RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
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अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
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सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
@ajeetbharti "आरक्षण pda का अधिकार है" by Akhilesh Yadav? फिर तो उनके "Pd का मतलब पंडित" नहीं रह गया? 😄 गजब टोपीबाजी चल रही है। वोट माँग किससे रहे हैं नेता जी? इस आन्दोलन में तो SC, ST, OBC सभी साथ खड़े हैं!
@yadavakhilesh "आरक्षण pda का अधिकार है"? फिर तो आपके "Pd का मतलब पंडित" नहीं रह गया? 😄 गजब टोपीबाजी चल रही है। अच्छा इतना बताइये, वोट माँग किससे रहे हैं नेता जी? इस आन्दोलन में तो SC, ST, OBC सभी साथ खड़े हैं!
जिस उत्तम नगर में जिहादियों की भीड़ ने की थी तरुण की हत्या, अब वहां हिंदू लड़कियां भी निशाने पर
एक हिंदू लड़की को फंसाने के लिए समद कुरैशी को मिलते थे ₹40 हजार
ग्राउंड जीरो से पूरा मामला बता रहे हैं @Keshavmalan93
My dear lady,
Soldiers pay their taxes in advance, even before they get their pay.
You can go for vacation to such areas bcoz our soldiers are guarding it day & night, even at the cost of their lives.
Your Language is the reflection of good parenting & schooling. Be respectful always.
Learn to be a good law abiding citizen before asking for entitlement.
And lastly ….
“Get Well Soon”
Jai Hind 🇮🇳
प्रति सप्ताह 2-3 बाबुओं को नगर निगम से ले कर सचिव स्तर तक यदि नहीं निकला जाता रहा, तो हम अभी और भी माइक्रो आंदोलन देखेंगे। निगम स्तर का भ्रष्टाचार चरम पर है, और उनसे कोई काम होता नहीं। सामान्यतः जिन सड़कों, विद्यालयों, नालों और अन्य सुविधाओं के लिए हम विधायक-सांसदों को कोसते हैं, उनकी जड़ में एक चोर ब्यूरोक्रेट बैठा हुआ होता है।
चाहे मोदी हों या योगी, दोनों ही इस कैन्सरकारी व्यवस्था के शिकार हैं। सरकार के जितने बड़े आयोजन हो रहे हैं, उसमें यही लोग सबसे अधिक डकैती डाल रहे हैं।
CAA आंदोलन वन-डे विश्वकप जैसा था, किसान आंदोलन टेस्ट चैंपियनशिप जैसा और तिलचट्टा वाला T20 इवेंट! तिलचट्टों ने यह दिखाया कि सरकार को 3 दिन में भी झुकाया जा सकता है। इसलिए, अब 'हंड्रेड' और T10 फॉर्मेट के छोटे-छोटे आंदोलन जन्म ले रहे हैं।
भारत में कुछ समस्याएँ रैंडम कालखंड में, रैंडम जगहों पर मिल जाएँगी: बेरोजगारी, टूटे स्कूल, खुले नाले, ख़राब सड़कें, घूस लेता अधिकारी आदि। आप सरकार देख लो कौन है, फिर आप आंदोलन तय कर सकते हो। बच्चों के नाम पर अनपढ़ और असफल लोग अपनी नेतागीरी चमकाना चाह रहे हैं, और वो इसमें सफल भी हो रहे हैं।
जिनको अपनी बुद्धि के आधार पर अपने गाँव के विद्यालय में घुसने न दिया जाए, वो स्कूल की इंस्पेक्शन कर रहे हैं! कोई यह नहीं पूछ रहा कि वो होते कौन हैं और कौन सा क़ानून या निर्देश उन्हें ऐसा करने की अनुमति देता है?
आप पूछेंगे कि क्यों नहीं घुस सकता कोई भी? आप स्कूल में नहीं घुस सकते, आप शिक्षा अधिकारी के कार्यालय को घेर सकते हैं, उसे घसीट सकते हैं, पर जब ब्रांडिंग करनी होती है तो ऐसी ही नौटंकियाँ की जाती हैं जहाँ सरकार दोनों ही स्थिति में फँसी दिखे।
इसे घुसने दो तो हर जगह सरकारी स्कूलों की नाकामी, सेलेक्टिव रूप से दिखायी जाएगी। ना घुसने दो तो कहा जाएगा कि सरकार क्या छुपा रही है। सरकार को क्या करना चाहिए, वो सरकार जाने, पर जो है वो यही है।
यह सत्य है कि शिक्षा इस सरकार की अंतिम प्राथमिकता है। जब आपका ध्यान दलित-वंचित में घुसा हुआ हो, तो स्कूल पीछे रहेंगे ही। जब राज्य सरकारें लाड़ला भाई और लाड़की बहिन योजना में घुसी हो, तो बजट में स्कूल ही पिछड़ता है।
मुझे वामपंथी कीड़ों से घिन आती है। वो सिलेक्टिव हैं, उनकी मंशा चीजों को सही करने की नहीं, अपनी ब्रांडिंग की होती है, वो भावुकता का लाभ उठाते हैं। सरकार ने इन्हें सर पर बिठा कर इस मॉडल के रेप्लिकेशन का रास्ता सुगम कर दिया है। पर सत्य तो यही है कि जो चीजें फिक्स हो सकती थीं, वो खुले घाव की तरह पसर रही है।
सुना है प्राइमरी स्कूल के बच्चे लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे हैं और मुख्यमंत्री से मिलना चाहते हैं!
