जो वीर थे वो सरहद पर जंग में गए
जो कायर थे वह सभी संघ में गए
1963 में जन परेड थी
इसलिए संघी परेड में गए
मुखबिरी के पाप जो कभी धूल नहीं सकते
संघी कभी देशभक्त हो नहीं सकते 🙅
हरिद्वार ,उत्तराखंड
डबल इंजन है सरकार
फिर भी मां है लाचार
जिला अस्पताल मना कर देता है
बच्चों को दुनिया में लाने से
आशा कार्यकर्ता गिड़गिडाती रहती है
पर सुनता कोई नहीं
मां को वार्ड से बाहर निकाल दिया जाता है
आखिर मां बच्चे को इस दुनिया में लाती है
फर्श पर
मानवता में शून्य 😔
इसमें ब्लैक ही ब्लैक है व्हाइट नहीं। झूठ ही झूठ है, सच नहीं। बिना दिमाग़ की पत्रकारिता इसी को कहते हैं। बल्कि प्रोपेगंडा में तब्दील हो गई पत्रकारिता का ये जीता-जागता नमूना है।
सब जानते हैं कि यूपी में कैसा फासीवादी शासन चल रहा है, कैसे वहाँ अल्पसंख्यकों को सताया जा रहा है। ये नई तरह की सांप्रदायिकता है, दंगों का नया तरीक़ा है।
मगर ये बहना कॉमन सेंस का इस्तेमाल नहीं करेंगी, क्योंकि इनको तो राजा का बाजा बजाना है, अपने आकाओं को खुश करना है।
सचाई ये है कि यूपी इस समय देश का सबसे ज़्यादा सांप्रदायिक नफ़रत में डूबा राज्य है और इसका पूरा क्रेडिट योगी आदित्यनाथ को दिया जा सकता है।
शारदीय नवरात्रि महानवमी के पावन अवसर पर आप सबको हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
जगतजननी आदिशक्ति मां सिद्धिदात्री आप सबके जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का संचार करें।
जय माता दी।
एक अच्छी खबर ✨
मोदी सरकार ने देशहित और आपका भला सोचते हुए कमर्शियल सिलेंडर के दाम 16 रुपए बढ़ा दिए.
अब आप देश के विकास में ज्यादा योगदान कर पाएंगे, और आपके मन में 'देश के लिए कुछ किया' का भाव उत्पन्न होगा.
दिवाली से पहले मिला ये गिफ्ट कैसा लगा? इसे कैसे सेलिब्रेट करेंगे आप?
भारत के न्यूज चैनल वही फेक न्यूज आगे बढ़ा रहे हैं, जो BJP IT सेल चला रहा है.. जैसे 👇
• लद्दाख में कांग्रेस के काउंसलर वाली फेक खबर
• सोनम वांगचुक का अधूरा वीडियो
खास बात है कि ये जानते हैं कि ये खबरें फेक हैं, उसके बाद भी इसे चला रहे हैं.
उँगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो
ख़र्च करने से पहले कमाया करो
ज़िन्दगी क्या है ख़ुद ही समझ जाओगे
बारिशों में पतंगें उड़ाया करो
दोस्तों से मुलाक़ात के नाम पर
नीम की पत्तियों को चबाया करो
शाम के बाद जब तुम सहर देख लो
कुछ फ़क़ीरों को खाना खिलाया करो
अपने सीने में दो गज़ ज़मीं बाँधकर
आसमानों का ज़र्फ़ आज़माया करो
चाँद सूरज कहाँ, अपनी मंज़िल कहाँ
ऐसे वैसों को मुँह मत लगाया करो
राहत इंदौरी