पिछले चार वर्षों में मेरे साथ यह तीसरी बार हुआ है कि मेरा अकाउंट हैक कर लिया गया है। सभी सुरक्षा उपाय और प्राइवेसी सेटिंग्स चालू रखने के बाद भी ऐसा हुआ। पहले मेरे 14,000 फॉलोअर्स थे, फिर 11,000 और अब लगभग 6,000 फॉलोअर्स वाले अकाउंट को आज सुबह फिर से हैक कर लिया गया। 🙂
मेरी ज़िंदगी का एक सच ये भी है कि मैं आज तक जब भी रोया हूँ, या यूँ कहूँ कि जिसकी वजह से भी रोया हूँ... मैंने उसकी ज़िंदगी हर तरह से बर्बाद की है। एक बदला कह लो, या मेरा अंदर का बिखराव, पर ये होता आया है।
और आज... आज मैं फिर रोया हूँ। पर इस बार रोने से ज़्यादा डर इस बात का लग रहा है, कि मैं फिर से वही सब करने जा रहा हूँ। कुछ ऐसा, जो मैं अब कभी किसी के साथ नहीं करना चाहता था। पर लगता है ये सिलसिला मुझसे छूट नहीं रहा।
और जानते हो, इस परिधि की सबसे सुंदर बात क्या है? कि ये लाल चूड़ियाँ जब बाज़ार से किसी काग़ज़ में लिपटकर घर तक आती हैं, तब तक ये महज़ एक काँच का टुकड़ा होती हैं। लेकिन जैसे ही ये तुम्हारी कलाई को छूती हैं, इनमें एक धड़कन सी आ जाती है।
ये सिर्फ तुम्हारी कलाई को नहीं सजातीं, बल्कि मेरे प्रेम, मेरी प्रार्थनाओं और हमारी खामोशियों को एक रंग दे देती हैं। सच में, हृदय की गहराइयों में रचे गए बंधनों को किसी दिखावे की नहीं, बस ऐसे ही एक स्नेहिल स्पर्श की ज़रूरत होती है।🙌❤️
तुम्हारी लाल चूड़ियों की इस सुंदर परिधि में केवल रंग नहीं बसता, बल्कि.. प्रतीक्षा, विश्वास और समर्पण के अनगिनत भाव सिमटे हैं। जब ये तुम्हारी कलाई को सजाती हैं तो वो स्नेहिल स्पर्श मानो धीमे से कहता है कि कुछ बंधन, कुछ भाव.. यूं ही नहीं बनते। वे हृदय की गहराइयों में रचे जाते हैं।
बदसूरतों की उस कतार में सबसे पहला नाम उन्हीं का होता है। जो रोते हुए को अकेला छोड़ कर भाग जाएँ, वो मुस्कुराते हुए चेहरे के साथ वापस लौट भी आएं, तो उनकी चमक फीकी ही लगती है।
तुम्हारे और मेरे मिलन से जन्मी थी एक कवयित्री। तुम्हारे जाने के बाद उसने सब कुछ ही दुःख समझना शुरू कर दिया। दुःख ने ही उसका पालन-पोषण किया, उसे शब्द दिए, अर्थ दिए और जीवित रखा।
अब यदि तुम लौट आओ, तो वह कवयित्री शायद खुशी से ही मर जाए। इसलिए मैं तुम्हारे लौटने की प्रार्थना भी नहीं करता... मैं नहीं चाहता कि वह कवयित्री मर जाए।
Most people found this #AIBE21 exam tough, there's no point in asking them about their scores from the official answer key.
