कायर नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को हर मिनट एक ब्लॉकिंग ऑर्डर दिया
2024-25: 2,312 ब्लॉकिंग ऑर्डर
मार्च-जुलाई 2026: सिर्फ़ 5 महीनों में 1,95,000 ब्लॉकिंग ऑर्डर
आधे से ज़्यादा ब्लॉकिंग इंस्टाग्राम को, जो युवाओं का प्लेटफॉर्म है
इतना डरते हैं मोदी जी Gen Z से!
मैं वही लड़की हूं- जिसने मुंबई में पुलिस की वैन को रोका था और अब मेरे बारे में कई नैरेटिव चलाए जा रहे हैं।
मैंने 20 बच्चों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिए जाने से रोका था। अब मुझे हैरेस किया जा रहा है, जो कि क्राइम है।
मैंने 27 जुलाई को पुलिस में शिकायत की थी, लेकिन आज 5 अगस्त है और अब तक FIR नहीं हुई है। हालांकि, मुझे खुशी है कि मैं जिन युवाओं के लिए खड़ी हुई, आज वे मेरे साथ खड़े हैं।
: रिया अहीर जी
@masijeevi जब मैं कॉलेज में था तो मेरे प्रोफ़ेसर ने एक बात बोली थी
सरकार नागरिकों को नागरिक नहीं समझती, सिर्फ बोझ समझती है
सरकार चाहती है कैसे भी लोग जानवरों के जैसे अपना जीवन पूरा करे और मर जाये,
Singling out a young woman like Ruchika & making an example of her when thousands, if not more, were shouting slogans…Will police arrest every single person out of the protests attended by lakhs?
Also, a “Gen Z friendly” PM, can’t tolerate GenZ language?
https://t.co/IGRCRMm8Yk
Urgent attention @priyankagandhi@SupriyaShrinate@yadavakhilesh@poojashukla04
BJP have deployed the entire state machinery against a 25 year old girl. These people are hounding her like a pack of wolves and advocating for sexual violence against her.
Please help her out!!
This Girl used many expletives against Modi. It was in bad taste, but that's not a crime.
If She was a US citizen, she could say far worse things against Trump & NO ONE could touch her - That's Freedom of Speech - Absolute Freedom. No ifs & buts.
Convicted R@pist Babas are roaming free and a Misguided Girl is running from Police. That is Modi's India...
भाई समझो अंधभक्तों को महिलाओं द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा से असल तकलीफ नहीं है, बल्कि उनकी रूढ़िवादी सोच इस बात को बर्दाश्त नहीं कर पा रही कि महिलाएं घर से निकलकर सड़कों पर विरोध क्यों दर्ज करा रही हैं। महिलाओं को 'मर्यादा' का पाठ पढ़ाने वाले ये ट्रोल्स खुद कमेंट सेक्शन में जिन भद्दी और घटिया टिप्पणियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह महिलाओं के शब्दों से कहीं ज्यादा आपत्तिजनक हैं। यह दोहरा चरित्र साफ दिखाता है कि मुद्दा भाषा की गरिमा का नहीं, बल्कि पितृसत्तात्मक मानसिकता के तहत महिलाओं की आवाज को दबाने का है।
तुम जैसे अंधभक्तों को महिलाओं द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा से असल तकलीफ नहीं है, बल्कि उनकी रूढ़िवादी सोच इस बात को बर्दाश्त नहीं कर पा रही कि महिलाएं घर से निकलकर सड़कों पर विरोध क्यों दर्ज करा रही हैं। महिलाओं को 'मर्यादा' का पाठ पढ़ाने वाले ये ट्रोल्स खुद कमेंट सेक्शन में जिन भद्दी और घटिया टिप्पणियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह महिलाओं के शब्दों से कहीं ज्यादा आपत्तिजनक हैं। यह दोहरा चरित्र साफ दिखाता है कि मुद्दा भाषा की गरिमा का नहीं, बल्कि पितृसत्तात्मक मानसिकता के तहत महिलाओं की आवाज को दबाने का है।