झारखंड, जिस धरती ने देश को खनिज दिए,उद्योगों को ताकत दी विकास की नींव मजबूत की… आज वहीं के युवा अपने ही हक़ के लिए सड़कों पर आवाज़ उठाने को मजबूर हैं।
सवाल उस शिक्षा और भर्ती व्यवस्था का है, जिस पर आज लगभग हर राज्य को गंभीरता से विचार करने की ज़रूरत है।
क्या इन छात्रों की आवाज़ भी 35–40 दिन तक यूँ ही अनसुनी रहेगी? क्या फिर किसी बड़े आंदोलन, किसी बड़ी घटना या किसी बड़े दबाव का इंतज़ार होगा?
अगर समय रहते छात्रों की गुहार सुन ली जाए… तो आखिर क्या हरज है? संवाद की शुरुआत इतनी देर से क्यों होती है?
@CJP_RAJASTHAN__ राजस्थान की धरती शूरवीरों की तुम जैसे कोकोरोचो की कोई जरूरत नहीं है,यहाँ अनेक युवा नेता हैं जो छात्रों की आवाज बन जाएंगे।तू पहले पंजाब ओर झारखंड जा वहां उन छात्रों की आवाज उठा तब जानूंगा की तुम छात्र हित की बात करता है।
श्री @madandilawar जी
० अंतिम बार तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले 2018 में भाजपा सरकार ने ही किये थे।
० तृतीय श्रेणी शिक्षक वरिष्ठता त्याग हेतु भी तैयार हैं।
० 2018 से आजतक तृतीय श्रेणी शिक्षक तबादले की इंतजार कर रहा है ये इंतजार बहुत दुखदाई हो रहा है।
० मेडिकल कंडीशन/ विकलांगता वाले तृतीय श्रेणी शिक्षक बहुत ही कष्टकारी परिस्थितियों से गुजर रहे हैं।
० एकल/तलाकशुदा महिला बहुत ही असुरक्षित और दुःखी हालात में है।
० तृतीय श्रेणी शिक्षकों की अलग अलग जगह पति-पत्नी की पोस्टिंग की वजह से उनमें तलाक और विवाद की स्थितियां बन रही है।
० दूरस्थ इलाकों में पोस्टिंग की वजह से शिक्षकों की शादियां भी नहीं हो रही ।
० तृतीय श्रेणी शिक्षक घरों से दूर होने के कारण सामाजिक रूप से कट चुका है।
० सैकड़ों किलोमीटर दूर पदस्थापित होने की वजह से घर परिवार में बूढ़े मां-बाप का ध्यान भी नहीं रख पा रहे हैं।
० घर परिवार से दूर तृतीय श्रेणी शिक्षक तनाव और एकलपन में जीवन जी रहा है जो उसे मानसिक तनाव दे रही है।
कृपया सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले कर उनको राहत प्रदान करें।
#3rdग्रेड_शिक्षक_तबादले_करो
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