But for one particular guy, this was the easiest exam of his life! So, we absolutely have to ask.... how much did our brother score? @akshitsoni_
सुबह के 4 बजकर 40 मिनट पर फोन की स्क्रीन पर तीन मैसेज पॉप अप होते हैं " सुनो, "गुड मॉर्निंग", "उठते ही कॉल करना मुझे याद से..."।
रात को ठीक से नींद नहीं आने के कारण मैं उठा ही हुआ था और अलार्म बंद करके बस लेटा ही था इसलिए जैसे ही मैसेज आए, उन्हें देखते ही उसी समय डायरेक्ट कॉल किया और कॉल करते करते मैं Terrace पर पहुंच गया। सामने से आवाज़ आती है, और वो भी सिसकियों के साथ रोते हुए।
(वो रोते हुए उठी थी, नींद में बहुत डर गई थी।)
अगले 3 मिनट तक सामने से रोते हुए सिर्फ एक ही sentence रिपीट किया जा रहा था "लव यू जी, लव यू जी...++++ " और यह सब रोते रोते ही बोला जा रहा था।
तभी डायरेक्ट वीडियो कॉल किया गया। आंसू आंखों के ठीक नीचे थे, और चेहरा ऐसा था जैसे कुछ ऐसा देख लिया हो जिसके सपने में भी सच न होने की हम प्रार्थना करते हैं।
पूछने पर बताया गया कि डर गई थी "आप आज जब बाहर जाओ, अपनी बाइक अच्छे से चेक करवा के तभी निकलना।" मैंने sense कर लिया था कि कुछ तो ऐसा देखा है जो सपने में भी नहीं दिखना चाहिए था।
जैसे तैसे करके थोड़ा हंसी मजाक किया गया ताकि वो नॉर्मल हो सके। फिर सुबह 7 बजकर 15 मिनट पर फोन यह कहकर रख दिया गया कि "शाम को करता हूँ बात आकर आराम से।"
यह सच है कि रिलेशनशिप में होने के बावजूद हम शादियां बहुत सालों के बाद करते हैं, पर इससे बड़ा सच यह भी है कि आप दोनों एक-दूसरे को अपने पार्टनर की तरह सालों पहले ही वैसे ही ट्रीट करने लग जाते हो जैसा कि शादी के बाद होना चाहिए था।
"कुछ चेहरे रोते हुए कभी अच्छे नहीं लगते" यह मैं हमेशा उसको बोलता हूँ। पर सामने से जवाब हमेशा same रहा "एक आप ही बचे हो लास्ट इस लाइफ में जिसके सामने कुछ show कर पा रही हूँ, नहीं तो किसी से भी कुछ कहने का, बताने का अब मन भी नहीं करता। तो चुपचाप सुन लिया करो मेरा सब, ज्यादा सवाल जवाब करने की ज़रूरत नहीं है। चलो अब एक किस दो और पढ़ो अपना जाके... 🤭❤️🧿"
कुछ दिन बात करने के बाद हमने तय समय पर मिलने के लिए दिल्ली का कनॉट प्लेस (Connaught Place) चुना। हम दोनों अपने ठीक समय पर घर से निकले और दिए हुए समय पर दोनों ही लंच के लिए Haldiram पहुँचे। यहाँ पर हमने लंच किया, आइसक्रीम खाई और फिर बाद में मूवी देखी।
रात के करीब 8 बजे हमें लगा कि कहीं उनका (PG) बंद न हो जाए, तो वार्डन को कॉल करके बोला कि आज थोड़ा लेट आया जाएगा, फ्रेंड आया हुआ है मिलने। उन्होंने हाँ का सिग्नल दे दिया। इसके बाद उन्होंने कहा "क्या हम आपके लिए (shoes) देखें? मुझे पर्सनली अच्छा लगेगा अगर
आप agree करो तो।"
मैंने छिपते छिपाते अपना wallet चेक किया कि (around) 4800 रुपये हैं मेरे पास, जो कि मैं ठीक से बजट में खरीद सकता हूँ। हम एक अच्छे ब्रांड के शोरूम में एंटर हुए और जो भी (choose) किया, सब मैडम ने ही किया। मुझे क्लियरली बोला गया "shoe मेरी पसंद के ही लेंगे हम इस बार, आपकी पसंद के फिर कभी देख लेंगे।"
मैं बैठ गया और शूज़ ट्राई करता रहा। एक शू उन्हें पसंद आया और फाइनली उन्होंने मुझसे ही पूछकर फाइनल किया कि "अच्छा लगा तुम्हें?"* और मैंने हाँ कहा।
मैंने शूज़ जल्दी से पहने कि रेट पता कर लूँ, अगर बजट से ज़्यादा हुआ तो मैं बोल दूँगा कि इतने भी अच्छे नहीं हैं। लेकिन मेरे काउंटर पर पहुँचने से पहले ही बिल pay हो चुका था और शूज़ का प्राइस था अराउंड 18,000 रुपए...
मैंने बिल देखा और उनसे कहा कि ये बहुत (costly) हैं, हम ठीक से बजट में भी ले सकते थे सामने से रिप्लाई आता है "शूज़ कंफर्टेबल और अच्छे लगे या नहीं, पहले बस ये बताओ।"
मैंने कहा "कंफर्टेबल भी हैं और अच्छे भी, but बजट फ्रेंडली नहीं लगे।"
तब उन्होंने कहा "तो कितना बजट था तुम्हारा?"
