तक पेगासस जैसे जासूसी सॉफ्टवेयर के ख़िलाफ़ माहौल बनाया गया और इज़रायल के साथ सम्बन्ध ख़राब करने की कोशिश की गई।
2022 में इन्हें अग्निपथ का मुद्दा मिल गया। इन्हें लगने लगा कि अग्निवीर योजना से भारतीय सेना और अधिक ऊर्जावान व युवा हो जाएगी। इनके लिए ख़तरे की घंटी बज गई और इन्होंने देशभर में युवाओं को भड़काकर सार्वजनिक संपत्तियों का जमकर नुक़सान करवाया। FTII के समय इन्होंने फ़िल्म जगत को चुना था, आख़िरकार 2022 में ये खेल जगत पर पहुँचे। फिर से हरियाणा की एक लॉबी को सक्रिय किया गया और बृजभूषण शरण सिंह को बलि का बकरा चुना गया। पहलवानों ने जमकर आंदोलन किया, बृजभूषण WFI अध्यक्ष नहीं रहे और उन्हें सांसदी का टिकट नहीं मिला। विनेश फोगाट विधायक बन गईं। हालाँकि, ये आंदोलन भी विफल हुआ। बृजभूषण के बेटे सांसद बने और WFI अध्यक्ष पद पर उन्होंने अपने वफादार को बिठाया।
अंततः ये अम्बानी-अम्बानी करके भी थक चुके थे तो इन्होंने सोचा कि अडानी पर वार करते हैं। हिंडेनबर्ग को लाया गया। अडानी के ख़िलाफ़ रिपोर्ट पब्लिश करवाकर कंपनी के शेयर्स गिरा दिए गए। अमेरिका में केस करवा दिए गए। अंत में हुआ क्या? हिंडेनबर्ग बंद हो गया। पिछले ही दिनों अमेरिका ने अडानी के विरुद्ध चल रहे सारे मुक़दमों को बंद करने का ऐलान किया।
गुजरात, तमिलनाडु, कश्मीर, केरल और पश्चिम बंगाल के बाद इन्होंने नॉर्थ-ईस्ट को चुना। एक हिन्दू समाज को जनजातीय का दर्जा न मिल पाए, इसके लिए पूरे मणिपुर को जला दिया गया। फिर से कोर्ट के एक फ़ैसले को पकड़ा गया। जमकर विदेश से फंड आए, सारे चर्च आग लगाने में जुट गए और भाजपा को अपनी ही चुनी हुई सरकार को बरख़ास्त करना पड़ा। सैकड़ों लोग मारे गए। मैतेई हिन्दुओं के लिए किसी को सहानुभूति नहीं रही, ईसाई कुकी के लिए दुनियाभर से आवाज़ें आने लगीं।
मणिपुर के साथ-साथ महाराष्ट्र में भी इनका गेम चल रहा था। वहाँ मनोज जरांगे को पैदा करके मराठा आरक्षण को फिर से उभार दिया गया। जगह-जगह समाजों को लड़ाया जाने लगा। तबतक जाति जनगणना और आंबेडकर का मुद्दा उठाया ही जा चुका था। आरक्षण और संविधान ख़त्म करने के शिगूफे को चुनावी माहौल में ढाला गया। NEET पेपर लीक के कारण सरकार घिरी ही हुई थी, इस बहाने इन्हें बांग्लादेश और नेपाल में Gen Z प्रदर्शनों को भारत में दोहराने के सपने आने लगे। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले किसानों को भी फिर से एक्टिव किया गया और किसान आंदोलन वापस शुरू करवा दिया गया।
फिर... 2024 में BJP अकेले दम पर बहुमत से दूर रह गई और उसकी 240 सीटें आईं। विपक्षी खेमे में जमकर जश्न मनाया गया। हालाँकि, TDP-JDU ने सरकार तो बनवा दी लेकिन नीतीश-नायडू पर दबाव बनाया जाने लगा। मोदी सरकार संघ परिवार की पुरानी नीतियों पर ज़ोर-शोर से आगे बढ़ने लगी तब इन्हें समझ आया कि इतनी आसानी से मोदी-शाह को मात नहीं दी जा सकती। सारे उपक्रम फेल हुए।
सोनम वांगचुक को पालपोसकर बड़ा किया गया कि कम से कम लद्दाख में तो आग लगे और चीन को ही ख़ुश किया जाए। इस बार सरकार होशियार थी, तुरंत जेल में पटक दिया। लद्दाख में ये मणिपुर दोहरा नहीं पाए। तमाम विदेशी NGO बंद होने और NGOs को विदेशी फंडिंग बंद होने के कारण पूरा इकोसिस्टम दबाव में है। ये बहुत कुछ करने की औक़ात नहीं रखते हैं अब। ये नरेंद्र मोदी के लिए तैयारियाँ कर रहे थे, अमित शाह आउट ऑफ सिलेबस आ गए इनके लिए।
पूरा विश्व युद्ध के झोंके महसूस कर रहा है। पेट्रोल-डीजल की किल्लत है। विपक्ष अब इधर ही उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समस्या के आने से पूर्व ही देशवासियों को आगाह करके रखते हैं। Gen Z को फिर से NEET के बहाने भड़काने की कोशिश चल रही है, सुगम परीक्षाएँ संचालित करवाना सरकार के लिए चुनौती है और ये समस्या जायज भी है। सरकार को इसपर काम करना होगा। एक बार फिर से खालिस्तानी किसानों को भड़काने की कोशिश हो रही है।