लखनऊ के कैब ड्राइवर का सच अब सामने आ चुका है!!
वो रेलवे के 4 कर्मचारियों को झूठे SC/ST एक्ट में फंसाना चाहता था!
इसी उद्देश्य से उसने वीडियो भी बनाया!
लेकिन उसको पता नहीं था कि उन 4 लोगों में 2 लोग SC (चमार जाति के ही), 1 ST और 1 OBC थे!
और किसी जातिसूचक शब्द का प्रयोग भी नहीं हुआ था!
गनीमत रही कि ये लोग खुद SC/ST समाज से थे, और चूंकि उसी जाति से थे जिसका नाम लेकर कैब ड्राइवर उनको फंसाना चाहता था, तो वो बच गए!
लेकिन सोचिये, अगर ये सामान्य वर्ग के होते, तो आज बिना किसी गुनाह के जेल में होते!
कमाल ये कि दलित संगठन इन SC/ST कर्मचारियों की बात नहीं सुन रहे बल्कि उस कैब ड्राइवर की बात उठा रहे हैं!
साफ दिखाता है कि उनको ना अपने समाज से मतलब है, ना सामाजिक न्याय से! उनको सिर्फ इस एक्ट को बनाये रखना है, भले ही इसमें अपने ही लोगों को फंसाना पड़े!
जाति का सर्टिफिकेट माँगने वाले, स्वयं की जाति को 'बैकवर्ड' में सम्मिलित करने के लिए आंदोलन करने वाले कह रहे हैं कि आरक्षण किसी की दया नहीं है! वर्तमान रूप में, दया ही है, भीख ही है, बैसाखी ही है! कमाने वाले सवर्ण जिस दिन टैक्स देना बंद कर देंगे, तुम्हारी फ़ीस सरकार अपनी जेब से नहीं भरेगी। इसलिए, कृतज्ञता दिखाओ, बकचोदी मत करो।
@AnupamNawada हमारी प्रार्थनायें और शुभकामनायें हमेशा साथ रही हैं अनुपम.. साथ ही रहेंगी। कदाचित पहचान लायक यह आईडी नहीं है परन्तु उससे कोई अन्तर नहीं पड़ता मित्र। कर्तव्यनिष्ठता कठिन तो है परन्तु रात में नीन्द अच्छी आती है। सदैव शुभ..
अभी आप सबने केजरीवाल का 'मोदी को ठोकने आए थे' वाला वीडियो देखा होगा। फिर आपने यह भी देखा होगा कि भाजपा के आधिकारिक हैंडलों और संबद्ध लोगों के द्वारा उसकी भर्त्सना की जा रही है। ऐसे ही 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' और 'मोदी का &^ छोटा है' समेत अन्य गालियों पर भी प्रतिक्रिया देखी है।
संसद से ले कर डिजिटल स्पेस में 'मोदी पर तिनका भी गिरे' तो एक तूफ़ान लाया जाता है। पर दुर्भाग्य देखिए कि यही सारे लोग 'ब्राह्मणवाद से आज़ादी' और 'ब्राह्मणों की छाती पर' जैसे नरसंहार के कॉल पर चुप रहे। भाजपा का एक भी हैंडल 'ब्राह्मणों की कब्र खुदेगी' के बोले और लिखे नारों पर आज तक एक शब्द बोलता नहीं दिखा।
इसलिए, इन दोगलों से, जो इन हैंडल्स के प्रत्यक्ष और परोक्ष संचालक हैं, इनसे पूछा जाना चाहिए कि क्या मोदी का अपमान, पूरे ब्राह्मण समाज के अपमान और नरसंहार की योजना से ऊपर है? क्या आपने पूरी तरह से सवर्णों को उनकी जगह दिखा दी है या अभी कुछ और देखना बाक़ी है।
मुझे भी मोदी को दी जाने वाली गालियों से घिन आती है, लिखा और लिखता रहूँगा, पर मैं यूनिवर्सिटी के दीवारों पर 'ब्राह्मणों वापस जाओ', 'ब्राह्मणों की कब्र खुदेगी' के नारों पर भी उतना ही चिंतित हूँ। और यह एक दिन फटेगा।