मैंने कहा "4500 Maximum"
तो सामने से जवाब आता है "चलो फिर, अपने 4500 के बजट में से आज मुझे इंडिया गेट घुमा दो। मैं कभी शाम को वहाँ नहीं गई, सुना है अच्छा क्राउड रहता है। शायद थोड़ा और अच्छा एंड हो जाए हमारे इस मिलने का, क्योंकि मैं चाहती हूँ कि हमारी यादें और अच्छी बनें इस दिन की।"
हमने ऑटो लिया और इंडिया गेट पहुँचे। वहाँ पर हमने उनकी पसंद की आइसक्रीम खाई। फिर उन्होंने कहा "अपना वॉलेट देना, मेरे पास चेंज नहीं हैं इन भैया को देने के लिए।" उन्होंने भैया को pay किया और वॉलेट कुछ समय बाद मुझे वापस दे दिया।
अच्छे से सब जगह घुमाने के बाद, हमने डिनर किया और वहाँ से उनको उनके पीजी छोड़कर मैं अपने रूम पर वापस आ गया। उनको पीजी छोड़ने के बाद जब मैं वापस आ रहा था, तो मैंने वॉलेट निकाला... और उसमें 5000 रुपये कैश उन्होंने रख दिया था!
रूम पर पहुँचकर मैंने कॉल किया और पूछा कि उन्होंने ये 5000 मेरे वॉलेट में अलग से क्यों डाले? तो सामने से रिप्लाई आता है.....
"हम दोबारा भी घूमने चलेंगे जल्द ही, और मैं चाहती हूँ कि आप मेरे लिए कुछ अच्छा सा खरीदें and जो खरीदोगे, वही पहनकर चलना है नेक्स्ट टाइम। so अपनी पसंद का खरीदना कुछ, और अपने बजट में ही खरीदना मेरे लिए... क्योंकि मेरे पास सिर्फ पैसे थे जिससे मैंने आपके लिए कुछ खरीदा, but आपके पास समझ भी है कि कितना ठीक है और कितना नहीं। So उम्मीद करती हूँ आप समझ रहे होंगे कि मैं क्या कहना चाह रही हूँ..." और मैंने हाँ में हाँ मिलाया और हमने फोन रख दिया।
P.S~ हमारे वाली ने तो राजा की तरह रखा था हमें तो हमेशा से... बाकी 370 रुपये खर्च करने वाले रोते रहें, क्योंकि आप थे भी इसी लायक!
@Storytellerrr_
ट्विटर पर कुछ लोग ऐसे हैं जिनकी मैं दिल से बहुत इज़्ज़त करता हूँ। बिना किसी मतलब या फायदे के, जब भी उन्हें देखता हूँ तो बहुत पॉजिटिव फील होता है।
वो हमेशा एक सकारात्मक ऊर्जा देते हैं और ज़िंदगी को जीने का एक नया नज़रिया सिखाते हैं। भगवान हमेशा ऐसे लोगों को हर तरह से खुश रखे।
It’s tragic that your worldview is so deeply transactional and starved of genuine affection that you cannot comprehend a story about mutual respect, dignity, and emotional maturity.
When you grow up in an environment where relationships are purely an exchange of currency or physical gratification, a story about a woman preserving a man’s self-respect while teaching him a beautiful lesson about balance will naturally look like 'simping' to you.
Not everything is a transaction, and not every act of love has an ulterior motive. Some people are just raised well enough to treat their partners like royalty. I hope you experience that kind of security someday. Bless your cynical heart. 🙏
With most of my collective senses, how come people wrote such kinds of stories? Only one way of thinking: either it's a simping story or a powerful thirst for getting pussy.🙏
कुछ दिन बात करने के बाद हमने तय समय पर मिलने के लिए दिल्ली का कनॉट प्लेस (Connaught Place) चुना। हम दोनों अपने ठीक समय पर घर से निकले और दिए हुए समय पर दोनों ही लंच के लिए Haldiram पहुँचे। यहाँ पर हमने लंच किया, आइसक्रीम खाई और फिर बाद में मूवी देखी।
रात के करीब 8 बजे हमें लगा कि कहीं उनका (PG) बंद न हो जाए, तो वार्डन को कॉल करके बोला कि आज थोड़ा लेट आया जाएगा, फ्रेंड आया हुआ है मिलने। उन्होंने हाँ का सिग्नल दे दिया। इसके बाद उन्होंने कहा "क्या हम आपके लिए (shoes) देखें? मुझे पर्सनली अच्छा लगेगा अगर
आप agree करो तो।"
मैंने छिपते छिपाते अपना wallet चेक किया कि (around) 4800 रुपये हैं मेरे पास, जो कि मैं ठीक से बजट में खरीद सकता हूँ। हम एक अच्छे ब्रांड के शोरूम में एंटर हुए और जो भी (choose) किया, सब मैडम ने ही किया। मुझे क्लियरली बोला गया "shoe मेरी पसंद के ही लेंगे हम इस बार, आपकी पसंद के फिर कभी देख लेंगे।"
मैं बैठ गया और शूज़ ट्राई करता रहा। एक शू उन्हें पसंद आया और फाइनली उन्होंने मुझसे ही पूछकर फाइनल किया कि "अच्छा लगा तुम्हें?"* और मैंने हाँ कहा।
मैंने शूज़ जल्दी से पहने कि रेट पता कर लूँ, अगर बजट से ज़्यादा हुआ तो मैं बोल दूँगा कि इतने भी अच्छे नहीं हैं। लेकिन मेरे काउंटर पर पहुँचने से पहले ही बिल pay हो चुका था और शूज़ का प्राइस था अराउंड 18,000 रुपए...
