निज धर्म गी आण,
शिर सांटे जे रुंख बचे तो भी सस्तो जाण।”
माँ अमृता देवी जी के अमर बलिदान की गौरवगाथा को जीवंतता प्रदान करने के लिए पर्यावरण प्रेमी, संत समाज एवं मातृशक्ति के नेतृत्व में तीसरे दिन भी महापड़ाव निरंतर जारी है।
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