फिर आ गए ये कॉकरोच! तिलचट्टों से सबको बहुत उम्मीदें थीं। सोशल मीडिया पर जमकर फॉलोवर्स मिले, ज़मीन पर डफली गैंग के अलावा कोई नहीं पहुँचा। दिल्ली में AAP और पश्चिम बंगाल में TMC की हार ने ऐसा सदमा दिया है कि बड़े से बड़े रिजीम चेंज एक्सपर्ट्स भी भारत आकर पानी माँग रहे थे। कॉकरोचों वाली तैयारी बड़ी थी, लेकिन देश की मनोरंजन-पसंद जनता ने इन जोकरों को भाव नहीं दिया और जमकर मजे लिए। अभिजीत दीपके तो वृंदा करात का चेला निकला और सौरव दास से गर्मी नहीं बर्दाश्त हो रही।
हमें सजग रहना है। विदेशी ताक़तें सामान्यतः हार नहीं मानतीं लेकिन कोरोना से लेकर युद्ध जैसी स्थितियों में भी भारत ने जिस तरह के धैर्य का परिचय दिया है और यहाँ के नेतृत्व ने जिस तरह की इच्छाशक्ति का प्रदर्शन किया है, उसने भारत विरोधी शक्तियों को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने को विवश कर दिया है। जो श्रीलंका से लेकर पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल तक में सफल हो गया, वो भारत में मनोरंजन का मसाला बनकर रह गया।
MP-MLA न्यायालय ने बिहार के भाजपा विधायक को दोषी ठहराया और पुलिस हिरासत में लेने का आदेश दिया।
Delhi's Rouse Avenue court convicted Bihar's Sahibganj BJP MLA Raju Kumar Singh for culpable homicide not amounting to murder and Arms Act. The court ordered him to be taken into custody. He has been convicted under Section 304 Part 2 and 30 Arms Act. The court has acquitted his wife Renu Singh, Rana Rajesh Singh, Ramendra Singh of all charges.
This case pertains to death of Dr. Archana Gupta due to celebratory fire in a party on New Year's Eve on December 31, 2018. An FIR was registered at Fatehpur Beri Police Station.
बांग्लादेश
60 वर्षीय सजेदा बेगम, जो मुश्किल से चल पाती हैं, रात में लापता हो गईं। उसे अगले सुबह कुरीग्राम में एक कब्रिस्तान के पास इमली के पेड़ की ऊपरी टहनियों पर नाचते हुए पाया गया।
गाँव वालों का कहना है कि उनके लिए इतनी ऊँचाई पर चढ़ना असंभव है , और कई लोगों ने इसे एक जिन्न से हुआ घटना बताया।
कैसे-कैसे जिन्न है भाई महिला को उठाकर इमली के पेड़ पर रख देते हैं
😂😂😂😂
Shame on the Modi govt for using the police to beat youths just for protesting for jobs... Oh wait... This video is from AAP ruled state Punjab... Cockroach @ArvindKejriwal is the Super CM of the state...
खौफनाक।
मोहाली में दिल दहला देने वाली वारदात 30 वर्षीय महिला डिंपल की उसके पूर्व प्रेमी ने कथित तौर पर ऑफिस के अंदर चाकू मारकर हत्या कर दी।
घटना के बाद आरोपी ने खुद पर भी चाकू से हमला कर लिया। गंभीर रूप से घायल आरोपी अस्पताल में भर्ती है, जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
This was Ponting’s best chance to register a test win in India as an Australian Test Captain but he couldn’t. He never won a test in India as a captain.
All 40 wickets in Mumbai, 2004 👇🏼
20 wickets fell on the third and final day after 18 had already tumbled on Day 2 - a Test match that turned into absolute chaos at the Wankhede Stadium.
घुसपैठियों की गिरफ्तारी शुरू-🔥
अखिलेश यादव कहते थे, कहां हैं घुसपैठिए?
अखिलेश जी देखो! चंडोला, गुलाब नगर आदि इलाकों में अभियान चलाकर 290 से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठियों को हिरासत में लिया गया।