लोग अपने बच्चों का नाम भी सोचकर रखते हैं वो कितना भी बदसूरत क्यों न हो नाम उसका सुंदर ही होता है, दुनियां के नजर में उसकी सूरत जो भी हो पर मां बाप के नजर में वही सुन्दर है, लेकिन ये किस मानसिकता के लोग हैं जो संस्था का नाम कॉकरोच रखकर क्रांति लाना चाहते हैं, धन्य है ऐसे लोग.
सरकार सिस्टम से भ्रष्टाचार और घूसखोरी हटाना चाहती है तो उन्हें हर जिले में निगरानी विभाग की इकाई स्थापित करनी चाहिए. जहाँ शिकायतकर्ता आसानी से पहुंचकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं. सरकार की थोड़ी बजट बढ़ेगी लेकिन यकीन मानिये भ्रष्टाचार जड़ से समाप्त हो जाएगी.
मैकाले की शिक्षा पद्धति से उपजे तथाकथित विद्वानो के कुतर्कों की बात ही निराली है, खुद हवाई यात्रा से सफर करने वाले ये महामानव लग्जरी जीवन जीते हुए गरीबों शोषितों वंचितों के अधिकार की बात करते हैं,उन्हें लाज शर्म और हया भी नहीं होती,भाई साब झूठ की मिनार ज्यादा दिन नहीं टिकती.
दो तरह की बात हो सकती है या तो डीप स्टेट में विदेशी फंडिंग कम हो गई है या फिर हमारे देश के लोग अब उनके बदनियति को समझ गए हैं, ऐसे लोगों के झांसे में अब नहीं आ रहे हैं, जो हमारी सभ्यता और संस्कृति के दुश्मन हैं, तभी तो इसका सुपरा साफ कर दिया है,
सामने वाला जब आपकी चाल समझने लगे तो तरीका बदल लेना चाहिए, नतीजा सामने है महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन को जोड़कर लाया गया विल लोक सभा में गिर गया. अब ये मत कहियेगा कि यही तो हम चाह रहे थे.
हमारे यहां आज तक के सियासत में एक बात कॉमन रहा है कि सिस्टम बेरोजगारों का गणना कभी नहीं करता है,करोड़ों लगाकर सिर्फ जाति के आबादी की गिनती करती है,ताकि बड़ी आबादी वाले जाति को विशेष लाभ पहुंचाकर उस वोट से कुर्सी सुरक्षित रखा जा सके,ऐसे में कम आबादी वाली जातियां ठगा महसूस करती है.
मिडिल ईस्ट की लड़ाई महज एक युद्ध नहीं है, बल्कि प्रकृति की एक लीला भी है, आज तक जो दूसरे देशों को तबाह करने के लिए लाखों रूपये खर्च कर जाति और धर्म के नाम पर आपस में लड़बाते रहे,आज उनके सामने वही खड़ा हो गया है, कहते हैं दूसरों के लिए गड्ढा खोदा तो परिणाम भी वही होगा.