मैंने बिल देखा और उनसे कहा कि ये बहुत (costly) हैं, हम ठीक से बजट में भी ले सकते थे सामने से रिप्लाई आता है "शूज़ कंफर्टेबल और अच्छे लगे या नहीं, पहले बस ये बताओ।"
मैंने कहा "कंफर्टेबल भी हैं और अच्छे भी, but बजट फ्रेंडली नहीं लगे।"
तब उन्होंने कहा "तो कितना बजट था तुम्हारा?"
मैंने कहा "4500 Maximum"
तो सामने से जवाब आता है "चलो फिर, अपने 4500 के बजट में से आज मुझे इंडिया गेट घुमा दो। मैं कभी शाम को वहाँ नहीं गई, सुना है अच्छा क्राउड रहता है। शायद थोड़ा और अच्छा एंड हो जाए हमारे इस मिलने का, क्योंकि मैं चाहती हूँ कि हमारी यादें और अच्छी बनें इस दिन की।"
हमने ऑटो लिया और इंडिया गेट पहुँचे। वहाँ पर हमने उनकी पसंद की आइसक्रीम खाई। फिर उन्होंने कहा "अपना वॉलेट देना, मेरे पास चेंज नहीं हैं इन भैया को देने के लिए।" उन्होंने भैया को pay किया और वॉलेट कुछ समय बाद मुझे वापस दे दिया।
अच्छे से सब जगह घुमाने के बाद, हमने डिनर किया और वहाँ से उनको उनके पीजी छोड़कर मैं अपने रूम पर वापस आ गया। उनको पीजी छोड़ने के बाद जब मैं वापस आ रहा था, तो मैंने वॉलेट निकाला... और उसमें 5000 रुपये कैश उन्होंने रख दिया था!
रूम पर पहुँचकर मैंने कॉल किया और पूछा कि उन्होंने ये 5000 मेरे वॉलेट में अलग से क्यों डाले? तो सामने से रिप्लाई आता है.....
"हम दोबारा भी घूमने चलेंगे जल्द ही, और मैं चाहती हूँ कि आप मेरे लिए कुछ अच्छा सा खरीदें and जो खरीदोगे, वही पहनकर चलना है नेक्स्ट टाइम। so अपनी पसंद का खरीदना कुछ, और अपने बजट में ही खरीदना मेरे लिए... क्योंकि मेरे पास सिर्फ पैसे थे जिससे मैंने आपके लिए कुछ खरीदा, but आपके पास समझ भी है कि कितना ठीक है और कितना नहीं। So उम्मीद करती हूँ आप समझ रहे होंगे कि मैं क्या कहना चाह रही हूँ..." और मैंने हाँ में हाँ मिलाया और हमने फोन रख दिया।
P.S~ हमारे वाली ने तो राजा की तरह रखा था हमें तो हमेशा से... बाकी 370 रुपये खर्च करने वाले रोते रहें, क्योंकि आप थे भी इसी लायक!
@Storytellerrr_
@advpiyushdu Kyonki hum dono ko hi aaj bhi online transactions karna pasand nahin , bahut bada amount hota hai to hi hum pay karte hain.. otherwise cash hi use karte hain..
@Arpita56255489 Nahin ma'am kuch save nahin hai.... sab gya account ke saath hi gya ,haa kuch posts jarur same post ho sakti hain aage kabhi kynki vo itni baar likh chuka hoon words dimag se jaate hi nahin..