#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11,पृष्ठ 291 पर दयानंद सरस्वती ने लिखा है कि
श्रावण मास में भक्तों के ‘बम-बम’ नाद की तुलना सीधे बकरे की आवाज़ से की गई और त्रिलोकीनाथ महादेव को ‘प्रेतनाथ’और ‘भूतनाथ’ कहकर उपहास उड़ाया गया है।
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सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 297-298 पर दयानंद सरस्वती ने सिख धर्म के प्रथम गुरु, आदरणीय श्री गुरुनानक देव जी के ज्ञान और भाषा पर भी अनुचित आक्षेप लगाए। लिखा है कि उन्हें ज्ञान नहीं था !
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#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद इनकी आत्मकथा, पेज 17; महर्षि दयानंद समग्र क्रांति के अग्रदूत, पेज 21 एवं महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र, पेज 50 में उल्लेख है कि दयानंद जी चावल त्यागकर इतना अधिक भांग पी लिया करते थे कि बेसुध हो जाते थे।
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'सत्यार्थ प्रकाश' समुल्लास 11, पृष्ठ 289 पर! यहाँ दयानंद जी लिखते हैं कि मूर्तिपूजा के कारण रामचंद्र, श्रीकृष्ण, नारायण (विष्णु) और शिव का उपहास होता है और पुजारी उनके नाम पर भीख माँगकर उन्हें ‘भिखारी’ बनाते हैं।
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सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11,पृष्ठ 291 पर दयानंद सरस्वती ने लिखा है कि
श्रावण मास में भक्तों के ‘बम-बम’ नाद की तुलना सीधे बकरे की आवाज़ से की गई और त्रिलोकीनाथ महादेव को ‘प्रेतनाथ’ और ‘भूतनाथ’ कहकर उपहास उड़ाया गया है।
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सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 8, पृष्ठ 191-192 पर दयानंद जी दावा करते हैं कि सूर्य पर भी मनुष्य रहते हैं और वे वहाँ वेद पढ़ते हैं!
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सत्यार्थ प्रकाश' समुल्लास 11, पृष्ठ 289 पर! यहाँ दयानंद जी लिखते हैं कि मूर्तिपूजा के कारण रामचंद्र, श्रीकृष्ण, नारायण (विष्णु) और शिव का उपहास होता है और पुजारी उनके नाम पर भीख माँगकर उन्हें ‘भिखारी’ बनाते हैं।
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सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 8, पृष्ठ 191-192 पर दयानंद जी दावा करते हैं कि सूर्य पर भी मनुष्य रहते हैं और वे वहाँ वेद पढ़ते हैं!
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महर्षि दयानन्द सरस्वती का जीवन चरित्र पुस्तक ( प्रष्ठ 202) पर लिखा है कि दयानन्द जी तंबाकू खाते थे, सूंघते थे तथा हुक्का भी पीते थे।
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